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Hyderabad Evening Incense Tradition : हैदराबाद के पुराने शहर में एक अनोखी परंपरा आज भी जिंदा है, जहां मगरिब की अज़ान के वक्त घरों के दरवाजे खोलकर लोबान जलाया जाता है. लोग इसे बरकत और सुकून से जोड़ते हैं. हालांकि इसका धार्मिक आधार नहीं, लेकिन यह गंगा-जमुनी तहजीब और सांस्कृतिक विरासत की खास पहचान बन चुकी है.
हैदराबाद : आधुनिकता की चकाचौंध और गगनचुंबी इमारतों के बीच हैदराबाद की पुरानी गलियों और ऐतिहासिक हवेलियों में एक सदियों पुरानी रिवायत आज भी सांस ले रही है. यह रस्म है शाम यानी मगरिब की अज़ान के वक्त घर के दरवाजे खोलना और लोबान की खुशबू से आंगन को महकाना. स्थानीय लोग इसे केवल एक रिवाज नहीं बल्कि घर में बरकत और सुकून लाने का जरिया मानते हैं.
जैसे ही मगरिब की अज़ान की गूंज सुनाई देती है पुराने शहर के घरों में एक खामोशी छा जाती है. शोर-शराबा थम जाता है और घर की महिलाएं या बड़े-बुजुर्ग फुर्ती से खिड़कियां और मुख्य द्वार खोल देते हैं. इसके साथ ही मिट्टी के धुएं दान में दहकते कोयलों पर लोबान डाला जाता है या अगरबत्ती जलाया जाता है जिससे निकलता सफेद धुआं पूरे घर को एक रूहानी खुशबू से भर देता है.
शाम की खुशबू और बरकत की परंपरा
हाफ़िज़ शाहआलम बताते हैं कि यह मान्यता है कि यह समय दिन और रात के मिलन का होता है जब आसमानी वरदान यानी बरकत धरती पर उतरती है. खुले दरवाजे इसी बरकत के स्वागत का प्रतीक हैं इसका धार्मिक प्रमाण नहीं है यह सिर्फ एक कहानी और कल्चर के तौर पर है आगे उन्होंने बताया कि शाम के समय हैदराबाद ही नहीं बल्कि पूरे भारत में अगरबत्ती या रोशनी और खुशबु घरों में लोग करते हैं यह एक पॉजिटिव चीज है क्युकी खुशबु अच्छी मानी जाती है इससे दिल और दिमाग को सुकून मिलता है और वहां नकारात्मक शक्तियां नहीं ठहरतीं हैं.
दरवाजे, दीया और तहजीब की कहानी
यह रस्म हैदराबाद की उस गंगा-जमुनी तहजीब का भी हिस्सा है जहां मजहब की दीवारें धुंधली पड़ जाती हैं. जिस तरह मुस्लिम घरों में लोबान जलता है ठीक उसी वक्त हिंदू परिवारों में भी संध्या काल के दौरान मुख्य द्वार खोलकर दीया जलाया जाता है और अगरबत्ती की जाती है. दोनों ही संस्कृतियों में शाम के इस वक्त को पवित्र और समृद्धि लाने वाला माना गया है लेकिन इसका इस्लाम में कोई अहम मह्त्व नहीं है यह महज़ खुशबु के लिए है और रही बात दरवाजा खोलने की तो हाफ़िज़ साहब ने बताया कि इस्लाम में कहा गया कि शाम में मगरिब के समय अपने दरवाजे बंद कर लें क्योंकि उस समय शैतान और जिन्न भागते रहते हैं. इस परंपरा के पीछे व्यावहारिक कारण भी छिपे हैं कुछ लोग मानते हैं कि शाम के वक्त लोबान जलाने से घर के अंदर मौजूद सूक्ष्म कीटाणु और मच्छर खत्म हो जाते हैं. वहीं खिड़कियां खोलने से दिन भर की गर्म हवा बाहर निकलती है और ताजी हवा का संचार होता है.
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