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सानिया कुछ समय तक अपने पति के साथ लंदन में रहीं. वहां बेहतर अवसर और सुविधाएं थीं, लेकिन उनके मन में हमेशा अपने देश के लिए कुछ करने की इच्छा बनी रही. बाद में उन्हें फिर से लंदन लौटने का मौका मिला, लेकिन उन्होंने भारत में ही रहकर काम करने का फैसला लिया. उनका कहना है कि भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल सही अवसर और मंच देने की है.
ग्रेटर नोएडा: सानिया शर्मा ने अपने सपनों को केवल निजी सफलता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें समाज के विकास से जोड़ दिया. कभी लंदन में रहने वाली सानिया आज भारत में रहकर महिलाओं, युवाओं और बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही हैं. उनका मानना है कि अपने देश में रहकर समाज और नई पीढ़ी के लिए काम करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है.
सानिया शर्मा ने लोकल 18 से बताया कि समाजसेवा और लोगों के लिए कुछ करने की भावना उन्हें अपने परिवार से मिली. उनके पिता आईएएस अधिकारी थे और उन्होंने हमेशा अपने पिता को दूसरों की मदद करते देखा. उनकी माता भी लोगों के लिए समर्पित भाव से काम करती थीं. यही संस्कार आगे चलकर सानिया की सोच और काम का आधार बने.
वापस आकर चला रहीं ग्लोबल कंपनी
सानिया कुछ समय तक अपने पति के साथ लंदन में रहीं. वहां बेहतर अवसर और सुविधाएं थीं, लेकिन उनके मन में हमेशा अपने देश के लिए कुछ करने की इच्छा बनी रही. बाद में उन्हें फिर से लंदन लौटने का मौका मिला, लेकिन उन्होंने भारत में ही रहकर काम करने का फैसला लिया. उनका कहना है कि भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल सही अवसर और मंच देने की है. उन्होंने बताया कि वह एक ग्लोबल कंपनी चला रही हैं, जिसका मुख्य कार्यालय दिल्ली और उत्तर प्रदेश में स्थित है. उनकी कंपनी की सबसे खास बात यह है कि यहां लगभग 98 प्रतिशत कर्मचारी महिलाएं हैं. इनमें कई ऐसी महिलाएं शामिल हैं, जो पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अपने करियर को आगे नहीं बढ़ा पा रही थीं. सानिया ने ऐसी महिलाओं को घर बैठे काम करने का अवसर दिया.
दे रहीं वर्क फ्राम होम की सुविधा
अपनी संस्था में वर्क फ्रॉम होम की सुविधा को प्राथमिकता दी है, ताकि महिलाएं अपने परिवार और नौकरी दोनों को संतुलित कर सकें. सानिया का कहना है कि कई प्रतिभाशाली महिलाएं केवल इसलिए पीछे रह जाती हैं क्योंकि उन्हें घर और बच्चों की जिम्मेदारियों के बीच करियर छोड़ना पड़ता है. बताया कि उनकी कंपनी ऐसी महिलाओं के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है. उन्होंने बताया कि वह केवल रोजगार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह युवाओं और बच्चों में एंटरप्रेन्योरशिप और इनोवेशन की सोच विकसित करने पर भी काम कर रही हैं. उनका मानना है कि पहले बच्चों से पूछा जाता था कि वे बड़े होकर डॉक्टर, इंजीनियर या आईएएस बनना चाहते हैं, लेकिन अब समय बदल चुका है. आज बच्चों को नए विचार विकसित करने और खुद का काम शुरू करने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है.
बच्चों के इनोवेशन को मिलेगा इनाम
इसी उद्देश्य से उन्होंने एक विशेष पहल शुरू की है, जिसमें बच्चों के नए और रचनात्मक आइडियाज को मंच दिया जाएगा. इस कार्यक्रम में सफल उद्यमियों को जज के रूप में बुलाया जाएगा, जो बच्चों के विचारों का मूल्यांकन करेंगे. बेहतर आइडियाज वाले बच्चों को सर्टिफिकेट और पुरस्कार भी दिए जाएंगे. सानिया का मानना है कि अगर बचपन से ही बच्चों में इनोवेशन और नेतृत्व की भावना विकसित की जाए, तो भारत भविष्य में दुनिया का सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बन सकता है.
उन्होंने बताया कि उनकी संस्था ऑनलाइन एजुकेशन के क्षेत्र में भी काम कर रही है. सानिया बताती हैं कि कई महिलाएं, जिन्होंने परिवार के लिए नौकरी छोड़ दी थी या स्वैच्छिक रिटायरमेंट ले लिया था, आज उनकी संस्था से जुड़कर देश-विदेश के बच्चों को ऑनलाइन पढ़ा रही हैं. इससे न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

