Last Updated:
KCR Phone Tapping Scam: तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से फोन टैपिंग मामले में SIT ने रविवार को उनके नंदी नगर आवास पर 5 घंटे पूछताछ की. बीआरएस सरकार पर राजनेताओं और पत्रकारों की अवैध निगरानी का आरोप है. पूछताछ के दौरान आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा. वहीं, बीआरएस कार्यकर्ताओं ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताकर राज्यभर में प्रदर्शन किया. हालांकि, कांग्रेस सरकार ने स्पष्ट किया कि यह केवल निष्पक्ष जांच का हिस्सा है.
एसआईटी मामले की जांच कर रही है. (AI Image)तेलंगाना के सियासी गलियारों में रविवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब विशेष जांच दल (SIT) की टीम पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) के आवास पर पूछताछ के लिए पहुंची. पिछली बीआरएस सरकार के दौरान हुए कथित फोन टैपिंग मामले में एसआईटी ने केसीआर से करीब पांच घंटे तक कड़े सवाल-जवाब किए. पूछताछ से पहले केसीआर अपने एर्रावल्ली स्थित फार्महाउस से हैदराबाद के नंदी नगर स्थित निवास पहुंचे थे. इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया.
यासी खींचतान के बीच हुई पूछताछ
पिछली बीआरएस सरकार पर राजनेताओं, पत्रकारों, जजों और व्यापारियों की अवैध तरीके से फोन सर्विलांस और इंटरसेप्शन करने के गंभीर आरोप हैं. केसीआर और जांच टीम के बीच पूछताछ की जगह और तारीख को लेकर पिछले कुछ दिनों से कानूनी खींचतान चल रही थी. केसीआर ने पहले अपने फार्महाउस पर पूछताछ का अनुरोध किया था जिसे एसआईटी ने 30 जनवरी को खारिज कर दिया था. इसके बाद अधिकारियों ने उन्हें 1 फरवरी को अपने नंदी नगर निवास पर उपस्थित होने का निर्देश दिया था.
केसीआर ने जांच अधिकारी पर नोटिस तामील करने में “कानूनी प्रक्रियाओं के उल्लंघन” का आरोप भी लगाया. हालांकि, रविवार को वे जांच टीम के सामने पेश हुए और विस्तृत बयान दर्ज कराए. इससे पहले उनके बेटे के.टी. रामा राव और अन्य करीबी रिश्तेदार भी इसी मामले में एसआईटी के सामने पेश हो चुके हैं.
राज्यभर में विरोध प्रदर्शन और सरकार की सफाई
केसीआर से पूछताछ की खबर फैलते ही बीआरएस कार्यकर्ताओं ने तेलंगाना के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सरकार पर “राजनीतिक उत्पीड़न” का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की. वहीं, उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस सरकार किसी भी तरह की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं कर रही है. उनका मुख्य उद्देश्य राज्य में लोकतांत्रिक और पारदर्शी शासन प्रदान करना है.
मामले की पृष्ठभूमि और गिरफ्तारियां
यह मामला मार्च 2024 में तब गरमाया था जब खुफिया जानकारी मिटाने और अवैध फोन टैपिंग के आरोप में तेलंगाना विशेष खुफिया ब्यूरो (SIB) के एक निलंबित डीएसपी सहित चार पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था. मामले के मुख्य आरोपी और पूर्व खुफिया प्रमुख टी. प्रभाकर राव से भी पूछताछ की जा चुकी है. आरोप है कि बीआरएस शासन के दौरान प्रभावशाली लोगों की निजी बातचीत को अवैध रूप से टैप किया गया और सबूतों को मिटाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से डेटा डिलीट किया गया.
About the Author
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें

