‘कोई ताकत नहीं रोक सकती’, ₹55 करोड़ में ‘बाबरी मस्जिद’ बनवाने लगे हुमायूं कबीर
Agency:एजेंसियां
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Babri Masjid Murshidabad: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर नई मस्जिद का निर्माण शुरू हो गया है. निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर ने बेलडांगा में ईंट रखकर इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया. 55 करोड़ की लागत से बनने वाली यह मस्जिद दो साल में तैयार होगी. कबीर ने इसे अपनी धार्मिक आस्था बताया है, जबकि बीजेपी ने इसे वोट बैंक की राजनीति करार दिया है.
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बुधवार को एक ऐसी मस्जिद का निर्माण कार्य शुरू हुआ, जो अयोध्या की बाबरी मस्जिद की हुबहू नकल होगी. यह मस्जिद बेलडांगा के रेजिनगर में बन रही है.
इस मस्जिद की ईंट रखने का समारोह जनता उन्नयन पार्टी (JUP) के प्रमुख और निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर की मौजूदगी में हुआ. इस मौके पर भारी भीड़ जमा थी और कई समर्थक अपने सिर पर ईंटें ढोकर निर्माण स्थल तक पहुंचे.
हुमायूं कबीर ने साफ किया है कि इस मस्जिद का निर्माण उनकी धार्मिक आस्था का हिस्सा है. उन्होंने घोषणा की कि यह मस्जिद 50 से 55 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार होगी. कबीर के मुताबिक, मस्जिद के भव्य द्वार की ऊंचाई ही 14 मीटर होगी, जिस पर करीब 5 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
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हुमायूं कबीर ने दावा किया कि अल्लाह की कृपा से अगले दो साल के भीतर यह काम पूरा हो जाएगा. कबीर ने यह भी कहा कि लोग अपना धर्म मानने के लिए आजाद हैं और वह इस्लाम के नाम पर किसी का विरोध नहीं करेंगे.
इस निर्माण कार्य को लेकर बंगाल में राजनीतिक पारा चढ़ गया है. बीजेपी नेता दिलीप घोष ने इसे सीधे तौर पर ‘मुस्लिम वोट बैंक’ को मजबूत करने की कोशिश बताया है. उन्होंने कहा कि जिस तरह ममता बनर्जी चुनाव देख मंदिर बनवा रही हैं, उसी तरह हुमायूं कबीर सांप्रदायिक आधार पर वोटों को एकजुट करने के लिए मस्जिद का सहारा ले रहे हैं. वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी इस पर कड़ा बयान आया है. उन्होंने दो टूक कहा कि बाबरी मस्जिद का पुनर्निर्माण कयामत के दिन तक कभी नहीं होगा.
हुमायूं कबीर ने इस मस्जिद की नींव पिछले साल 6 दिसंबर को रखी थी, जो बाबरी विध्वंस की बरसी थी. अब उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी जेयूपी के जरिए टीएमसी और बीजेपी दोनों को चुनौती देने का ऐलान किया है. हालांकि बोर्ड परीक्षाओं के कारण उन्होंने अपनी 235 किलोमीटर लंबी ‘बाबरी यात्रा’ को फिलहाल स्थगित कर दिया है, लेकिन वह पदयात्राओं के जरिए लोगों को इस प्रोजेक्ट से जोड़ना जारी रखेंगे. मस्जिद के लिए चंदा जुटाने का काम भी जोरों पर है और शुरुआती दिनों में ही लाखों रुपये जमा हो चुके हैं.
मुर्शिदाबाद एक अल्पसंख्यक बहुल जिला है, जहां इस तरह के धार्मिक निर्माण का गहरा राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है. हुमायूं कबीर ने एआईएमआईएम (AIMIM) के साथ गठबंधन की चर्चा भी की है. विश्लेषकों का मानना है कि बाबरी मस्जिद के मॉडल पर बनी यह मस्जिद मुस्लिम मतदाताओं के बीच कबीर की स्थिति मजबूत कर सकती है. हालांकि, बीजेपी इसे विकास के मुद्दों से ध्यान भटकाने वाली राजनीति बता रही है. अब देखना यह है कि यह धार्मिक प्रोजेक्ट आने वाले विधानसभा चुनावों में वोटों के ध्रुवीकरण में कितनी बड़ी भूमिका निभाता है.

