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कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र गौतम अनुसार अगर मई महीने में किसान गोबर की सड़ी हुई खाद का सही तरीके से उपयोग करें तो मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है. धान की फसल बेहतर होती है. जैविक खाद से न सिर्फ जमीन की गुणवत्ता सुधरती है बल्कि उत्पादन भी बढ़ता है.
मध्य प्रदेश में किसानों ने खरीफ सीजन की तैयारी शुरू कर दी है. जून के शुरुआती सप्ताह से धान की नर्सरी और बीज की बुवाई शुरू होने वाली है. ऐसे में कृषि विशेषज्ञ किसानों को खेत तैयार करते समय सड़ी हुई गोबर खाद के इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं. यदि किसान अभी से खेतों में जैविक खाद डालें तो मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ेगी और धान की फसल बेहतर उत्पादन देगी.
सीधी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र गौतम ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि धान की खेती के लिए खेत तैयार करते समय प्रति एकड़ करीब 200 से 250 क्विंटल सड़ी हुई गोबर खाद डालना फायदेमंद रहता है। इससे मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी नहीं होती. फसल को प्राकृतिक रूप से पोषण मिलता है. उन्होंने कहा कि गोबर प्राकृतिक खाद का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है, जो मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के साथ उसकी जल धारण क्षमता भी बढ़ाता है.
धान की खेती में जैविक खाद का कमाल
डॉ. गौतम के अनुसार किसान ताजा गोबर सीधे खेत में डालने से बचें, क्योंकि इससे खेत में अधिक गर्मी पैदा हो सकती है. पौधों को नुकसान पहुंच सकता है. उन्होंने सलाह दी कि गोबर को कम से कम 2 से 3 महीने तक गड्ढे में सड़ाकर जैविक खाद तैयार करें. गेहूं की कटाई के बाद खाली खेतों में इस खाद को फैलाकर हल्की जुताई कर मिट्टी में मिला देना चाहिए. इससे खाद के पोषक तत्व सीधे जमीन तक पहुंचते हैं. मिट्टी अधिक उपजाऊ बनती है. मोड़ी गांव के किसान रामाशंकर कुशवाहा ने लोकल 18 को बताया कि किसान गोबर की खाद के साथ ढैंचा और सन जैसी हरी खाद वाली फसलें भी बो सकते हैं. कुछ समय बाद इन फसलों को खेत में पलट देने से मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है. इससे रासायनिक खाद की जरूरत कम होती है और खेती की लागत भी घटती है.
मिट्टी रहेगी सालों तक उपजाऊ
उन्होंने कहा कि लगातार रासायनिक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जबकि गोबर की खाद मिट्टी को फिर से उपजाऊ बनाने में मदद करती है.किसानों का मानना है कि जैविक खाद के इस्तेमाल से खेत में केंचुए और सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ती है, जो मिट्टी को प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनाते हैं. वहीं प्रोफेसर अनुपम दुबे के अनुसार धान रोपाई से पहले यदि किसान गोबर की खाद का सही उपयोग करें तो फसल मजबूत होती है. उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिलती है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जैविक खेती की ओर बढ़ना आने वाले समय में किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है.

