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Monda Market Secunderabad News: सिकंदराबाद का मोंडा मार्केट अपने 100 साल पूरे करने के बाद भी सुपरमार्केट और ऑनलाइन शॉपिंग के दौर में अपनी साख बचाए हुए है. चौथी पीढ़ी के व्यापारियों और पुराने ग्राहकों के भरोसे के दम पर यह बाजार आज भी गुलजार है. अपनी औपनिवेशिक वास्तुकला के कारण यह एक हेरिटेज हब भी बन गया है. डिजिटल पेमेंट अपनाकर यहाँ के दुकानदार आधुनिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और साबित कर रहे हैं कि जड़ों से जुड़कर भी भविष्य के साथ चला जा सकता है.
Monda Market Secunderabad News: आधुनिक हैदराबाद और सिकंदराबाद की पहचान आज ऊँची कांच की इमारतों, एयर-कंडीशंड सुपरमार्केट और मोबाइल ऐप के जरिए 10 मिनट में घर पहुँचने वाले सामान से होती है. लेकिन इस चमक-धमक के बीच सिकंदराबाद का ऐतिहासिक मोंडा मार्केट (Monda Market) अपनी एक सदी पुरानी साख को मजबूती से थामे खड़ा है. करीब 100 साल पुराने इस बाजार की गलियों में प्रवेश करते ही ऐसा महसूस होता है जैसे समय ठहर गया हो. यहाँ की हवा में आज भी मसालों और ताजी उपजों की वही महक है, जो कभी ब्रिटिश छावनी के दौर में इस क्षेत्र की पहचान हुआ करती थी.
मोंडा मार्केट की सबसे बड़ी ताकत इसकी वे दुकानें हैं, जिन्हें आज परिवारों की चौथी पीढ़ी संचालित कर रही है. किराना व्यापार से जुड़े लक्ष्मीनारायण जैसे व्यापारी गर्व से बताते हैं कि उनके परदादा ने यह काम तब शुरू किया था जब माल बैलगाड़ियों से ढोया जाता था. उनके लिए यह दुकान महज व्यापार का केंद्र नहीं, बल्कि एक पारिवारिक विरासत है. यही कारण है कि बड़े-बड़े रिटेल स्टोर्स और ऑनलाइन डिस्काउंट के बावजूद पुराने ग्राहकों का एक बड़ा वर्ग आज भी मोंडा मार्केट का रुख करता है. यहाँ दुकानदार और ग्राहक के बीच केवल लेन-देन का नहीं, बल्कि पीढ़ियों पुराना पहचान और भरोसे का रिश्ता है.
किफायती दाम और ताजी उपज का केंद्र
मोंडा मार्केट के टिके रहने का एक प्रमुख कारण यहाँ मिलने वाली होलसेल कीमतें और ताजी सब्जियां हैं. जहाँ सुपरमार्केट में दाम फिक्स होते हैं, वहीं मोंडा मार्केट में आज भी मोल-भाव (Bargaining) की संस्कृति जीवित है. यहाँ की सब्जियां सीधे किसानों से आती हैं, जो गुणवत्ता में किसी भी आधुनिक स्टोर से बेहतर और जेब के लिए सस्ती मानी जाती हैं. इसी ‘पर्सनल टच’ और किफायती दरों की वजह से आधुनिक पीढ़ी के लोग भी यहाँ खरीदारी के लिए खिंचे चले आते हैं.
हेरिटेज हब के रूप में नई पहचान
पिछले कुछ वर्षों में मोंडा मार्केट केवल एक बाजार ही नहीं, बल्कि इतिहास प्रेमियों और फोटोग्राफर्स के लिए एक ‘हेरिटेज हब’ के रूप में उभरा है. 1930 के दशक में बनी इसकी मुख्य इमारत और क्लॉक टॉवर औपनिवेशिक वास्तुकला का शानदार उदाहरण हैं. अब यहाँ नियमित रूप से ‘हेरिटेज वॉक’ का आयोजन किया जाता है, जिसमें विदेशी पर्यटक और युवा पीढ़ी इस ऐतिहासिक स्थल की वास्तुकला को देखने आते हैं.
चुनौतियां और डिजिटल बदलाव
हालाँकि आधुनिकता के इस दौर में संघर्ष कम नहीं है. पार्किंग की समस्या, संकरी गलियां और बुनियादी सुविधाओं की कमी यहाँ के व्यापारियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. लेकिन समय के साथ कदम मिलाते हुए अब यहाँ के पुराने दुकानदारों ने भी डिजिटल पेमेंट और फोन पर ऑर्डर लेना शुरू कर दिया है. मोंडा मार्केट की ये पुरानी दीवारें इस बात की गवाह हैं कि तकनीक चाहे कितनी भी बदल जाए, भरोसे और विरासत का स्वाद कभी पुराना नहीं होता.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें

