Agency:एजेंसियां
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CJI Suryakant News: सुप्रीम कोर्ट में आज मुकदमों के फैसले में देरी पर सुनवाई हुई. मामले में दलीलें सुनने के बाद आखिरकार सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा. एमिकस के सुझाव हाईकोर्ट को भेजे गए. सुप्रीम कोर्ट जल्द ही आदेश जारी करेगा.

सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत ने मुकदमों के फैसले में देरी को लेकर दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा.
CJI Suryakant News: सुप्रीम कोर्ट में आज यानी सोमवार को मुकदमों के फैसले में देरी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई. निचली अदालतों और हाईकोर्ट की ओर से मुकदमों की सुनवाई के बाद निर्णयों में देरी को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने यह फैसला सुरक्षित रखा. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने सोमवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा यह किसी खास जज के बारे में नहीं है, बल्कि मामला संस्था में सुधारों के बारे में है. सीजेआई यानी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने कहा कि जिस जज के मामले की वजह से यह मामला है, वह भी फौजदारी कानून के एक बेहतरीन जज हैं.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने माना कि कभी-कभी ज्यादा केस निपटाने की जल्दबाजी में कुछ दिक्कतें आ जाती हैं. आखिरकार, आपके पास दिन के सिर्फ 24 घंटे ही होते हैं. उन्हें खुद ही यह तरीका निकालना होगा कि समय का प्रबंधन कैसे किया जाए? सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि मामले में एमिकस ने न्यायपालिका में सुधार करने और जवाबदेही बढ़ाने के लिए बेहतरीन सुझाव दिए हैं. एमिकस की सिफारिशों की सॉफ्ट कॉपी सभी हाईकोर्ट को भेज दी जाए और वे 10 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशें भी कोर्ट को भेज सकते हैं.
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे को तब उठाया, जब एक याचिका में आरोप लगाया गया कि कोर्ट में फैसला तो मौखिक रूप से सुना दिया गया, लेकिन लिखित आदेश की कॉपी और फैसले कई हफ्तों तक उपलब्ध नहीं हो पाते। यही नहीं, कुछ मामलों में तो फैसले की कॉपी मिलने में कई महीनों की भी देरी होती है. फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है. आगे कोर्ट फैसला सुनाने और फैसलों को अपलोड करने में देरी के मुद्दे पर अपना आदेश जारी करेगा.
लीगल एजुकेशन कमीशन बनाने की मांग
वहीं, एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट लीगल एजुकेशन कमीशन बनाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर मई में सुनवाई का भरोसा दिया है. कोर्ट ने कहा कि यह जनहित याचिका अच्छी है और इस पर गौर किया जा सकता है. एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया है कि एक ऐसा आयोग बनाया जाना चाहिए जिसमें कानून के जाने-माने जानकार शामिल हों और वे नए सिलेबस और पाठ्यक्रम तैयार करें, ताकि कानूनी शिक्षा को आधुनिक और सभी के लिए सुलभ बनाया जा सके.
याचिका में यह भी बताया गया है कि अब भी भारत में अधिकांश लॉ कोर्स पांच साल के इंटीग्रेटेड बीए-एलएलबी या बीबीए-एलएलबी प्रोग्राम के रूप में चल रहे हैं. एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि जबकि अधिकांश कोर्स चार साल के होते हैं, पांच साल का यह कोर्स छात्रों के लिए समय और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ा देता है। खासकर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के छात्र इस लंबी अवधि और खर्च को लेकर परेशान हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि इसी वजह से यह कोर्स सबसे बेहतरीन टैलेंट को अपनी ओर खींचने में नाकाम रह रहा है.
सीजेआई सूर्यकांत ने इस मामले पर कहा कि कानूनी शिक्षा एक अलग मुद्दा है और कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता भी एक अलग बात है. उन्होंने माना कि यह जनहित याचिका अच्छी है और इस पर गौर किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सबसे बेहतरीन टैलेंट पहले भी आ रहा है. याचिका में यह भी बताया गया है कि पांच साल का कोर्स अब पुराना और वित्तीय रूप से बोझिल हो गया है.नेशनल एजुकेशन पॉलिसी चार साल के अंडरग्रेजुएट पाठ्यक्रम को बढ़ावा देती है, लेकिन कानूनी शिक्षा अभी पुराने इंटीग्रेटेड कार्यक्रमों पर टिकी हुई है। याचिका का तर्क है कि अगर कानूनी शिक्षा को चार साल के कोर्स में बदला जाए तो इससे छात्रों का समय और पैसा दोनों बचेगा और टैलेंट को आकर्षित करना भी आसान होगा.
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