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Iran War Update: भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने ट्रंप द्वारा संघर्ष विराम बढ़ाने पर कड़ा रुख अपनाया है. न्यूज 18 इंडिया से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है और अमेरिका ने मजबूरी में युद्ध रोका है. उन्होंने साफ किया कि होर्मुज की घेराबंदी हटने और ईरान के 10 प्रस्तावों पर ही अब आगे बात होगी.

डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही (PTI File Photo)
नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संघर्ष विराम (Ceasefire) की अवधि बढ़ाने के फैसले के बाद भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने न्यूज 18 इंडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत की है. इस इंटरव्यू में उन्होंने अमेरिका की मंशा और ईरान की रणनीति पर बेबाकी से अपनी राय रखी है. उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि इस युद्ध की शुरुआत अमेरिका ने ईरान के खिलाफ की थी. हालांकि अब हालात बदल चुके हैं और कुछ खास परिस्थितियों की वजह से अमेरिका को युद्ध रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा है. ईरान का मानना है कि ट्रंप फिलहाल युद्ध जारी रखने की स्थिति में नहीं हैं.
डॉ. इलाही ने बताया कि अमेरिका ने पहले ईरान के सामने एक 15 सूत्रीय योजना रखी थी. ईरान ने इस योजना को सिरे से खारिज कर दिया और इसके जवाब में अपनी 10 सूत्रीय योजना पेश की. शुरुआत में अमेरिका इस पर सहमत दिख रहा था. लेकिन जैसे ही दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर आए, अमेरिका अपने पुराने रुख पर लौट गया. अमेरिका ने इन प्रस्तावों को मानने से इनकार कर दिया. इसके बाद अमेरिका ने अपने युद्धपोतों के जरिए ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश की. जब उन्हें लगा कि ईरान झुकने वाला नहीं है, तब जाकर उन्होंने संघर्षविराम को आगे बढ़ाने का रास्ता चुना.
अमेरिका की 15 सूत्रीय योजना को ईरान ने क्यों ठुकराया और अपनी क्या शर्तें रखीं?
ईरान के प्रतिनिधि डॉ. हकीम इलाही ने साफ कर दिया है कि भविष्य की कोई भी बातचीत ईरान की 10 सूत्रीय योजना के आधार पर ही होगी. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने जो 15 शर्तें रखी थीं, वे ईरान के हितों के खिलाफ थीं. ईरान अब अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है. डॉ. इलाही के मुताबिक अमेरिका केवल ‘बातचीत के लिए बातचीत’ करना चाहता है. उनका मकसद वास्तविक शांति स्थापित करना नहीं है. ईरान ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है कि अगर अमेरिका उनके 10 प्रस्तावों पर चर्चा के लिए आता है, तभी कोई समाधान निकल सकता है.
होर्मुज की नौसैनिक घेराबंदी हटने तक क्या ईरान बातचीत की मेज पर दोबारा लौटेगा?
इंटरव्यू के दौरान डॉ. इलाही ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण शर्त का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि फिलहाल अमेरिका ने ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी कर रखी है और उसे चारों तरफ से घेर लिया है. ईरान का कहना है कि जब तक यह नाकेबंदी और होर्मुज की घेराबंदी पूरी तरह नहीं हटती, तब तक बातचीत का कोई मतलब नहीं है. घेराबंदी हटने के बाद ही ईरान अगले कदम पर विचार करेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका शांति के नाम पर केवल दबाव बनाने की राजनीति कर रहा है. जिसे ईरान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा.
क्या ईरान को डोनाल्ड ट्रंप के वादों पर भरोसा है और युद्ध की स्थिति में उनकी क्या तैयारी है?
ट्रंप प्रशासन पर भरोसा करने के सवाल पर डॉ. इलाही ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि अमेरिका पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता. पिछले अनुभवों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि दो बार ऐसा हुआ जब बातचीत के दौरान ही अमेरिका ने पीछे हटकर ईरान पर हमला कर दिया. डॉ. इलाही ने कहा, ‘वे अपने वादों को पूरा नहीं करते और समझौते तोड़ना उनकी पुरानी आदत है’.
ईरान का कहना है कि वे बातचीत की मेज पर सिर्फ इसलिए आए हैं ताकि दुनिया को संदेश दे सकें कि वे शांति चाहते हैं. लेकिन अगर अमेरिका उन पर युद्ध थोपता है, तो ईरान भी पीछे नहीं हटेगा. डॉ. इलाही ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ईरान युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है. अब गेंद अमेरिका के पाले में है कि वह शांति का रास्ता चुनता है या संघर्ष का. ट्रंप के पास फिलहाल कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है, इसलिए उन्होंने संघर्ष विराम का सहारा लिया है.
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दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें

