नई दिल्ली: भारत को लेकर दुनिया की सोच बदल चुकी है, लेकिन यूरोप के कुछ हिस्से अब भी पुरानी किताबों और औपनिवेशिक चश्मे से भारत को देखने की कोशिश कर रहे हैं. नॉर्वे के एक बड़े अखबार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सपेरे के रूप में कार्टून में दिखाना सिर्फ एक व्यंग्य नहीं, बल्कि उस मानसिकता की झलक है जो आज भी भारत को 1970 के दशक की तस्वीरों में कैद समझती है. हैरानी की बात यह है कि जिस भारत ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर इतिहास रचा, जिसने डिजिटल पेमेंट्स में दुनिया को पीछे छोड़ दिया, जिसने दुनिया की सबसे बड़ी युवा प्रतिभा शक्ति तैयार की, उसी भारत को ‘सपेरों का देश’ कहने की कोशिश हो रही है. यह वही भारत है जहां आज गांव का दुकानदार भी UPI से पेमेंट ले रहा है. जहां स्टार्टअप्स अरबों डॉलर की कंपनियां बना रहे हैं. जहां ISRO बेहद कम लागत में अंतरिक्ष मिशन सफल कर रहा है. दुनिया बदल गई है लेकिन यूरोप के कुछ मीडिया घरानों का मानसिक नक्शा अब भी अपडेट नहीं हुआ है. शायद यही वजह है कि भारत की हर नई उपलब्धि उन्हें चुभने लगी है.
असल में यह मामला सिर्फ एक कार्टून का नहीं है. यह उस बेचैनी की ओर इशारा करती है जो तेजी से उभरते भारत को देखकर पश्चिमी दुनिया के कुछ हिस्सों में दिखाई दे रही है. भारत आज केवल आबादी वाला बड़ा देश नहीं रहा. वह टेक्नोलॉजी, डिजिटल इकोनॉमी, रक्षा उत्पादन, स्पेस साइंस और ग्लोबल डिप्लोमेसी का बड़ा खिलाड़ी बन चुका है. G20 की अध्यक्षता से लेकर ग्लोबल साउथ की आवाज बनने तक भारत का प्रभाव लगातार बढ़ा है. यही वजह है कि पुराने यूरोपीय नैरेटिव कमजोर पड़ते दिख रहे हैं. जिस देश को कभी गरीबी और सांप-सपेरों से जोड़ा जाता था, वही देश अब दुनिया को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का मॉडल दे रहा है. नॉर्वे के कार्टून पर भारतीयों की नाराजगी इसलिए भी है क्योंकि यह आधुनिक भारत की वास्तविक तस्वीर को नकारने जैसा है. भारत अब आत्मविश्वासी है और अपनी उपलब्धियों पर गर्व करना जानता है.
- भारत की अर्थव्यवस्था इस समय दुनिया की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. IMF के अनुमानों के मुताबिक FY26 में भारत की विकास दर 7.3% रहने का अनुमान है. यह आंकड़ा कई यूरोपीय देशों से कई गुना ज्यादा है. नाममात्र GDP 4 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुकी है. चीन प्लस वन रणनीति का बड़ा फायदा भारत को मिल रहा है. दुनिया की कंपनियां अब भारत को सिर्फ बाजार नहीं बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब के रूप में देख रही हैं. यही वजह है कि Apple से लेकर Tesla तक भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं.
- भारत की ताकत सिर्फ अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है. यहां की युवा आबादी दुनिया के लिए सबसे बड़ा टैलेंट पूल बन चुकी है. Google, Microsoft, Adobe जैसी बड़ी टेक कंपनियों के शीर्ष पदों पर भारतीय मूल के लोग बैठे हैं. भारतीय इंजीनियर, डॉक्टर, रिसर्चर और उद्यमी आज दुनिया के हर बड़े सेक्टर में अपनी पहचान बना रहे हैं. यह वही देश है जिसे कभी पश्चिमी मीडिया ‘थर्ड वर्ल्ड’ कहकर देखता था. लेकिन अब वही भारत AI, फिनटेक, स्पेस टेक और बायोटेक में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
देशभर में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, रेलवे और मेट्रो नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है. (AI फोटो)
अर्थव्यवस्था की तेज उड़ान
भारत की GDP लगातार रिकॉर्ड बना रही है. मजबूत घरेलू मांग, डिजिटलीकरण और सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ने विकास को नई गति दी है. देश अब दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और PPP के आधार पर तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है. विदेशी निवेश तेजी से बढ़ रहा है. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नई फैक्ट्रियां खुल रही हैं. भारत अब केवल सेवा आधारित अर्थव्यवस्था नहीं रहना चाहता, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र बनने की दिशा में बढ़ रहा है. यही बदलाव पश्चिमी देशों को सबसे ज्यादा चौंका रहा है.
UPI का डिजिटल डंका
UPI भारत की सबसे बड़ी डिजिटल क्रांति बन चुका है. मार्च 2026 में 22,641 मिलियन ट्रांजेक्शन्स दर्ज किए गए. पूरे FY26 में यह आंकड़ा 228 बिलियन से ज्यादा पहुंच गया. सड़क किनारे चाय बेचने वाला दुकानदार भी QR कोड से पेमेंट ले रहा है. यही भारत की असली डिजिटल ताकत है. कई देश अब भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल को अपनाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. फ्रांस, सिंगापुर, UAE और कई देशों में UPI नेटवर्क को जोड़ा जा चुका है. जिस देश को कभी तकनीक में पिछड़ा माना जाता था, वही अब दुनिया को डिजिटल मॉडल दे रहा है.
चांद पर सितार और स्पेस पावर
चंद्रयान-3 ने भारत की वैश्विक छवि पूरी तरह बदल दी. 23 अगस्त 2023 को भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बना. यह सिर्फ वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं थी, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता का वैश्विक प्रदर्शन था. ISRO ने बेहद कम लागत में यह मिशन सफल किया. आज भारत के पास 300 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप्स हैं. गगनयान मिशन पर तेजी से काम चल रहा है. दुनिया अब भारत को सस्ती लेकिन अत्याधुनिक स्पेस टेक्नोलॉजी वाले देश के रूप में देख रही है.
टैलेंट और स्टार्टअप का पावर हाउस
भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम दुनिया के सबसे बड़े इकोसिस्टम में शामिल हो चुका है. देश में 2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स और 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न कंपनियां हैं. AI, फिनटेक, एडटेक और हेल्थ टेक में भारतीय युवा तेजी से नई कंपनियां खड़ी कर रहे हैं. भारतीय टैलेंट की मांग पूरी दुनिया में बढ़ रही है. अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व की कंपनियां भारतीय इंजीनियरों और टेक प्रोफेशनल्स पर निर्भर हैं. यही कारण है कि भारत को अब “टैलेंट सुपरपावर” कहा जाने लगा है.
रक्षा क्षेत्र की आत्मनिर्भरता
भारत अब हथियार खरीदने वाला देश भर नहीं रहना चाहता. वह रक्षा उत्पादन और निर्यात में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. FY26 में डिफेंस एक्सपोर्ट्स 38,424 करोड़ रुपए तक पहुंच गए. तेजस लड़ाकू विमान, आकाश मिसाइल, ब्रह्मोस और स्वदेशी ड्रोन दुनिया का ध्यान खींच रहे हैं. भारत 100 से ज्यादा देशों को रक्षा सामग्री निर्यात कर रहा है. निजी कंपनियों और DRDO के सहयोग से नई तकनीक विकसित हो रही है. यह बदलाव भारत की रणनीतिक ताकत को और मजबूत कर रहा है.
इंफ्रास्ट्रक्चर का अभूतपूर्व विस्तार
देशभर में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, रेलवे और मेट्रो नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है. राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 1.46 लाख किलोमीटर से ज्यादा हो चुका है. वंदे भारत ट्रेनें भारतीय रेलवे की नई पहचान बन रही हैं. UDAN योजना ने छोटे शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ दिया है. सोलर और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है. बिजली और इंटरनेट कनेक्टिविटी गांव-गांव तक पहुंच चुकी है. यह आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर भारत की आर्थिक ताकत को नई गति दे रहा है.
भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम दुनिया के सबसे बड़े इकोसिस्टम में शामिल हो चुका है. (AI फोटो)
नॉर्वे के कार्टून पर इतना विवाद क्यों हुआ?
नॉर्वे के अखबार द्वारा पीएम मोदी को सपेरे के रूप में दिखाने वाले कार्टून को कई लोगों ने भारत की पुरानी और अपमानजनक छवि से जोड़कर देखा. लोगों का कहना है कि आधुनिक भारत की उपलब्धियों को नजरअंदाज कर पुराने माइंडसेट दिखाना गलत है. यह विवाद इसलिए भी बढ़ा क्योंकि आज भारत डिजिटल, स्पेस और टेक्नोलॉजी में बड़ी ताकत बन चुका है.
UPI और चंद्रयान-3 ने भारत की छवि कैसे बदली?
UPI ने भारत को डिजिटल पेमेंट्स में दुनिया का लीडर बना दिया. वहीं चंद्रयान-3 ने भारत की वैज्ञानिक ताकत को साबित किया. इन दोनों उपलब्धियों ने दुनिया को दिखाया कि भारत कम लागत में भी बड़े और प्रभावशाली इनोवेशन कर सकता है. यही वजह है कि अब कई देश भारत के मॉडल को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं.
क्या भारत सच में वैश्विक सुपरपावर बनने की दिशा में बढ़ रहा है?
भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, युवा आबादी, डिजिटल क्रांति, रक्षा उत्पादन और वैश्विक कूटनीति यह संकेत देते हैं कि भारत तेजी से बड़ी वैश्विक शक्ति बन रहा है. हालांकि चुनौतियां अभी भी हैं, लेकिन मौजूदा रफ्तार बताती है कि आने वाले दशकों में भारत वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में निर्णायक भूमिका निभा सकता है.

