केंद्र सरकार ने मृत व्यक्तियों के 2.5 करोड़ से अधिक आधार नंबरों को डीएक्टिवेट किया है ताकि पहचान की चोरी और सरकारी योजनाओं के फर्जी लाभ को रोका जा सके. इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 3 फरवरी को लोकसभा में ये जानकारी दी. क्या आपको मालूम है कि कब आपका आधार डिएक्टिवेट हो सकता है. घर बैठे आप आधार में क्या क्या अपडेट कर सकते हैं. अगर आपके पास आधार नहीं है तो क्या होगा
आधार योजना की आधिकारिक शुरुआत 28 जनवरी 2010 को हुई, जब पहला आधार नंबर जारी किया गया. इसे UIDAI जारी करती है यानि यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया है, जिसे हिंदी में ‘भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण’ कहा जाता है. यह भारत सरकार की एक संस्था है, जो आधार कार्ड जारी करने, उसके मैनेजमेंट और आधार डेटाबेस की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है. यह संस्था इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है.
इसका मुख्य काम काम सभी भारतीयों को ‘आधार’ नामक विशिष्ट पहचान संख्या जारी करना है. भारत की जनसंख्या करीब 145 करोड़ है. आंकड़ें बताते हैं कि 138.67 करोड़ लोगों के पास सक्रिय आधार कार्ड हैं. हालांकि अब भी करीब 6.33 करोड़ लोगों के पास अब भी आधार नहीं है या निष्क्रिय हैं.
क्या आपका आधार कार्ड अपने आप कैंसिल हो सकता है या उसको डिएक्टिवेट किया जा सकता है
– आधार कार्ड अपने-आप कैंसिल नहीं होते लेकिन कुछ खास वजहों से उसे डिएक्टिवेट या इनऐक्टिव किया जा सकता है. इसकी ये वजहें हो सकती हैं.
– डुप्लीकेट आधार- अगर किसी व्यक्ति के नाम पर गलती से दो आधार नंबर बन गए हों तो UIDAI जांच के बाद एक को डिएक्टिवेट कर देता है.
– मृत्यु के बाद – किसी व्यक्ति की मृत्यु की सूचना जब परिवार या सरकारी रिकॉर्ड से यूआईडीएआई तक पहुंचती है तो उस व्यक्ति का आधार निष्क्रिय कर दिया जाता है. आजकल जब नगरपालिका डेथ सर्टीफिकेट जारी करती है तो उसकी सूचना खुद यूआईडीएआई के पास पहुंच जाती है.
– बायोमेट्रिक में गड़बड़ी – अंगुलियों के निशान या आंखों की स्कैनिंग बार-बार मैच न हो रही हो.
-फर्जी दस्तावेज या गलत जानकारी – अगर एनरोलमेंट के समय गलत पता, जन्मतिथि, नाम या फर्जी दस्तावेज पाए जाते हैं तो UIDAI आधार को कैंसिल या डिएक्टिवेट कर सकता है.
– कानूनी या जांच एजेंसियों के निर्देश पर – कोर्ट, जांच एजेंसी या सरकारी आदेश के तहत किसी खास केस में आधार को अस्थायी रूप से निष्क्रिय किया जा सकता है.
क्या लंबे समय से अगर आधार का उपयोग नहीं हो रहा तो भी ये डिएक्टिवेट हो जाएगा
– हां, ऐसा हो सकता है. बहुत लंबे समय तक आधार का किसी भी तरह से उपयोग न होना इसकी वजह बन सकता है. खासकर नाबालिगों या पुराने रिकॉर्ड में ऐसा हो तो आधार को डॉरमेंट किया जा सकता है, हालांकि ये बहुत दुर्लभ है.
कैसे पता करें आधार एक्टिव है या नहीं
– UIDAI की वेबसाइट पर जाकर Aadhaar Status / Authentication History चेक करके इसका पता चल जाता है.
किसी मृतक के आधार को डीएक्टिवेट घर बैठे कैसे कर सकते हैं
– परिवार के लोग अपने मृतक परिजन के आधार को आनलाइन डिएक्टिविटी कर सकते हैं. ऐसा MyAadhaar पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है.
MyAadhaar पोर्टल (https://myaadhaar.uidai.gov.in) पर जाएं और अपना आधार नंबर व OTP से लॉगिन करें. फैमिली मेंबर का ऩिधन (Report Death of a Family Member) विकल्प चुनें. मृतक के आधार नंबर, नाम, मृत्यु तिथि, मृत्यु पंजीकरण संख्या और रिश्ते की जानकारी भरें. मृत्यु प्रमाण पत्र अपलोड करें और सेल्फ-डेक्लेरेशन सबमिट करें. UIDAI सत्यापन के बाद 90 दिनों में आधार डीएक्टिवेट कर देता है.
क्या ये काम आफलाइन भी हो सकता है यानि आधार सेवा केंद्र के आफिस में जाकर
– हां, अपने नजदीकी आधार सेवा केंद्र पर जाएं. वहां मृत्यु प्रमाण पत्र, मृतक का आधार और रिश्ते का प्रमाण जमा करें. राज्य पोर्टल या नगर निगम कार्यालय से भी रिपोर्ट करें.
क्या आधार अपने डेटाबेस और आधार धारकों की नियमित सफाई का काम करता रहता है
– हां, ये स्वचालित सफाई होती है. इसे डेटाबेस सैनिटाइजेशन कहा जाता है. इसी के तहत यूआईडीएआई के तहत 2.5 करोड़ आधार को नंवबर 2025 तक डिएक्टिवेट कर दिया गया. ये काम लगातार चलता रहता है. जुलाई 2025 तक 1.17 करोड़ डीएक्टिवेशन हुए. मध्य नवंबर 2025 तक 2 करोड़ और फरवरी 2026 तक 2.5 करोड़ से ज्यादा. ये काम इसलिए भी चलता रहता है ताकि धोखाधड़ी रोकी जा सके और डेटा शुद्धता बनी रहे.
ये कैसे पता चलता है कि लंबे समय से आधार का इस्तेमाल नहीं हुआ और इस वजह से इसको डिएक्टिवेट कर दिया जाए
– UIDAI इसे अपने सिस्टम में इंटरनल फ्लैग के तौर पर देखता है और पता लगाता है. UIDAI के हिसाब से आधार का इस्तेमाल तब माना जाता है जब बैंक में e-KYC/ बायोमेट्रिक / OTP ऑथेंटिकेशन किया जाए. राशन, पेंशन, सब्सिडी में आधार ऑथेंटिकेशन हो. सिम लेते समय e-KYC किया जाए.
PF, गैस, DBT जैसी सरकारी सेवाओं में वेरिफिकेशन हो. अगर इनमें से कुछ भी होता है तो UIDAI पोर्टल पर ऑथेंटिकेशन ट्रांजैक्शन का संकेत भी मिलता रहता है. इसे आधार एक्टिव यूजेज माना जाता है.
क्या आप भी चेक कर सकते हैं कि आपका आधार सक्रिय है या नहीं
– बिल्कुल कर सकते हैं. UIDAI की वेबसाइट पर पिछले 6 महीने तक का रिकॉर्ड दिखता है – किस तारीख को, किस टाइप का ऑथेंटिकेशन हुआ. अगर 6 महीने में एक भी एंट्री नहीं दिखती तो इसका मतलब हाल के समय में आधार का कोई इस्तेमाल नहीं हुआ. अगर ये लंबे समय तक ऐसा ही दिखता है तो आधार डिएक्टिवेशन का खतरा बढ़ जाता है.
“लंबे समय तक इस्तेमाल न होना” किसे कहते हैं
– UIDAI ने कोई पब्लिक टाइम लिमिट तय नहीं की है, जैसे 2 साल, 5 साल आदि. आमतौर पर यह स्थिति बहुत पुराने आधार के साथ आती है. बच्चों के आधार के साथ ज्यादा होता है, जिनका कभी अपडेट नहीं हुआ. जिनका न बैंक, न DBT, न सिम – कहीं कोई आधार लिंक नहीं मिलता. हालांकि केवल इस्तेमाल न होने से आधार अपने-आप बंद नहीं होता. अगर आप जब केवाईसी कराते हैं या ऊपर बताई चीजों में कोई व्यवहार करते हैं और अथेंटिकेशन फेल या आधार निष्क्रिय दिखने लगे. ओटीपी नहीं आए. जब बैंक या सेंटर कहे कि UIDAI से Inactive दिख रहा है.
ऐसा होने पर क्या करें
– UIDAI पोर्टल पर OTP से आधार वेरिफिकेशन करें. किसी बैंक में KYC अपडेट कर लें. मोबाइल नंबर अपडेट कर लें. बस इतना करने से आधार फिर Active usage में आ जाता है.
क्या आधार का समय समय पर नवीनीकरण भी होता है
– नहीं. आधार कार्ड का कोई “नवीनीकरण” सिस्टम नहीं है. आधार लाइफटाइम वैध होता है. लेकिन बच्चों के आधार को समय समय पर अपडेट करना होता है.
– 5 से 7 साल की उम्र में
– 15 से 17 साल की उम्र में
इनमें बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट + आईरिस), नई फोटो अपडेट नहीं कराने पर आधार निष्क्रिय और अथेंटिकेशन फेल दिख सकता है. वैसे UIDAI सलाह देता है कि 10 साल में एक बार बायोमेट्रिक अपडेट करा लें.
क्या आधार की कोई एक्सपायरी डेट होती है
– बिल्कुल नहीं. आधार नंबर कभी एक्सपायर नहीं होता. कोई नवीनीकरण फीस नहीं होती. कोई वैलिडिटी पीरियड नहीं होता.
अगर आधार में पिता का नाम, जन्मतिथि या पते में अपडेट करना हो या सुधार करना हो तो आनलाइन कर सकते हैं
– हां, आधार में कुछ जानकारियां ऑनलाइन अपडेट हो सकती हैं, कुछ नहीं. पिता, पति, अभिभावक का नाम ऑनलाइन अपडेट हो सकता है. इसके सपोर्ट मेंं UIDAI Self Service Update Portal पर डॉक्यूमेंट अपलोड करना पड़ता है. राशन कार्ड, पासपोर्ट, मार्कशीट, जन्म प्रमाणपत्र आदि. सिर्फ नाम में सुधार, बदलाव या पिता या पति के पूरे रिलेशन में बदलाव करना हो तको कुछ मामलों में सेंटर पर जाना होता है.
क्या नए पते को ऑनलाइन अपडेट कर सकते हैं
– हां, पूरी तरह इसे ऑनलाइन कर सकते हैं. डॉक्यूमेंट के साथ.
क्या जन्मतिथि को ऑनलाइन बदल सकते हैं
– सीमित रूप से ऑनलाइन लेकिन ये सिर्फ छोटी गलती या टाइपो हो तो तो ऑनलाइन हो सकता है. लेकिन पूरा डेट ऑफ बर्थ बदलना हो तो आधार सेंटर पर जाना पड़ेगा.
ऑनलाइन क्या नहीं हो सकता
– बायोमेट्रिक अपडेट यानि फिंगरप्रिंट, आईरिस, फोटो. ये सारे काम केवल आधार केंद्र पर होते हैं. कई बार मोबाइल नंबर और ईमेल अपडेट के लिए भी तब सेंटर जाना होता है जबकि OTP नहीं आ रहा हो.

