भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के बीच एक बार फिर चर्चा में है. चीन ने अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलकर चीनी नाम रख दिए हैं. इस पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है. इसी विवाद के बीच एक दिलचस्प पहल सामने आई, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से चीन के प्रमुख शहरों के ‘इंडियन नाम’ सुझाने को कहा गया और इसके नतीजे काफी रोचक रहे.
दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों के लिए अपने कथित ‘मानक नाम’ जारी किए. बीजिंग इन इलाकों को ‘ज़ांगनान’ यानी दक्षिण तिब्बत बताता है. चीन की तरफ से जारी लिस्ट में 15 पहाड़, 5 रिहायशी इलाके, 4 दर्रे, 2 नदियां और 1 झील शामिल हैं, जिनके लिए चीनी भाषा में नाम दिए गए और उनके साथ अक्षांश-देशांतर (लोकेशन कोऑर्डिनेट्स) भी जारी किए गए.
भारत ने यह भी दोहराया कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और रहेगा. सरकार के मुताबिक, चीन की ये हरकतें ‘बेबुनियाद दावे’ और ‘झूठे नैरेटिव’ गढ़ने की कोशिश हैं, जिनका कोई महत्व नहीं है.
इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच एक दिलचस्प प्रयोग किया गया, जिसमें AI से चीन के प्रमुख शहरों के भारतीय अंदाज वाले नाम सुझाने को कहा गया. इसके नतीजे भी बेहद दिलचस्प रहे…
बीजिंग – बैजनाथ (भारतीय मंदिर के शहरों जैसा एहसास)
शंघाई – शंखाई (भगवान शंकर से प्रेरित नाम)
ग्वांगझोउ – गंगा ज्योति (नदी और प्रकाश का मिश्रण)
शेनझेन – शांतिवन (शांति और प्रकृति का संकेत)
चेंगदू – चंद्रपुर (चांद से जुड़ा भारतीय नाम)
शियान – शिवान (धार्मिक स्पर्श के साथ ध्वनि समानता)
नानजिंग – नंदिग्राम (आनंद और गांव का प्रतीक)
हांगझोउ – हरिधाम (पवित्र स्थान जैसा भाव)
तियानजिन – तेजसनगर (ऊर्जा और चमक का संकेत)
वुहान – विश्वनगर (वैश्विक पहचान को दर्शाता नाम)
हालांकि यह प्रयोग हल्के-फुल्के अंदाज में किया गया, लेकिन इसके पीछे का संदेश गंभीर है. जिस तरह चीन भारत के इलाकों के नाम बदलने की कोशिश करता रहा है, उसी का एक प्रतीकात्मक जवाब इस तरह के प्रयोग में देखा जा सकता है.
गौरतलब है कि चीन इससे पहले भी 2017, 2021, 2023 और 2024 में अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों के नाम बदल चुका है. ये कदम अक्सर तब उठाए जाते हैं जब दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव बढ़ता है. भारत हर बार इन प्रयासों को खारिज करता रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि नाम बदलने जैसे कदम सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं होते, बल्कि इनके जरिए चीन अपने दावों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की कोशिश करता है. वहीं भारत का रुख स्पष्ट है कि ‘नाम बदलने से जमीन नहीं बदलती.’
भारत-चीन संबंध पहले ही 2020 के गलवान संघर्ष के बाद तनावपूर्ण रहे हैं. हालांकि हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए संबंध सामान्य करने की कोशिशें हुई हैं, लेकिन ऐसे घटनाक्रम इन प्रयासों पर असर डालते हैं.

