Last Updated:
पश्चिमी घाट में हुए एक नए सर्वे में खुलासा हुआ है कि ड्रैगनफ्लाई और डैम्सफ्लाइ की 35% प्रजातियां गायब हो चुकी हैं. शहरीकरण और प्रदूषण के कारण मीठे पानी का इकोसिस्टम तबाह हो रहा है. ये कीट पर्यावरण की सेहत बताने वाले मुख्य संकेतक होते हैं. इनका गायब होना पूरे बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट के लिए एक गंभीर खतरे का संकेत है.

पश्चिमी घाट से गायब हुई ड्रैगनफ्लाई. (Photo made with Generative AI)
नई दिल्ली: दुनिया के सबसे बेहतरीन बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट में शामिल पश्चिमी घाट से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. एक हालिया सर्वे में खुलासा हुआ है कि भारत में पाई जाने वाली ड्रैगनफ्लाई (व्याध पतंग) और डैम्सफ्लाइ (सुई कीड़ा) की एक तिहाई प्रजातियां गायब हो चुकी हैं. हाल के सालों में जिस तेजी से शहरीकरण बढ़ा है, उसने इन कीटों के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है. रिसर्चर्स के अनुसार, यह गिरावट ग्लोबल लेवल पर कीटों की आबादी में आ रही भारी कमी का एक बड़ा संकेत है. पश्चिमी घाट की पहाड़ियों में हुआ यह दो साल का सर्वे बताता है कि वहां के इकोसिस्टम में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है.
इकोसिस्टम के लिए खतरे की घंटी है ड्रैगनफ्लाई का गायब होना
रिसर्चर्स ने चेतावनी दी है कि ड्रैगनफ्लाई और डैम्सफ्लाइ की प्रजातियों का स्थानीय स्तर पर खत्म होना बहुत चिंताजनक है. इन कीटों को ओडोोनेट्स भी कहा जाता है और ये पर्यावरण में होने वाले बदलावों के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं.
ये कीट अपने प्रजनन के लिए मीठे पानी के इकोसिस्टम पर पूरी तरह निर्भर रहते हैं.
इसका मतलब है कि इनका जीवन चक्र छोटा होता है और ये पर्यावरण में आने वाले किसी भी बदलाव पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं. अगर ये पश्चिमी घाट से गायब हो रहे हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि वहां के जल निकायों की सेहत बहुत खराब हो चुकी है.
2 साल के गहन सर्वे में क्या चौंकाने वाले सच आए सामने?
पश्चिमी घाट में प्रजातियों की कमी के पीछे क्या हैं मुख्य कारण?
About the Author
दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें
खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव
QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें


