Last Updated:
Diyarbakır Hijacking: दुनिया की सबसे अजीबोगरीब हाईजैकिंग थी. इस हाईजैकिंग में पायलट की गर्दन पर पिस्टल टिकी थी और वह मुस्कुरा रहा था. कुछ हाईजैकर्स हंसते हुए फोटो सेशन करा रहे थे और कुछ जर्नलिस्ट को इंटरव्यू दे रहे थे. इसके बाद, प्लेन को अफगानिस्तान में उतरना था, लेकिन रिफ्यूलिंग के लिए तुर्की में उतारा गया. फिर जो हुआ, उसने सबको खौफ में भर दिया.

इस खौफनाक हाईजैकिंग में सब हंस रहे थे.
Diyarbakır Hijacking: हाईजैकर्स अपनी पिस्तौल पायलट की गर्दन पर लगाए हुए थे, लेकिन उसके चेहरे पर तनाव की एक भी लकीर नहीं थी. घबराने की बजाय पायलट मुस्कुरा रहा था. कुछ ऐसा ही हाल पिस्तौल ताने खड़े हाईजैकर्स का भी था. मुस्कुराते हुए पायलट को देख वह भी खिलखिला कर हंस रहे थे. दुनिया की शायद यह पहली ऐसी हैरान हाईजैकिंग होगी, जिसमें लोग रोने-बिलखने और घबराने की बजाय पूरे हालात पर अगले कई घंटों तक आनंद लेते रहे. हालांकि, इस हाईजैकिंग का अंत ऐसा नहीं था. स्पेशल ऑपरेशन के रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच एक जर्मन पैसेंजर को अपनी जान गंवानी पड़ी. वहीं, एक एयर होस्टेस सहित दो पैसेंजर गोलीबारी में गभीर रूप से जख्मी हो गए.
दरअसल, यह हाईजैकिंग टर्किश एयरलाइंस की फ्लाइट 293 से जुड़ी हुई है, जिसको 13 अक्टूबर 1980 को इस फ्लाइट ने जर्मनी के म्यूनिख एयरपोर्ट से टेकऑफ हुई थी. दियारबाकिर के नाम से पहचाने जानी वाली इस फ्लाइट को तुर्की के इस्तांबुल एयरपोर्ट से होते हुए अंकारा पहुंचना था. इस फ्लाइट में 149 पैसेंजर्स के साथ करीब 8 क्रू मेंबर मौजूद थे. यह फ्लाइट अपने तय समय पर इस्तांबुल एयरपोर्ट पर लैंड हो गई. इस्तांबुल से इस फ्लाइट में चार पैसेंजर सवार हुए और यह बोइंग 727 प्लेन शाम करीब 6:30 बजे अंकारा के लिए टेकऑफ हो गई. कुछ देर तक तो सबकुछ सामान्य रहा, लेकिन इसके बाद कुछ ऐसा हुआ, जिसने इस म्युनिख से तुर्की तक तहलका मचा दिया.
टेकऑफ से लेकर प्लेन हाईजैक होने तक की पूरी कहानी
- कहां से शुरू हुई हाईजैकिंग की कहानी: रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ मिनटों की क्रूजिंग के बाद प्लेन आसमान में अपनी आखिरी ऊंचाई तक पहुंच गया था. पायलट ने बीट बेल्ट लगाने की साइन को ऑफ कर दिए थे और केबिन क्रू ने पैसेंजर्स को खाना परोसना शुरू कर दिया था.
- हाईजैकर्स ने ली अपनी पोजीशन: इसी बीच, इस्तांबुल से बोर्ड हुए चारों पैसेंजर्स अपनी सीट से खड़े हुए. दो पैसेंजर प्लेन के कॉकपिट में दाखिल हो गए. वहीं, एक पैसेंजर केबिन के सबसे आगे और दूसरा पैसेंजर केबिन के सबसे आखिरी हिस्से में खड़ा हो गया.
- हाईजैकर्स बोले-हम ‘अंकीजी’ हैं: पैसेंजर्स ने पहला खाने का पहला निवाला अपने मुंह में डाला ही था, तभी दोनों पैसेंजर्स ने एक एक साथ पिस्तौल निकाली और लहाराना हुए प्लेन हाईजैकिंग का ऐलान कर दिया. इन चारों हाईजैकर्स ने खुद को ‘अंकिजी’ बताया, जिसका मतलब इस्लामी लड़ाके होता है.
- प्लेन पर इस्लाम का कमांड: हाईजैकर्स ने पैसेंजर्स से कहा कि अब से इस्लाम इस प्लेन का कमांड संभाल रहा है. उन्होंने पैसेंजर्स से कहा- सभी खवातीन अपने सिर ढक लें. जिनके पास सिर ढकने के लिए के लिए कुछ नहीं है, वह अपने सिर सीट कवर से ढक सकती हैं.
- हमारी आपसे कोई दुश्मनी नहीं: हाईजैकर्स ने पैसेंजर्स से कहा कि हमारी आपसे कोई दुश्मनी नहीं है. हम किसी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते हैं. उनका मसकद बस अपनी मांगों को किसी भी सूरत में पूरा कराना है. लिहाजा कोई चालाकी न करे.
पायलट और हाईजैकर्स की हंसती हुई यह फोटो वॉर फोटोग्राफर और जर्नलिस्ट कोश्कुन अरल ने क्लिक की थी.
हाईजैकिंग के ऐलान से पैसेंजर्स के रिहा होने तक की कहानी
- अफगानिस्तान जाना चाहते थे हाईजैकर्स: पूरी फ्लाइट को अपने कब्जे में लेने के बाद हाईजैकर्स ने पायलट को प्लेन ईरान ले जाने का फरमान सुना दिया. उन्होंने पायलट से अपना मकसद बताते हुए कहा कि वह ईरान से आगे अफगानिस्तान जाकर अपने मुजाहिदीन भाइयों से जुड़ना चाहते हैं.
- पायलट चालाकी से तुर्की ले गया प्लेन: पायलट ने हाईजैकर्स से कहा कि ईरान वॉर जोन बन चुका है. प्लेन में इतना फ्यूल भी नहीं है कि वे ईरान तक पहुंच सकें. पायलट ने अपनी चालाकी से हाईजैकर्स को इस बात के लिए मना लिया कि प्लेन को दक्षिण-पूर्वी तुर्की के दियारबाकिर एयरपोर्ट ले जाया जाए.
- पायलट की बात मान गए हाईजैकर्स: एक लंबे संवाद के बाद हाईजैकर्स प्लेन को दियावाकिर एयरपोर्ट ले जाने के लिए राजी हो गए. लोकल एडमिनिस्ट्रेशन से इजाजत मिलने के कुछ मिनटों के बाद प्लेन दियावाकिर एयरपोर्ट पर लैंड हो गया.
- नहीं मिला हाईजैक हुए प्लेन को फ्यूल: प्लेन लैंड होते ही टर्किश मिलिट्री और आर्मर्ड व्हीकल्स ने प्लेन को चारों तरह से घेर लिया था. दियारबाकिर एयरपोर्ट पर हाईजैक हुए प्लेन को फ्यूल तो नहीं मिला, लेकिन हाईजैकर्स और टर्किश अथॉरिटी के बीच बातचीत शुरू हो गई.
- मिली राहत की पहली खबर: हाईजैकर्स ने धमकी दी कि फ्यूल नहीं मिला तो प्लेन को उड़ा देंगे. वहीं, टर्किश मिलिट्री ने शर्त रखी कि पहले महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को पहले छोड़ना होगा. हाईजैकर्स मान गए. उन्होंने 40 महिलाएं, 7 बुजुर्ग और 6 बच्चे को रिहा कर दिया.
महिला, बुजुर्ग और बच्चों को रिहा करने के बाद क्या टर्किश मिलिट्री ने हाईजैकर्स की बात मान ली?
हाईजैकर्स और टर्किश अधिकारियों के बीच पूरी रात बातचीत चलती रही, लेकिन मामला अंजाम तक नहीं पहुंच पाया. अगली सुबह, 14 अक्टूबर को तड़के तुर्की की स्पेशल फोर्सेज ने ऑपरेशन शुरू किया. इस ऑपरेशन में एक हाईजैकर मारा गया और तीन को अरेस्ट कर लिया गया. इस ऑपरेशन में जर्मनी मूल का एक पैसेंजर की भी मौत हो गई. साथ ही, एक क्रू-मेंबर और दो अन्य पैसेंजर सहित कुल 11 लोग भी गंभीर रूप से जख्मी हो गए. बाकी पैसेंजर्स को सुरक्षित प्लेन से बाहर निकाल लिया गया.
एयरपोर्ट पर सख्त सिक्योरिटी होने के बावजूद हाईजैकर्स प्लेन में पिस्टल ले जाने में कैसे सफल हो गए?
रिपोर्ट् के अनुसार, चारों हाईजैकर्स अपने साथ एक धार्मिक पुस्तक लेकर आए थे. उन्होंने इस धार्मिक पुस्तक के पन्नों को अंदर से काटकर पिस्टल रखने की जगह बनाई थी. चूंकि, उस दौर में बहुत मॉर्डन सिक्योरिटी इक्यूपमेंट एयरपोर्ट पर नहीं होते थे और ज्यादातर एयरपोर्ट पर पैड डाउन सर्च ही की जाती थी, लिहाजा वे धार्मिक पुस्तक के अंदर छिपाकर पिस्टल फ्लाइट तक ले जाने में सफल रहे. हालांकि शक तो इस बात का भी जताया गया कि इस काम में तुर्की एयरपोर्ट के किसी स्टाफ ने इन चारों की मदद की थी.
इतना गंभीर मामला होने के बावजूद प्लेन में सभी हंस क्यों रहे थे?
इस फ्लाइट में संयोग से एक वॉर फोटोग्राफर और जर्नलिस्ट कोश्कुन अरल भी मौजूद थे. हाईजैकिंग के बाद उन्होंने एक हाईजैकर से पूछा कि क्या वह अपना इंटरव्यू देंगे. हाईजैकर ने पहले तो इंकार कर दिया, फिर कुछ देर बाद वह वापस आया और अरल को अपने साथ चलने के लिए कहा. हाईजैकर अरल को लेकर कॉकपिट के भीतर लेकर गया. जहां एक हाईजैकर ने पायलट के गर्दन पर पिस्टल लगा रखी थी और पायलट मुस्कुरा रहा था. पायलट को देखकर दोनों हाईजैकर भी हंस रहे थे. यह देखकर अरल ने अपना कैमरा निकाला और यह तस्वीर खींच ली.
आखिर पायलट हंस क्यों रहा था और जर्नलिस्ट के साथ हाईजैकर्स इतने सहज क्यों थे?
दरअसल, हाईजैकर्स ने पिस्टल पायलट के गर्दन पर लगा रखी थी, जिसकी वजह से पायलट को गुदगुदी हो रही थी. इसी गुदगुदी की वजह से वह हंस रहा था. वहीं, जर्नलिस्ट के सहज होने की बात है तो यह सवाल टर्किश मिलिट्री के मन में भी आया. इसी वजह से जर्नलिस्ट को कुछ महीनों तक जेल में भी रहना पड़ा. जांच में जर्नलिस्ट अरल के खिलाफ कुछ नहीं मिला, जिसके चलते उसे रिहा कर दिया गया.
About the Author
Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें

