उत्तर भारत के कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों से मौसम का मिजाज लगातार बदला हुआ नजर आ रहा है. दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बार-बार आंधी-तूफान, धूल भरी हवाएं और गरज-चमक के साथ तेज हवाओं का दौर देखने को मिल रहा है. हालांकि इन घटनाओं के बावजूद अधिकांश क्षेत्रों में अपेक्षित बारिश नहीं हो रही है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर मौसम का यह असामान्य व्यवहार क्यों देखने को मिल रहा है?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इसके पीछे एक नहीं, बल्कि चार अलग-अलग मौसम प्रणालियां एक साथ सक्रिय हैं. यही वजह है कि उत्तर-पश्चिम भारत में वातावरण बेहद अस्थिर बना हुआ है और बार-बार तेज तूफानी गतिविधियां देखने को मिल रही हैं.
चार मौसम प्रणालियों का दुर्लभ मेल
विशेषज्ञों के मुताबिक इस समय उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर एक पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) सक्रिय है. आमतौर पर पश्चिमी विक्षोभ भूमध्यसागर, कैस्पियन सागर और काला सागर क्षेत्र से उत्पन्न होकर भारत तक पहुंचता है. सर्दियों में यही प्रणाली हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और बारिश का कारण बनती है.
लेकिन मई-जून के दौरान यही पश्चिमी विक्षोभ वातावरण में अस्थिरता बढ़ाने का काम करता है. ऊंचाई पर मौजूद ठंडी हवा और जमीन के पास गर्म हवा के बीच बड़ा तापमान अंतर पैदा हो जाता है, जिससे तेज कन्वेक्टिव गतिविधियां शुरू हो जाती हैं.
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत में निचले स्तर पर एक चक्रवाती परिसंचरण भी बना हुआ है. इसे सामान्य भाषा में वातावरण का घूमता हुआ भंवर कहा जा सकता है. यह प्रणाली आसपास के क्षेत्रों से नमी को अपनी ओर खींचती है और उसे ऊपर की ओर ले जाती है. जब नमी और गर्म हवा तेजी से ऊपर उठती है तो बादलों का तेजी से फॉर्मेशन होता है और अचानक आंधी-तूफान की स्थिति बन जाती है.
दो समुद्रों से पहुंच रही नमी
स्थिति को और जटिल बनाने का काम अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाएं कर रही हैं. एक तरफ बंगाल की खाड़ी से पूर्वी हवाएं उत्तर भारत में नमी पहुंचा रही हैं, वहीं दूसरी ओर अरब सागर से दक्षिण-पश्चिमी हवाएं भी बड़ी मात्रा में भाप लेकर आ रही हैं. जब दोनों दिशाओं से आने वाली नम हवाएं उत्तर भारत के ऊपर मिलती हैं तो वातावरण में ऊर्जा का स्तर काफी बढ़ जाता है. यही कारण है कि कई इलाकों में अचानक काले बादल छा जाते हैं, तेज गर्जना होती है और आंधी की रफ्तार खतरनाक स्तर तक पहुंच जाती है.
फिर बारिश कम क्यों हो रही है?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बादल बन रहे हैं और तूफान आ रहे हैं तो बारिश पर्याप्त मात्रा में क्यों नहीं हो रही? मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में अधिकांश तूफान अत्यधिक गर्म प्रकृति के हैं. इनमें तेज ऊपर उठती और नीचे गिरती हवाएं विकसित होती हैं. कई बार इन प्रणालियों की ऊर्जा का बड़ा हिस्सा तेज हवाओं, धूल भरी आंधी और ओलावृष्टि के रूप में निकल जाता है, जबकि वर्षा का क्षेत्र सीमित रह जाता है. यानी कुछ इलाकों में बहुत तेज बारिश हो सकती है, लेकिन व्यापक क्षेत्र में अच्छी वर्षा नहीं हो पाती. यही वजह है कि लोगों को आंधी-तूफान ज्यादा और बारिश अपेक्षाकृत कम महसूस हो रही है.
आगे क्या रह सकती है स्थिति?
मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि जब तक पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवाती परिसंचरण और दोनों समुद्री क्षेत्रों से नमी की आपूर्ति जारी रहेगी, तब तक उत्तर भारत में मौसम अस्थिर बना रह सकता है. आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में तेज हवाएं, धूल भरी आंधी, बिजली गिरने और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं. इसलिए लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देने और खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.

