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India Iran Chabahar Project: शशि थरूर ने केंद्र सरकार के बजट 2026 में चाबहार पोर्ट फंड शून्य करने और केरल की अनदेखी पर नाराजगी जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी देशों के दबाव के कारण ईरान के चाबहार प्रोजेक्ट के लिए भारत ने एक भी रुपया ईरान को नहीं दिया. कांग्रेस सांसद ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल खड़े किए.
शशि थरूर ने बजट में केरल के साथ ‘सौतेला व्यवहार’ करने का आरोप लगाया. (फाइल फोटो)नई दिल्ली. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्रीय बजट 2026 को लेकर मोदी सरकार की विदेश नीति और रणनीतिक प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं. थरूर ने रविवार को कहा कि ईरान के रणनीतिक रूप से अहम ‘चाबहार पोर्ट’ (Chabahar Port) के लिए फंड में भारी कटौती यह संकेत देती है कि भारत अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुक रहा है. उन्होंने बजट में केरल की अनदेखी करने पर भी ‘घोर निराशा’ जताई है. थरूर का कहना है कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के डर से भारत ने चाबहार परियोजना से हाथ खींच लिए हैं.
चाबहार पोर्ट का फंड ‘शून्य’, क्या डर गया भारत?
ANI से बात करते हुए थरूर ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में चाबहार पोर्ट के लिए संशोधित अनुमान (RE) 400 करोड़ रुपये था, जिसे इस बजट में घटाकर ‘शून्य’ (Zero) कर दिया गया है. थरूर ने कहा, “ऐसा लगता है कि हम इस पोर्ट को छोड़ रहे हैं. मौजूदा भू-राजनीतिक हालात और ईरान पर पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों को देखते हुए लग रहा है कि हमने वहां पैसा खर्च करने का विचार त्याग दिया है.” उन्होंने माना कि प्रतिबंधों के चलते व्यावहारिक दिक्कतें हैं, लेकिन फंड को जीरो करना “बाहर से थोपी गई नीति के सामने सरेंडर” जैसा लग रहा है.
रूसी तेल महंगा, अब वेनेजुएला का सहारा?
थरूर ने अमेरिकी व्यापार नीतियों और ट्रम्प प्रशासन द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि टैरिफ के कारण भारतीय कंपनियों के लिए रूस से तेल खरीदना अब फायदेमंद (Unviable) नहीं रहा. थरूर ने समझाया कि अमेरिका ने वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति खोल दी है ताकि ग्लोबल मार्केट में कीमतें स्थिर रहें. चूंकि दो देश (रूस-ईरान) प्रतिबंध झेल रहे हैं, इसलिए अमेरिका ने तीसरे (वेनेजुएला) को खोल दिया है, जिससे भारत को ज्यादा नुकसान नहीं होगा.
केरल के साथ ‘सौतेला व्यवहार’, 12 साल से AIIMS का इंतजार
थरूर ने बजट में केरल को नजरअंदाज करने पर भारी नाराजगी जताई. बजट में नारियल और काजू के लिए योजनाओं का जिक्र तो है, लेकिन सबसे बड़े उत्पादक केरल का नाम तक नहीं लिया गया. उन्होंने पूछा कि पटना और वाराणसी में शिप रिपेयर की घोषणा हुई, लेकिन सबसे ज्यादा इनलैंड वाटरवेज वाले केरल को क्या मिला? विझिंजम पोर्ट (Vizhinjam Port) के लिए भी कोई मदद नहीं दी गई. थरूर ने याद दिलाया कि केरल को AIIMS देने का वादा 12 साल पहले किया गया था, जो आज तक पूरा नहीं हुआ.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

