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अंतरजातीय शादियां समाज में बढ़ती व्यक्तिगत आजादी का बहुत बड़ा प्रतीक हैं. लेकिन अनुसूचित जनजाति में आज भी पुरानी परंपराओं का बहुत कड़ा पहरा है. कोलम (2.6 प्रतिशत) और माली (2.6 प्रतिशत) जातियां इस लिस्ट में सबसे नीचे हैं. गोंड समुदाय में भी अंतरजातीय शादियों का आंकड़ा सिर्फ 2.8 प्रतिशत ही सामने आया है. इन जातियों में अपनी बिरादरी के बाहर शादी करने को लेकर आज भी बहुत पाबंदियां हैं.

अयंगर और अय्यर समाज में सबसे अधिक अंतरजातीय विवाह देखने को मिले. (सांकेतिक तस्वीर)
हैदराबाद. तेलंगाना में कांग्रेस सरकार द्वारा 2024-25 में किए गए जातिगत सर्वेक्षण का विश्लेषण करने वाले एक विशेषज्ञ समूह ने पाया कि अंतरजातीय विवाह वाले परिवारों का सबसे बड़ा हिस्सा अयंगर/अय्यर समुदाय का है, उसके बाद बीसी/एससी ईसाई और राजू समुदाय का स्थान आता है.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी की अध्यक्षता वाले स्वतंत्र विशेषज्ञ कार्य समूह (आईईडब्ल्यूजी) ने कहा कि वेलामा और रेड्डी जैसे प्रभावशाली समूहों में अंतरजातीय विवाह की दर राज्य के औसत से काफी कम है.
सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि रेड्डी और वेलामा समेत बड़ी जमींदारी वाली अगड़ी जातियों में अंतरराजातीय शादियों की कम दरें बताती हैं कि सामाजिक-आर्थिक विशेषाधिकार के बावजूद, इन समूहों में जाति के आधार पर शादी की मज़बूत रूढ़ियां हैं. साथ ही यह इस बात का भी परिचायक है कि अगड़ी जातियों में समाज की सख्ती और खासकर शादी के फैसलों में महिलाओं की सीमित निजी राय होती है.
आईईडब्ल्यूजी ने कहा है कि अंतरजातीय विवाह सामाजिक रूढ़ियों के कमजोर होने का संकेत देते हैं और बढ़ती सामाजिक गतिशीलता का प्रतीक हैं, विशेष रूप से व्यक्तिगत स्वायत्तता के संदर्भ में, जिसमें महिलाएं अपने जीवनसाथी को चुनने में अधिक स्वतंत्रता हो रही हैं.
उसने कहा, ‘‘अंतरजातीय विवाह वाले परिवारों का सबसे बड़ा हिस्सा (12 प्रतिशत) अयंगर/अय्यर समुदाय से आता है, उसके बाद बीसी/एससी ईसाई (9.9 प्रतिशत) और राजू समुदाय (8.7 प्रतिशत) का स्थान आता है.’’
आईईडब्ल्यूजी ने कहा अंतरजातीय विवाहों का एक महत्वपूर्ण कारक शहरी निवास हो सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 90 प्रतिशत से अधिक ब्राह्मण शहरी क्षेत्रों में रहते हैं, जहां विवाह के मामले में जातिगत रूढ़ियां अधिक मायने नहीं रखती हैं.
दूसरी ओर, अनुसूचित जनजाति में शामिल कोलम (2.6 प्रतिशत), माली (2.6 प्रतिशत) और गोंड (2.8 प्रतिशत) जैसी जातियां अंतरजातीय विवाहों में सबसे कम हिस्सेदारी वाली जातियों में शामिल हैं.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

