Last Updated:
मध्यप्रदेश इन दिनों भीषण गर्मी की मार झेल रहा है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. धार्मिक नगरी उज्जैन में सुबह के सिर्फ 9 से 10 बजे के बीच ही तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों को दिन की शुरुआत में ही तेज गर्मी का सामना करना पड़ रहा है. वहीं मध्यप्रदेश के कई क्षेत्रों के कई हिस्सों में पारा 47 से 48 डिग्री तक पहुंच चुका है.
मध्यप्रदेश इन दिनों भीषण गर्मी की मार झेल रहा है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. धार्मिक नगरी उज्जैन में सुबह के सिर्फ 9 से 10 बजे के बीच ही तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों को दिन की शुरुआत में ही तेज गर्मी का सामना करना पड़ रहा है. वहीं मध्यप्रदेश के कई क्षेत्रों के कई हिस्सों में पारा 47 से 48 डिग्री तक पहुंच चुका है.मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल सामान्य मौसमी बदलाव नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन यानी क्लाइमेट चेंज और अल नीनो प्रभाव इस भीषण गर्मी के पीछे बड़ी वजह माने जा रहे हैं.
मई बना हीट पीक, सुबह से ही झुलस रहा मध्य प्रदेश
उज्जैन की शासकीय जीवाजी वेधशाला के प्रशाशक राजेंद्र गुप्त ने बताया कि मई का मध्य हर साल गर्मी का सबसे तीखा दौर माना जाता है. इस दौरान सूर्य की किरणें धरती पर अधिक प्रभाव डालती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ने लगता है. शहरों में कंक्रीट की इमारतें, सड़कें और पक्के ढांचे दिनभर गर्मी को अपने अंदर समेटकर फिर बाहर छोड़ते हैं, जिससे सुबह से ही तपिश महसूस होने लगती है. वहीं पेड़-पौधों और हरियाली से घिरे क्षेत्रों में तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है और वातावरण कुछ राहत भरा महसूस होता है.
क्या है आखिर ‘सुपर एल नीनो’?
आसान शब्दों में कहें तो जब प्रशांत महासागर की सतह सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाती है, तो उसे एल नीनो कहा जाता है. लेकिन जब यह तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ जाए, तो स्थिति ‘सुपर एल नीनो’ का रूप ले सकती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार समुद्र में दिख रहा वार्मिंग पैटर्न पिछले 40 सालों में सबसे अलग और चिंताजनक है. इंडोनेशिया और अमेरिका के तटीय क्षेत्रों के पास समुद्र में असामान्य गर्मी जमा हो गई है, जिससे एक खतरनाक वार्मिंग रिंग बनने की आशंका बढ़ गई है.
मध्यप्रदेश पर क्या होगा इस का असर
इस मौसमी बदलाव का सबसे पहला असर भीषण गर्मी के रूप में दिखेगा. जैसा की इन दिनों दिख रहा है कई जिलों मे पिछले साल का गर्मी का रिकॉर्ड टूट चूका है. मौसम विभाग पहले ही कई राज्यों में भयंकर लू का अलर्ट जारी कर चुका है. विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले हफ्तों में सिर्फ दिन ही नहीं, बल्कि रातें भी झुलसाने वाली होंगी. इसके अलावा, विशेषज्ञों के अनुसार इस साल मानसून सामान्य से काफी कमजोर रह सकता है. जहां देश में औसतन 870 मिमी बारिश होती है, वहीं इस बार इसके गिरकर 800 मिमी तक रहने का ही अनुमान है. उज्जैन की वैधशाला के प्रशाशक राजेंद्र गुप्त ने बताया जैसे बारिश का 100% अनुमान लगाया जाता है कि इतनी होंगी. लेकिन इस बार बारिश 92% ही लग रही है. जो आगे और भी कम हो सकती है.

