उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘सैफई’ का नाम आते ही दिमाग में सफेद खादी, रैलियां और सत्ता का गलियारा घूमने लगता है. लेकिन इसी ताकतवर ‘यादव कुनबे’ में एक ऐसा चेहरा भी था, जिसने सत्ता के सिंहासन के बजाय जिम के डंबल्स और लग्जरी कारों की रफ्तार को चुना. मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की मौत ने न सिर्फ समाजवादी परिवार को शोक में डुबो दिया है, बल्कि नेशनल हेडलाइंस में एक सस्पेंस भी पैदा कर दिया है. 38 साल की उम्र, फौलादी बदन और फिटनेस का ऐसा जुनून कि लोग उन्हें ‘आयरन मैन’ कहते थे, फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि लखनऊ के अस्पताल में उन्हें मृत लाया गया? प्रतीक की जिंदगी और उनकी मौत, दोनों ही किसी फिल्मी पटकथा जैसी लगती हैं. मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, प्रतीक पिछले कुछ समय से व्यक्तिगत तनाव से गुजर रहे थे और उनकी मौत के कारणों को लेकर अब कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.
खादी के बीच ‘ग्लैमर’ का इकलौता टापू
मुलायम सिंह यादव के घर में जन्म लेने का मतलब ही राजनीति मान लिया जाता है, लेकिन प्रतीक ने इस परंपरा को तोड़ा. जहां अखिलेश यादव और शिवपाल यादव गांव-गली की राजनीति कर रहे थे, वहीं प्रतीक अपनी 5 करोड़ की नीली लेम्बोर्गिनी को लेकर चर्चा में रहते थे. उन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा, कभी मंच से भाषण नहीं दिया. वे हमेशा एक ‘बिजनेस टायकून’ की छवि में रहे. उनके करीबियों का कहना है कि उन्हें राजनीति से कभी लगाव था ही नहीं.
पिता का वो लाडला, जिसे छुपाया गया
प्रतीक यादव का सार्वजनिक जीवन काफी बाद में शुरू हुआ. सालों तक दुनिया को पता ही नहीं था कि मुलायम सिंह यादव का एक और बेटा भी है. 2007 में जब पहली बार कानूनी तौर पर मुलायम ने उन्हें अपना बेटा माना, तब जाकर वे सुर्खियों में आए. प्रतीक अपनी मां साधना गुप्ता के बेहद करीब थे. कहते हैं कि मुलायम सिंह यादव के दिल के सबसे करीब प्रतीक ही थे, शायद इसलिए उन्होंने प्रतीक को राजनीति की उठापटक से दूर रखा.
फिटनेस ही बनी जान की दुश्मन?
प्रतीक यादव अपनी फिटनेस को लेकर इतने सजग थे कि दिन का बड़ा हिस्सा जिम में बिताते थे. उनकी मौत के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या जरूरत से ज्यादा बॉडीबिल्डिंग और सप्लीमेंट्स ने उनके दिल पर दबाव डाला? बहुत बार यह अक्सर खबर आती हैं कि कम उम्र में फिट दिखने वाले सेलिब्रिटीज को हार्ट अटैक क्यों आ रहे हैं. प्रतीक की ‘ब्रॉट डेड’ स्थिति इसी ओर इशारा कर रही है कि शरीर बाहर से जितना मजबूत था, अंदर से उतना ही थका हुआ था.
अपर्णा यादव और वो ‘आखरी’ विवाद
प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव का भाजपा में जाना पहले ही परिवार में दरार की वजह बना था. लेकिन मौत से पहले प्रतीक के सोशल मीडिया पोस्ट ने आग में घी का काम किया. उन्होंने सार्वजनिक रूप से तलाक की इच्छा जताई थी और पत्नी पर कई गंभीर आरोप लगाए थे. मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, उनके वैवाहिक जीवन में आई कड़वाहट ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया था, जो शायद उनकी अचानक मौत का एक बड़ा कारण बना.
भाई अखिलेश के साथ कैसा था रिश्ता?
अखिलेश और प्रतीक के बीच के रिश्तों को लेकर हमेशा सस्पेंस रहा. कैमरे के सामने दोनों ने कभी एक-दूसरे के खिलाफ कुछ नहीं कहा, लेकिन सियासी गलियारों में चर्चा थी कि सत्ता की चाबी अखिलेश के पास जाने से दूसरा पक्ष खुश नहीं था. हालांकि, प्रतीक ने हमेशा अखिलेश को अपना बड़ा भाई माना और कभी उनके राजनीतिक रास्ते में बाधा नहीं बने. प्रतीक के निधन पर अखिलेश का टूटना बताता है कि खून के रिश्तों में राजनीति कभी हावी नहीं हो सकी.
मुलायम की विरासत का एक हिस्सा खत्म
मुलायम सिंह यादव की मौत के बाद अब उनके छोटे बेटे का चले जाना यादव परिवार के लिए एक ऐसा घाव है जो शायद कभी नहीं भरेगा. साधना गुप्ता और मुलायम के जाने के बाद प्रतीक बिल्कुल अकेले पड़ गए थे. वे अपनी मां की विरासत और अपने व्यापार को संभाल रहे थे. उनकी मौत के साथ ही मुलायम सिंह यादव की ‘दूसरी फैमिली’ की वो मुख्य शाखा अब इतिहास बन गई है, जिसने कभी सपा के भीतर अपनी अलग धमक रखी थी.
क्या सियासी साजिश या महज हादसा?
सोशल मीडिया पर प्रतीक की मौत को लेकर कई थ्योरीज चल रही हैं. कोई इसे पारिवारिक कलह का नतीजा बता रहा है, तो कोई इसे ‘लाइफस्टाइल डिजीज’ मान रहा है. चूंकि वे एक बेहद हाई-प्रोफाइल व्यक्ति थे, इसलिए लोग मौत की विस्तृत जांच की मांग कर रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अस्पताल और पुलिस शुरुआती तौर पर इसे कार्डियक अरेस्ट मान रही है, लेकिन प्रतीक के जीवन के आखिरी कुछ महीने इतने तनावपूर्ण थे कि सच अभी भी परतों में छुपा है.

