Last Updated:
Telangana Movie Shooting Places : तेलंगाना के कामारेड्डी जिले का ऐतिहासिक दोमाकोंडा किला वीकेंड हेरिटेज डेस्टिनेशन बना, यूनेस्को एशिया पैसिफिक अवार्ड 2022 के बाद पर्यटकों और शूटिंग के लिए खास आकर्षण बना है. किले के भीतर स्थित दो मंजिला मुख्य महल, जिसे स्थानीय भाषा में ‘अद्दंकी अड्डा’ या ‘कांच का महल’ कहा जाता है, सांस्कृतिक समन्वय का शानदार उदाहरण प्रस्तुत करता है. महल के भूतल पर पारंपरिक भारतीय शैली की मेहराबें दिखाई देती हैं, जबकि ऊपरी मंजिल पर यूरोपीय शैली के ऊंचे और भव्य सफेद स्तंभ इसकी खूबसूरती को और बढ़ाते हैं.
हैदराबाद. इतिहास, स्थापत्य कला और शाही वैभव को अपने भीतर समेटे तेलंगाना के कामारेड्डी जिले का ऐतिहासिक दोमाकोंडा किला इन दिनों पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. लगभग 18वीं शताब्दी में निर्मित यह किला न केवल अपनी मजबूत सैन्य वास्तुकला के लिए जाना जाता है, बल्कि यह कुतुबशाही और निजाम काल में क्षेत्र पर शासन करने वाले कामीनेंनी वंश के रेड्डी सामंतों की कूटनीति, सांस्कृतिक विरासत और कला प्रेम की भी जीवंत गवाही देता है.
हैदराबाद से करीब 115 किलोमीटर दूर स्थित यह ऐतिहासिक धरोहर अब वीकेंड पर्यटन का पसंदीदा ठिकाना बनती जा रही है. इतिहास को करीब से महसूस करने और शाही दौर की झलक देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं. किले की भव्य संरचना, शांत वातावरण और ऐतिहासिक महत्व इसे अन्य पर्यटन स्थलों से अलग पहचान दिलाते हैं.
दोहरी स्थापत्य शैली बनाती है खास
दोमाकोंडा किला अपनी दोहरी स्थापत्य शैली के कारण वास्तुकला की दृष्टि से बेहद खास माना जाता है. किले के चारों ओर ग्रेनाइट के विशाल पत्थरों से बनी ऊंची दीवारें और मजबूत बुर्ज इसके रक्षात्मक सैन्य इतिहास को दर्शाते हैं. वहीं किले के भीतर स्थित दो मंजिला मुख्य महल, जिसे स्थानीय भाषा में ‘अद्दंकी अड्डा’ या ‘कांच का महल’ कहा जाता है, सांस्कृतिक समन्वय का शानदार उदाहरण प्रस्तुत करता है. महल के भूतल पर पारंपरिक भारतीय शैली की मेहराबें दिखाई देती हैं, जबकि ऊपरी मंजिल पर यूरोपीय शैली के ऊंचे और भव्य सफेद स्तंभ इसकी खूबसूरती को और बढ़ाते हैं. परिसर में मौजूद प्राचीन शिव मंदिर, शाही बावड़ी और खूबसूरत फव्वारे इसकी ऐतिहासिक भव्यता में चार चांद लगाते हैं.
यूनेस्को सम्मान के बाद बढ़ी पहचान
समय के साथ उपेक्षा का शिकार होने के कारण यह ऐतिहासिक धरोहर एक समय जर्जर होने लगी थी. हालांकि कामीनेंनी परिवार के वंशजों ने निजी स्तर पर इसके संरक्षण और पुनर्स्थापन का जिम्मा उठाया. मूल वास्तुकला से बिना किसी छेड़छाड़ के पारंपरिक निर्माण सामग्री का उपयोग करते हुए किले को उसका पुराना स्वरूप और वैभव लौटाया गया. इस संरक्षण कार्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली. वर्ष 2022 में दोमाकोंडा किले को प्रतिष्ठित यूनेस्को एशिया-पैसिफिक अवार्ड फॉर कल्चरल हेरिटेज कंजर्वेशन से सम्मानित किया गया. इस सम्मान के बाद किले की लोकप्रियता में तेजी से बढ़ोतरी हुई और यह राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की पसंदीदा जगहों में शामिल हो गया.
हेरिटेज पर्यटन का बन रहा नया केंद्र
आज दोमाकोंडा किला केवल एक ऐतिहासिक स्मारक भर नहीं रह गया है, बल्कि यह एक प्रमुख हेरिटेज डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है. यहां प्री-वेडिंग शूट्स, फोटोशूट और क्षेत्रीय फिल्मों की शूटिंग भी लगातार हो रही है. शाही महल, विशाल प्राचीरें और ऐतिहासिक परिवेश फोटोग्राफरों और फिल्म निर्माताओं को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं. यही वजह है कि हैदराबाद और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं. इतिहास, संस्कृति और स्थापत्य कला में रुचि रखने वालों के लिए दोमाकोंडा किला आज भी अतीत की गौरवशाली कहानी को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है.
About the Author
आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

