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Indian Economy : ईरान संकट ने जहां दुनियाभर की ग्रोथ को सुस्त कर दिया है, वहीं भारत और अमेरिका अपनी वृद्धि बनाए रखने में कामयाब रहेंगे. ऐसा मानना विश्व आर्थिक मंच का, जिसने दुनियाभर में कराए एक सर्वे में दावा किया है कि ईरान संकट के बाद महंगाई के रूप में अगली चुनौती आने वाली है.
डब्ल्यूईएफ ने भारत की ग्रोथ को लेकर पॉजिटिव रिपोर्ट दी है.
नई दिल्ली. विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने कहा है कि अगले एक वर्ष में ग्लोबल ग्रोथ कमजोर पड़ने की आशंका है, जबकि भारत मजबूत वृद्धि संभावनाओं वाले देशों में सबसे आगे बना हुआ है. मंच ने दुनिया को अगले आने वाले खतरे को लेकर भी आगाह किया कहा कि ईरान संकट के बाद दुनिया के सामने महंगाई के रूप में नई चुनौती होगी. बावजूद इसके भारत और अमेरिका की अर्थव्यवस्था इन चुनौतियों से अन्य देशों के मुकाबले बेहतर तरीके से निपटने में कारगर रहेगी.
दुनियाभर के मुख्य अर्थशास्त्रियों के बीच कराए गए एक सर्वेक्षण पर आधारित रिपोर्ट में करीब 90 फीसदी अर्थशास्त्रियों ने ग्लोबल ग्रोथ में गिरावट की आशंका जताई है, जबकि 13 फीसदी ने ग्लोबल मंदी का भी अनुमान जताया है. रिपोर्ट के मुताबिक, 94 फीसदी अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति प्रभावित होने से अगले एक वर्ष में महंगाई बढ़ सकती है. इसका कारण पश्चिम एशिया में तनाव और व्यापार मार्गों में बाधाओं से जुड़ा है.
भारत और अमेरिका क्यों रहेंगे आगे
डब्ल्यूईएफ ने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत और अमेरिका अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में बने रह सकते हैं, जिन्हें घरेलू मांग और निवेश का समर्थन मिलेगा. सर्वे में होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने को पिछले वर्ष के शुल्क संकट की तुलना में अधिक बाधक माना गया है. अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि यदि यह स्थिति वर्ष की दूसरी छमाही तक जारी रहती है तो इसका प्रभाव कोविड-19 महामारी जैसी गंभीरता तक पहुंच सकता है, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन, ऊर्जा और खाद्य लागत पर व्यापक असर पड़ेगा.
ईरान संकट लंबा चला तो मुसीबत बढ़ेगी
डब्ल्यूईएफ की प्रबंध निदेशक सादिया जाहिदी ने कहा कि यह गतिरोध जितना लंबा चलेगा, उतनी ही अधिक दीर्घकालिक लागत उन लोगों पर पड़ेगी जो इसका बोझ उठाने में सबसे कम सक्षम हैं. रिपोर्ट कहती है कि इस संकट का सबसे अधिक असर पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका पर पड़ने की आशंका है, जबकि भारत और अमेरिका अपेक्षाकृत मजबूत बने रह सकते हैं. भारत के बारे में खास तौर पर कहा गया है कि इसकी वृद्धि संभावनाएं लगातार मजबूत बनी हुई हैं. सर्वे में शामिल 52 फीसदी अर्थशास्त्री भारत में मजबूत या बहुत मजबूत वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं, जिससे यह सबसे बेहतर प्रदर्शन वाला देश बना हुआ है.
अगले साल कितनी होगी भारत की ग्रोथ
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था 2026-27 में 6.5 फीसदी की दर से बढ़ सकती है, हालांकि पश्चिम एशिया संकट के चलते जोखिम बने हुए हैं. डब्ल्यूईएफ ने कहा कि बड़े उभरते बाजारों में भारत पैमाने, वृद्धि और संभावनाओं का सबसे स्पष्ट मिश्रण प्रस्तुत करता है. भारत ने व्यापार और पूंजी प्रवाह के रास्ते लगातार खोले हैं, सक्रिय आर्थिक नीति अपनाई है और बाजार पहुंच का विस्तार किया है. हालांकि, वैश्विक जोखिम बढ़ रहे हैं और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव प्रमुख चिंता बना हुआ है. बावजूद इसके ग्रोथ के मामले में भारत अन्य देशों से आगे खड़ा मिलेगा.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

