Pahalgam News: 22 अप्रैल 2025. यह वह तारीख है, जब आतंकियों ने निहत्थे टूरिस्टों पर गोलियां बरसाईं थीं. धर्म पूछकर मारा था. मां-बहनों की सिंदूर को मिटाया था. आज उसी पहलगाम अटैक को एक साल हो गए. ठीक एक साल पहले पाकिस्तानी आतंकवादियों ने पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम दिया था. इस हमले के शिकार 26 बेकसूर लोग थे. उनमें से हर एक को उनका धर्म पूछने के बाद बहुत करीब से गोली मारी गई थी.
ऊपरी तौर पर देखने पर पहलगाम हमला ऐसा लगा मानो इसे जम्मू और कश्मीर के तेजी से बढ़ते पर्यटन उद्योग को बाधित करने के लिए ही अंजाम दिया गया था. आर्टिकल 370 को हटाए जाने और घाटी में अलगाववाद के खत्म होने के बाद से इस उद्योग में तेजी आने लगी थी. लेकिन अधिकारी आगाह करते हुए कहते हैं कि इस हमले का एक बड़ा संदेश था और यह केवल पर्यटन उद्योग तक ही सीमित नहीं था.
इसका मकसद भारत के लोगों को धर्म के नाम पर भड़काना था. आईएसआई और पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने इस हमले को अपनी हरी झंडी दी थी. आसिम मुनीर ने उम्मीद की थी कि इस पहलगाम अटैक का भारत की सांप्रदायिक सद्भाव पर असर पड़ेगा. यहां हिंदू-मुसलमान आपस में लड़कर एक-दूसरे को मारेंगे. मगर आसिम मुनीर के सपनों पर पानी फिर गया.
जी हां, भारत और भारत के लोगों ने इस पहलगाम अटैक के बाद सांप्रदायिक सद्भाव बिगडने नहीं दिया. भारत के लोगों ने पूरी स्थिति को बड़े नजरिए से देखा. आतंकवाद-रोधी अधिकारी कहते हैं कि नरेंद्र मोदी सरकार के लिए कई कड़े फैसले लेने की जरूरत थी. पाकिस्तान से होने वाले आतंकवाद के प्रति भारत की प्रतिक्रिया को परिभाषित करने वाली दो मुख्य बातें थीं- रणनीति में बदलाव और ‘ऑपरेशन सिंदूर’.
कैसे पाक को भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब
अधिकारी बताते हैं कि पाकिस्तान लंबे समय से इस बात का फ़ायदा उठाता आ रहा था कि भारत हर हमले को सीमा पार से होने वाले आतंकवाद का एक कृत्य ही मानता था. इस बार देश के राष्ट्रीय सुरक्षा योजनाकार पूरी तरह से दृढ़ थे और रणनीति को नए सिरे से लिखा गया. वह यह था कि अब से भारत पाकिस्तान द्वारा किए गए हर आतंकवादी हमले को युद्ध का एक कृत्य मानेगा. रणनीति में इसी बदलाव के चलते ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया गया. भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा चलाए गए इस ऑपरेशन सिंदूर अभियान के परिणामस्वरूप पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा.
ऑपरेशन सिंदूर में सबसे अहम अटैक था मुरीदके में स्थित लश्कर-ए-तैयबा के मुख्य प्रशिक्षण शिविर को पूरी तरह से नष्ट कर देना. एक और अहम हमला बहावलपुर में स्थित जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय पर किया गया. इस ठिकाने को पूरी तरह से मलबे में तब्दील कर दिया गया. इस ऑपरेशन सिंदूर में आतंकवादियों की लाशें बिछ गईं. कई आतंकियों को सफलतापूर्वक मार गिराया गया. इनमें जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के परिवार के सदस्य भी शामिल थे. मसूद अजहर के पूरे खानदान को मिट्टी में मिला दिया गया.
यह ऑपरेशन इतना जोरदार और तेज था कि पाकिस्तान को सीजफायर की गुहार लगानी पड़ी. एक अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान को एहसास हो गया था कि सीजफायर की मांग करना ही सबसे समझदारी भरा कदम होगा. भारत ने पाकिस्तान के चीन से मिले एयर डिफेंस सिस्टम को सफलतापूर्वक जाम कर दिया था, जिसमें HQ-9B भी शामिल था. इसी समय ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों ने मोर्चा संभाला और पाक के खिलाफ निर्णायक साबित हुईं. ये ब्रह्मोस मिसाइलें बड़े और अहम ठिकानों पर हमला करते हुए दुश्मन की पकड़ से बचने में कामयाब रहीं.
कैसे पाक हुआ बेनकाब
अधिकारी ने बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने न केवल आतंकी ढांचों को तबाह किया, बल्कि भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच की बड़ी खाई को भी उजागर कर दिया. इस्लामाबाद पूरी तरह से बेनकाब हो गया था. आतंकी ढांचों के तबाह होने के बाद अगला अहम कदम पहलगाम के हत्यारों को ढूंढ निकालना था.
लश्कर-ए-तैयबा के इशारे पर काम करने वाले संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने इस हमले की ज़िम्मेदारी दो बार ली थी. लेकिन उसे एहसास हो गया कि भारत की जवाबी कार्रवाई बहुत कड़ी होगी. इसलिए उसने अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने का फैसला किया. फिर भी भारतीय सुरक्षा बलों के लिए इन आतंकियों को ढूंढ निकालना बेहद ज़रूरी था. न केवल पीड़ितों के परिवारों को एक साफ संदेश देने के लिहाज से बल्कि एक बड़े नजरिए से भी.
‘ऑपरेशन महादेव’
इन हत्यारों का पता लगाने के लिए ‘ऑपरेशन महादेव’ शुरू किया गया. इस ऑपरेशन में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि हाल के सालों में यह सबसे बड़े और व्यापक ऑपरेशनों में से एक था. चुनौती बहुत बड़ी थी, क्योंकि ये आतंकी जम्मू-कश्मीर के घने जंगलों में छिप गए थे. सुरक्षा बलों को बेहद मुश्किल हालात और दुर्गम रास्तों-जिनमें घने जंगल और ऊंचे पहाड़ शामिल थे-से जूझते हुए इन आतंकियों का पता लगाना था.
कैसे मारे गए वो तीनों आतंकी?
अधिकारी ने बताया कि उन्होंने ड्रोन का इस्तेमाल किया और रियल-टाइम इंटेलिजेंस (ताज़ा खुफिया जानकारी) पर भरोसा किया. तलाशी का दायरा 300 वर्ग किलोमीटर से घटाकर 25 वर्ग किलोमीटर कर दिया गया. 28 जुलाई को सुरक्षा बलों को कामयाबी मिली. स्पेशल पैरा फोर्स ने एनकाउंटर में तीनों आतंकियों को मार गिराया. विशेषज्ञ पहलगाम की घटना के बाद के घटनाक्रम को ‘मील का पत्थर’ बताते हैं. पाकिस्तान की सेना बेनकाब हो गई और आतंकी ढांचा पूरी तरह से मलबे में तब्दील हो गया. विशेषज्ञों का कहना है कि अब रणनीति बदल चुकी है. सबसे अहम बात यह है कि पाकिस्तान का ‘परमाणु का डर दिखाने वाला पैंतरा’ (nuclear bluff) पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है.

