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Story Of Green Man Of India: बाड़मेर के नरपतसिंह राजपुरोहित ने नौकरी छोड़ साइकिल से देशभर में पर्यावरण जागरूकता फैलाई, ढाई लाख पौधे लगाए, इंडिया बुक, एशिया बुक, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज. अपनी पर्यावरण यात्रा के दौरान नरपतसिंह को कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. पहाड़ी क्षेत्रों में कई बार उनके सामने चट्टानें गिरीं और दुर्घटना का खतरा पैदा हुआ. एक बार उनका सामना पैंथर से भी हो गया था.
बाड़मेर. सरहदी बाड़मेर शहर के लंगेरा निवासी नरपतसिंह राजपुरोहित की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. कभी मिठाई की दुकान पर काम करने वाले नरपतसिंह ने जीवन की दिशा बदलकर खुद को पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया. वर्षों तक साइकिल से देशभर की यात्रा की, कठिन और जानलेवा परिस्थितियों का सामना किया और आज उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स तथा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है.
कभी मिठाई की दुकान पर काम करने वाले नरपतसिंह ने प्रकृति संरक्षण को अपना जीवन मिशन बना लिया. उन्होंने अपना कामकाज छोड़कर साइकिल से 3 साल 2 महीने 24 दिन की लंबी पर्यावरण यात्रा की. इस दौरान उन्होंने देशभर में लोगों को पर्यावरण संरक्षण और पौधारोपण के प्रति जागरूक किया. लाखों पौधों के संरक्षण और पौधारोपण से जुड़े उनके कार्यों के कारण लोग उन्हें आज ‘ग्रीनमैन’ के नाम से जानते हैं. उनका मानना है कि पर्यावरण को बचाने के लिए केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उनकी देखभाल और संरक्षण भी उतना ही जरूरी है.
कई बार मौत के करीब पहुंचे, फिर भी नहीं रुके
अपनी पर्यावरण यात्रा के दौरान नरपतसिंह को कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. पहाड़ी क्षेत्रों में कई बार उनके सामने चट्टानें गिरीं और दुर्घटना का खतरा पैदा हुआ. एक बार उनका सामना पैंथर से भी हो गया था. इसके बावजूद उन्होंने अपना हौसला नहीं खोया और पर्यावरण संरक्षण का अभियान लगातार जारी रखा. उनका कहना है कि जब लक्ष्य बड़ा हो तो रास्ते की मुश्किलें भी छोटी लगने लगती हैं.
ढाई लाख से अधिक पौधे लगा चुके हैं
नरपतसिंह बताते हैं कि अब तक वे करीब ढाई लाख पौधे लगा चुके हैं. इनमें 1400 से अधिक पीपल के पौधे शामिल हैं. वे केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पौधों के संरक्षण और देखभाल पर भी विशेष ध्यान देते हैं ताकि वे बड़े होकर पेड़ बन सकें. इसके अलावा हर वर्ष भीषण गर्मी के दौरान वे पक्षियों और वन्यजीवों के लिए जलकुंड बनाते हैं तथा घोंसलों का निर्माण भी करवाते हैं. उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण में पेड़-पौधों के साथ जीव-जंतुओं की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.
देश-दुनिया में मिली पहचान
पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए नरपतसिंह राजपुरोहित का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया जा चुका है. उनके प्रयासों को देशभर में सराहा गया है. आज वे पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं और लगातार लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझाने का काम कर रहे हैं.
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आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

