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सीतामढ़ी जिले के किसान मनोज कुमार वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खेती करते है. वह करीब 20 बीघे की विशाल भूमि पर खेती करते है. मनोज आज धान, गेहूं और मक्का जैसी मुख्य फसलों के साथ-साथ दलहन, तिलहन और नकदी सब्जियों की सफल बागवानी कर रहे हैं. वह सालाना 10 लाख रुपये कमा रहे हैं
बिहार के किसानों ने अपनी मेहनत और नवाचार से खेती को लाभ का सौदा बनाना शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में सीतामढ़ी जिले के प्रगतिशील किसान मनोज कुमार एक प्रेरणा बनकर उभरे हैं, मनोज कुमार न केवल अपनी पुश्तैनी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, बल्कि पारंपरिक फसलों के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर खेती से शानदार मुनाफा भी कमा रहे हैं. करीब 20 बीघे की विशाल भूमि पर खेती करने वाले मनोज आज धान, गेहूं और मक्का जैसी मुख्य फसलों के साथ-साथ दलहन, तिलहन और नकदी सब्जियों की सफल बागवानी कर रहे हैं. उनके खेत आज आधुनिक कृषि के जीवंत उदाहरण बन चुके हैं, जहाँ परंपरा और विज्ञान का अनूठा संगम देखने को मिलता है.
विविधतापूर्ण खेती और वैज्ञानिक प्रबंधनमनोज कुमार की सफलता का सबसे बड़ा राज खेती में विविधता और वैज्ञानिक विधि का पालन करना है. वे केवल एक या दो फसलों पर निर्भर न रहकर संतुलित खेती करते हैं. उनके 20 बीघे के रकबे में जहाँ एक तरफ मुख्य अनाज के रूप में धान, गेहूं और मक्का की लहलहाती फसलें दिखती हैं, वहीं दूसरी तरफ वे तीसी, मसूर और खेसारी जैसी दलहन-तिलहन फसलों का भी उत्पादन करते हैं. सब्जियों की श्रेणी में वे आलू, प्याज, लहसुन के साथ-साथ झींगा और झुकिनी जैसी आधुनिक सब्जियों की भी खेती कर रहे हैं. वैज्ञानिक तरीके से बुवाई, उचित खाद प्रबंधन और समय पर सिंचाई के कारण उनकी पैदावार अन्य सामान्य किसानों की तुलना में काफी बेहतर होती है.
वैज्ञानिक विधि से कर रहे है धान और मक्का की खेती
पुश्तैनी अनुभव और आधुनिक तकनीक का मेलखेती मनोज कुमार के लिए केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है. वे बताते हैं कि वे बचपन से ही खेतों में हाथ बंटा रहे हैं और उनके पूर्वजों का भी यही मुख्य पेशा रहा है. हालांकि, पहले की तुलना में आज की खेती में उन्होंने काफी बदलाव किए हैं. पहले जहाँ खेती केवल पेट भरने का साधन थी, वहीं अब मनोज इसे एक लाभदायक उद्यम के रूप में देखते हैं. वे कहते हैं कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार के सीमित अवसरों के बीच उनका पूरा परिवार पूरी लगन से किसानी में ही लगा रहता है. तकनीक और अनुभव के इसी मेल ने उन्हें कम लागत में अधिक उत्पादन लेने में सक्षम बनाया है.
सालाना 10 लाख की कमाई
सालाना 10 लाख तक की कमाई और आर्थिक समृद्धिमनोज कुमार ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही विधि अपनाई जाए, तो खेती से भी सरकारी नौकरियों जैसी आय प्राप्त की जा सकती है. वर्तमान में वे अपनी फसलों और सब्जियों की बिक्री से सालाना 7 से 10 लाख रुपये तक की शानदार कमाई कर रहे हैं. खेती में बढ़ता मुनाफा न केवल उनके परिवार को आर्थिक मजबूती दे रहा है, बल्कि क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए भी एक मिसाल पेश कर रहा है. उनकी सफलता यह संदेश देती है कि अगर किसान वैज्ञानिक जानकारी के साथ मेहनत करें, तो मिट्टी से सोना उगाना मुमकिन है.

