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आपके पास बोर्डिंग पास होने के बावजूद आपको फ्लाइट में बोर्डिंग देने से इंकार किया जा सकता है. ऐसी स्थिति में पैसेंजर्स के पास क्या विकल्प हैं और क्या वह किसी तरह का मुआवजा पाने के हकदार है. जानने के लिए पढ़ें आगे…

डिनायड बोर्डिंग के केस में आपको एयर फेयर का 400 फीसदी तक मुआवजा मिल सकता है.
Denied Boarding: यदि आपके पास अपनी फ्लाइट का बोर्डिंग पास है और आप निर्धारित समय से पहले एयरपोर्ट पहुंच गए हैं. बावजूद इसके, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आपको अपनी फ्लाइट में बोर्डिंग मिल जाए. जी हां, एयरपोर्ट पर आपके साथ भी ऐसा हो सकता है. बीते दिनों कुछ ऐसा ही बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मेडिकल इंस्टीट्यूट चलाने वाले जेएस सतीश कुमार के साथ हुआ है. करीब आधा करोड़ रुपए की एयर टिकट होने के बावजूद उन्हें फ्लाइट में बोर्डिंग की इजाजत नहीं दी गई.
यह मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. सतीश कुमार ने जब इसका विरोध दर्ज कराना चाहा तो एयरलाइन ने उन्हें ‘रेड-फ्लैग’ लिस्ट में डाल दिया गया. इसके बाद, सतीश या उनका परिवार ने जब भी विदेश यात्रा की, उन्हें संदिग्ध मानकर उनके साथ पूछताछ की गई. अब आप यह सोचिए कि एयरपोर्ट पर आपके साथ भी ऐसा ही कुछ हो जाए, तब अब क्या करेंगे. बतौर पैसेंजर आपके पास क्या कोई ऐसा अधिकार है, जिसका इस्तेमाल ऐसी परिस्थितियों में किया जा सकता है. साथ ही, कई ऐसी बातें हैं, जिनको बतौर पैसेंजर जानना आपके लिए बेहद जरूरी है.
डिनाइड बोर्डिंग की स्थिति में क्या हैं आपके पास अधिकार
- डीजीसीए के क्या हैं नियम: डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन ने अपने सिविल एविएशन रेगुलेशन (CAR) के सेक्शन-3, सीरीज-एम, पार्ट IV में डिनाइड बोर्डिंग की स्थिति में पैसेंजर्स के अधिकारों का साफ जिक्र है. इसमें पैसेंजर्स को एयर फेयर के साथ हर्जाना देने का बात भी कही गई है.
- कब नहीं मिलता है मुआवजा: डीजीसीए के नियमों के अनुसार, यदि कोई पैसेंजर अपनी मर्जी से बोर्डिंग के लिए मना कर देता है तो एयरलाइंस किसी तरह का मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार नहीं होगी. इसके अलावा, एयरलाइंस पैसेंजर की फ्लाइट के टाइम से एक घंटे के भीतर दूसी फ्लाइट में सीट दे देती है, तब भी उसे किसी तरह का कोई मुआवजा नहीं मिलेगा.
- 24 घंटे के अंदर फ्लाइट: यदि एयरलाइंस 24 घंटे के भीतर दूसरी फ्लाइट की व्यवस्था कर देती है तो उसे मूल एयर फेयर का 200 फीसदी मुआवजा मिलेगा. इसके साथ, डिनाइड बोर्डिंग की मार झेलने वाले पैसेंजर को 10 हजार रुपए तका फ्यूल सरचार्ज पाने का भी हक होगा.
- 24 घंटे के बाद फ्लाइट: यदि एयरलाइंस मूल फ्लाइट के शेड्यूल्ड टाइम से 24 घंटे बाद वैकल्पिक फ्लाइट की व्यवस्था करती है तो पैसेंजर 20 हजार रुपए तक के फ्यूल सरचार्ज के साथ मूल एयर फेयर का 400 फीसदी मुआवजा मिलेगा.
- सभी विकल्पों से इंकार: यदि यात्री वैकल्पिक उड़ान का विकल्प नहीं चुनता है, तो उसे टिकट का पूरा पैसा वापस मिलेगा. इसके अलावा, बुक किए गए एक तरफा मूल किराए का 400 फीसदी और 20 हजार रुपए तक का फ्यूल चार्ज मिलेगा.
फरवरी 2026 में कितने पैसेंजर्स को बोर्डिंग देने से किया गया इंकार
| एयरलाइन | यात्रियों की संख्या | सुविधाएं और मुआवजा |
|---|---|---|
| एलायंस एयर | शून्य | शून्य |
| एयर इंडिया ग्रुप | 1104 | वैकल्पिक उड़ानें, होटल, रिफ्रेशमेंट/भोजन, ₹114.87 लाख खर्च |
| अकासा एयर | 51 | वैकल्पिक उड़ान, ₹6.64 लाख खर्च |
| इंडिगो | 76 | वैकल्पिक उड़ान और ट्रैवल वाउचर, ₹5.98 लाख खर्च |
| स्पाइसजेट | 94 | वैकल्पिक उड़ानें, ₹1.64 लाख खर्च |
| फ्लाई91 | 2 | ₹0.01 लाख खर्च |
| इंडियावन एयर | शून्य | शून्य |
| स्टार एयर | शून्य | शून्य |
एयरलाइंस बोर्डिंग देने से क्यों कर देती हैं इंकार?
एयरलाइन कामर्शियल डिपार्टमेंट से जुडे़ वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, एविएशन में फ्लाइट की ऑपरेटिंग कॉस्ट काफी ज्यादा होती है. ऐसे में, कोई भी एयरलाइंस नहीं चाहती कि उसके फ्लाइट की कोई भी सीट खाली जाए. एयरलाइंस को यह भी पता है कि किसी भी फ्लाइट में करीब दस फीसदी पैसेंजर्स ऐसे होते हैं, जो किसी न किसी वजह से अपनी जर्नी कैंसल कर देते हैं. लिहाजा, एयरलाइंस फ्लाइट को ओवर बुक कर कैंसल होने वाली संभावित 10 फीसदी सीटों को पहले ही बेंच देती है. कई बार ऐसा होता है कि कोई भी टिकट कैंसल नहीं होती और सभी पैसेंजर समय पर एयरपोर्ट पहुंच जाते हैं.
ज्यादा पैसेंजर पहुंचने की स्थिति में एयरलाइंस क्या करती है?
ऐसे में एयरलाइंस चाह कर भी सभी पैसेंजर को फ्लाइट में बोर्डिंग नहीं दे सकती है. लिहाजा, एयरलाइंन ‘पहले आओ और पहले पाओ’ की नीति पर काम करते हुए चेक-इन के लिए पहले रिपोर्ट करने वाले पैसेंजर्स को बोर्डिंग पास जारी कर देती हैं. अंत में आने वाले सभी पैसेंजर्स को बोर्डिंग देने से इंकार कर दिया जाता है. एविएशन की भी भाषा में ऐसी स्थिति को ‘डिनाइड बोर्डिंग’ कहा जाता है. हालांकि, मौजूदा समय में यह स्थिति इंटरनेशनल फ्लाइट के पैसेंजर्स को इस स्थिति का अधिक सामना करना पड़ता है.
क्या डोमेस्टिक पैसेंजर्स को डिनाइड बोर्डिंग का सामना नहीं करना पड़ता है?
भारत में वेब चेकइन और ई-बोर्डिंग पास की सुविधा आ जाने के बाद पैसेंजर्स को थोड़ी राहत मिली है. ज्यादातर पैसेंजर्स समय रहते अपना ई-बोर्डिंग कर अपनी सीट रिजर्व कर लेते हैं. लेकिन, कई पैसेंजर्स ऐसे भी होते हैं जो आखिरी समय तक सीट ब्लॉक नहीं करते हैं और वेब चेक-इन भी नहीं कराते हैं. ऐसे में, पैसेंजर्स को एयरपोर्ट पर आकर चेकइन कराने के लिए कहा जाता है. एयरपोर्ट पहुंचने के बाद फ्लाइट में सीट्स बचीं तो ठीक है, नहीं बची तो आपको बोर्डिंग देने से इंकार कर दिया जाता है.
क्या वेब चेक-इन कराने वाले पैसेंजर्स के डिनाइड बोर्डिंग की कोई संभावना नहीं है?
बिल्कुल है. यदि वेब चेक-इन कराने के बाद आपने ई-बोर्डिंग पास भी ले लिया है, जिसमें आपकी सीट का नंबर भी दर्ज है. बावजूद इसके एयरलाइंस आपको बोर्डिंग देने से इंकार कर सकती है. यदि आप समय पर एयरपोर्ट नहीं पहुंचते हैं, फ्लाइट के गेट बंद होने से पहले आप बोर्डिंग गेट पर रिपोर्ट नहीं करते हैं तो आपकी सीट किसी दूसरे पैसेंजर को दी जा सकती है और आपके पास आपकी सीट का नंबर होने के बावजूद आपको फ्लाइट में बोर्डिंग देने से इंकार किया जा सकता है.
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Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें

