दुनिया के चर्चित हेनली पार्सपोर्ट इंडेक्स का नया एडिशन सामने आ गया है और इसमें भारत की स्थिति एक दिलचस्प तस्वीर पेश करती है. एक तरफ भारत की वैश्विक रैंकिंग में साफ सुधार हुआ है, तो दूसरी ओर भारतीय पासपोर्ट से बिना वीजा यात्रा करने वाले देशों की संख्या पहले से कुछ कम हो गई है.
अब कितने देशों में वीजा फ्री एंट्री?
वर्ष 2025 में भारतीय नागरिक 57 देशों में बिना पहले से वीजा लिए यात्रा कर सकते थे. हालांकि जनवरी 2026 में यह संख्या घटकर 55 रह गई थी, जबकि फरवरी में इसमें हल्का सुधार हुआ और यह बढ़कर 56 हो गई. फिर भी यह आंकड़ा 2025 के स्तर से नीचे ही है.
ईरान ने क्यों खत्म की वीजा फ्री एंट्री?
इस बदलाव की बड़ी वजह दो देशों की नीतियों में बदलाव है. ईरान ने नवंबर 2025 में भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा-फ्री एंट्री की सुविधा खत्म कर दी थी. भारत सरकार के अनुसार, ईरान में भारतीय नागरिकों को फर्जी नौकरी के बहाने बुलाकर अपहरण और फिरौती जैसी घटनाएं सामने आई थीं. इन्हीं कारणों से ईरान ने भारतीयों के लिए वीजा छूट को निलंबित कर दिया, जिससे वह हेनली इंडेक्स की वीजा-फ्री सूची से बाहर हो गया.
बोलीविया ने भी खत्म की वीजा फ्री एंट्री
जनवरी 2026 में जब ईरान और बोलीविया दोनों बाहर हुए, तब कुल संख्या 55 पर आ गई थी. फरवरी में गाम्बिया के जुड़ने से यह बढ़कर 56 हुई, लेकिन फिर भी 2025 के मुकाबले कम ही रही.
फिर भारत की पासपोर्ट रैंकिंग में कैसे हुआ सुधार?
इसके बावजूद भारत की रैंकिंग में सुधार इसलिए हुआ क्योंकि हेनली एंड पार्टनर्स द्वारा तैयार यह इंडेक्स देशों को आपस में तुलना करके रैंक देता है. इसमें सिर्फ यह नहीं देखा जाता कि किसी पासपोर्ट से कितने देशों में वीजा-फ्री एंट्री मिलती है, बल्कि यह भी देखा जाता है कि बाकी देशों की स्थिति कैसी है. बीते एक साल में कई देशों के पासपोर्ट की वीजा-फ्री पहुंच में भारत से ज्यादा गिरावट आई, जिससे तुलना के आधार पर भारत की स्थिति ऊपर चली गई.
हेनली पासपोर्ट इंडेक्स इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के डेटा के आधार पर 199 देशों के पासपोर्ट को 227 गंतव्यों के संदर्भ में आंकता है. जहां बिना वीजा, वीजा ऑन अराइवल या सीमित इलेक्ट्रॉनिक अनुमति मिलती है, वहां अंक दिए जाते हैं. इन्हीं अंकों के कुल योग के आधार पर रैंक तय होती है.
कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि भारतीय पासपोर्ट की ताकत में रैंकिंग के लिहाज से सुधार दिखता है, लेकिन वीजा-फ्री यात्रा की वास्तविक पहुंच अभी भी पहले से थोड़ी कम है. वैश्विक स्तर पर बदलती वीजा नीतियों के बीच भारत की स्थिति बेहतर जरूर हुई है, लेकिन पूरी तरह मजबूत होने की राह अभी बाकी है.

