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Pawan Khera Supreme Court Hearing: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर लगाए गए आरोपों से जुड़े कानूनी विवाद में फंसे कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी है.

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी गई थी. (फाइल फोटो)
Pawan Khera Supreme Court Hearing: पवन खेड़ा इन दिनों अदालती चक्कर में फंसे हुए हैं. असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर खेड़ा ने एक से ज्यादा पासपोर्ट रखने का आरोप लगाया था. कांग्रेस नेता के खिलाफ इसको लेकर मुकदमा दर्ज करा दिया गया. गिरफ्तारी से बचने के लिए पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया. खेड़ा ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. पवन खेड़ा की तरफ से सीनियर लॉयर अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील रखी. सिंघवी ने कहा कि उनका मुवक्किल देश से बाहर नहीं जा सकता है, क्योंकि पासपोर्ट आसानी से उपलब्ध नहीं होते हैं. सिंघवी ने आगे दलील दी कि पवन खेड़ा के आवास पर 50 से 70 पुलिसवाले भेज दिए गए, जैसे किसी आतंकवादी की तलाश चल रही हो. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलों पर जोरदार पलटवार करते हुए कहा कि वे (पवन खेड़ा) फरार हैं. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.
जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल चंदूरकर की पीठ पवन खेड़ा की याचिका पर सुनवाई कर रही है. सुनवाई के दौरान अभिषेक मनु सिंघवी ने पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में गिरफ्तारी की आवश्यकता पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यह मामला अभूतपूर्व है, जहां अभियोजन पक्ष खुद ही गिरफ्तारी की आशंका को असामान्य तरीके से पुष्ट कर रहा है. सुनवाई के दौरान सिंघवी ने दलील दी कि आरोपों की सच्चाई या झूठ मुकदमे का विषय है, लेकिन केवल आरोपों के आधार पर गिरफ्तारी उचित नहीं ठहराई जा सकती. उन्होंने कहा कि यदि आरोपों को मान भी लिया जाए, तब भी गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं बनती. पूछताछ, सहयोग और नोटिस के जरिए जांच पूरी की जा सकती है.
‘जैसे आतंकवादी की तलाश हो’
अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में कहा कि कोर्ट के आदेश के बाद पवन खेड़ा के निजामुद्दीन स्थित आवास पर 50 से 70 पुलिसवाले भेज दिए गए जैसे किसी आतंकवादी की तलाश हो. उन्होंने आगे दलील दी कि यह इस मामले में अनावश्यक कठोरता को दर्शाता है. उन्होंने सवाल उठाया कि किसी व्यक्ति को हिरासत में लेकर अपमानित करना क्यों जरूरी है, जबकि जांच के अन्य विकल्प उपलब्ध हैं. वहीं, अभियोजन पक्ष की ओर से कहा गया कि गैर-जमानती वारंट इसलिए जरूरी है, क्योंकि आरोपी प्रभावशाली है और फरार हो सकता है. इसके अलावा सबूतों या गवाहों को प्रभावित भी कर सकता है. इस पर सिंघवी ने पलटवार करते हुए कहा कि आज के समय में भागने का जोखिम कम है, क्योंकि पासपोर्ट जैसी चीजें आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं और निगरानी व्यवस्था मजबूत है. अभिषेक मनु सिंघवी ने सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के बयानों से भी शीर्ष अदालत को अवगत कराया. उन्होंने जोर देकर कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि है और गिरफ्तारी कोई स्वाभाविक या अनिवार्य प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए.
SG तुषार मेहता का करारा जवाब
पवन खेड़ा की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलों का जवाब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिया. एसजी तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि वे (पवन खेड़ा) फिलहाल फरार हैं और वीडियो जारी कर बता रहे हैं कि उन्होंने खुद को सुरक्षित रखा है. एसजी ने कहा कि यह पूरी तरह से असहयोग को दिखाता है. तुषार मेहता ने कहा कि यह सिर्फ मानहानि का मामला नहीं है. इसमें कुछ बहुत सीरियस है. उन्होंने इसमें विदेश हस्तक्षेप की आशंका भी जताई और कहा कि इस मामले की सही तरीके से जांच करना जरूरी है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

