Dholpur Hindi News: धौलपुर के गांवों में ‘छप्पर उठाने’ की परंपरा कभी सामाजिक एकता और सहयोग का अद्भुत उदाहरण हुआ करती थी. जब किसी परिवार को नया घर बनाना होता या छप्पर डालना होता, तो पूरे गांव को सामूहिक निमंत्रण दिया जाता था. इस निमंत्रण पर ग्रामीण बिना किसी मजदूरी के एक साथ जुटकर काम पूरा कर देते थे. यह केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे, सहयोग और विश्वास का प्रतीक था. इस प्रक्रिया में महिलाएं भी भोजन और अन्य व्यवस्थाओं में योगदान देती थीं, जिससे यह एक सामूहिक उत्सव जैसा बन जाता था. लेकिन बदलते समय, शहरीकरण, आधुनिक तकनीक और व्यक्तिगत जीवनशैली के कारण यह परंपरा अब धीरे-धीरे विलुप्त हो रही है. इसके खत्म होने से ग्रामीण सामाजिक संरचना और आपसी जुड़ाव पर भी असर पड़ रहा है, जो कभी गांवों की सबसे बड़ी पहचान थी.


