बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी में ढिलाई देख भड़के जज, अफसर पर ₹25000 का जुर्माना
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भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के काम में देरी होने पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल के भूमि सुधार विभाग के संयुक्त निदेशक पर 25,000 रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है. केंद्र सरकार ने जमीन अधिग्रहण के लिए पैसा दे दिया था, फिर भी काम अटका रहा. हाईकोर्ट ने विभाग की ढिलाई पर सख्त नाराजगी जाहिर की है.

सीमा सुरक्षा में बड़ी लापरवाही? केंद्र ने दिया पैसा फिर भी बंगाल में अटकी बाड़बंदी. (File Photo)
कोलकाता: कलकत्ता हाईकोर्ट ने भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने के काम में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने इस मामले में राज्य के भूमि एवं भूमि सुधार विभाग के संयुक्त निदेशक को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना है. मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच ने उन पर 25,000 रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है. अदालत ने पाया कि केंद्र सरकार ने जमीन अधिग्रहण के लिए जरूरी फंड काफी समय पहले ही जारी कर दिया था. इसके बावजूद राज्य सरकार ने अब तक बाड़बंदी के लिए जमीन संबंधित एजेंसियों को नहीं सौंपी है. इस लापरवाही ने सीमा की सुरक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट को अधर में लटका दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकारी कामकाज में ऐसी सुस्ती कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
फंड मिलने के बाद भी जानबूझकर हुई देरी
मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा के 128 किलोमीटर हिस्से में बाड़ लगनी है. इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार ने पूरा पैसा राज्य को ट्रांसफर कर दिया था. राज्य सरकार ने जमीन का अधिग्रहण भी कर लिया, लेकिन हकीकत में जमीन का कब्जा एजेंसियों को नहीं दिया गया. अदालत ने इस पर हैरानी जताई कि जब सब कुछ तैयार था, तो फाइलें आगे क्यों नहीं बढ़ीं. इसी वजह से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को काम शुरू करने में दिक्कत आ रही है.
अदालत में गलत रिपोर्ट पेश करना पड़ा महंगा
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान 27 जनवरी को इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी. कोर्ट जानना चाहता था कि 128 किलोमीटर जमीन के ट्रांसफर में आखिर क्या रुकावट आ रही है. लेकिन विभाग के संयुक्त निदेशक ने बुधवार को जो रिपोर्ट पेश की, वह अधूरी थी. इसमें केवल 8 किलोमीटर जमीन का जिक्र किया गया था. बाकी 120 किलोमीटर के हिस्से पर अफसर चुप्पी साधे रहे. अदालत ने इसे न्यायिक आदेश की अवहेलना और समय की बर्बादी माना. इसके बाद ही संयुक्त निदेशक पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाने का फैसला सुनाया गया.
क्या 15 दिन में सुलझ जाएगा जमीन का विवाद?
अदालत ने निर्देश दिया है कि जुर्माने की यह राशि 15 दिनों के भीतर कलकत्ता हाईकोर्ट की लीगल सर्विसेज अथॉरिटी में जमा करानी होगी. इसके साथ ही कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए पूरी और विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का अंतिम अल्टीमेटम दिया है. फिलहाल सीमा के 181 किलोमीटर के दायरे में बाड़बंदी का काम पेंडिंग पड़ा है. बीएसएफ को जमीन मिलते ही कंटीले तार लगाने का काम शुरू हो सकेगा. अब सबकी नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं कि क्या सरकार पूरी रिपोर्ट दे पाती है.
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दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें

