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Kalpana Chawla Nasa Mission: 1 फरवरी 2003 को कल्पना चावला अपनी टीम के साथ कोलंबिया स्पेसक्राफ्ट से वापस पृथ्वी पर लौट रही थीं. कोलंबिया यान जब पृथ्वी से 16 मिनट की दूरी पर था, स्पेसक्राफ्ट में कुछ तकनीकी दिक्कत आ गई. यान में गैस भरने की वजह से सेंसर ने काम करना बंद कर दिया और स्पेसक्राफ्ट बड़े हादसे का शिकार हो गया और इस तरह कल्पना उस मिशन से कभी लौटी ही नहीं. इस हादसे में कल्पना चावला समेत सभी सात अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई.
कल्पना चावला अंतरिक्ष मिशन पर जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला बनीं.1 फरवरी की तारीख इतिहास में एक काले दिन के तौर पर दर्ज है. यही वो मनहूस दिन था जब भारत की बेटी कल्पना चावला अंतरिक्ष को छूकर भी हमेशा के लिए आंखों से ओझल हो गईं. साल 2003 में आज ही के दिन कोलंबिया स्पेस शटल भयानक हादसे का शिकार हुआ था. धरती पर लौटने में सिर्फ 16 मिनट बाकी थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. नासा (NASA) का वो मिशन, जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया. आज भी उस हादसे को याद कर हर भारतीय का दिल सहम जाता है. करनाल से अंतरिक्ष तक का उनका सफर गर्व और दर्द दोनों का अहसास कराता है.
करनाल की गलियों से नासा तक का सफर
कल्पना का जन्म 17 मार्च 1962 को हरियाणा के करनाल में हुआ था. बचपन से ही उनकी आंखों में सितारों को छूने का सपना था. उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चली गईं. उनकी मेहनत रंग लाई और 1994 में नासा ने उन्हें अपने मिशन के लिए चुन लिया.
पहली उड़ान जिसने इतिहास रच दिया
साल 1997 में कल्पना ने पहली बार अंतरिक्ष की उड़ान भरी. कोलंबिया स्पेस शटल (STS-87) के जरिए वह स्पेस में जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला बनीं. उनका यह पहला मिशन पूरी तरह सफल रहा था. वह अपनी टीम के साथ सुरक्षित धरती पर वापस लौटी थीं. इस कामयाबी ने उन्हें पूरी दुनिया में पहचान दिला दी थी.
वो आखिरी मिशन और मौत का सफर
16 जनवरी 2003 को उन्होंने अपने दूसरे मिशन (STS-107) के लिए उड़ान भरी. यह सफर बेहद रोमांचक था और टीम ने स्पेस में 80 से ज्यादा एक्सपेरिमेंट्स किए. सब कुछ प्लान के मुताबिक चल रहा था. 1 फरवरी 2003 को उनकी टीम वापसी के लिए तैयार थी. किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी यात्रा साबित होगी.
सिर्फ 16 मिनट दूर और खत्म हो गया सब कुछ
कोलंबिया यान धरती पर लैंड करने ही वाला था, बस 16 मिनट बचे थे. तभी एक तकनीकी खराबी ने सब कुछ बर्बाद कर दिया. यान के बाएं पंखे में एक छेद हो गया था. वहां से बाहर की गर्म गैस स्पेसक्राफ्ट के अंदर तेजी से भरने लगी. गैस भरने से सेंसर ने काम करना बंद कर दिया और यान आसमान में ही बिखर गया. इस दर्दनाक हादसे में कल्पना समेत सभी सात एस्ट्रोनॉट्स की मौत हो गई.
अमर हो गई भारत की यह बहादुर बेटी
कल्पना चावला आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कहानी अमर है. अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने उन्हें मरणोपरांत ‘कांग्रेसनल स्पेस मेडल ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया. उनके नाम पर कई स्कॉलरशिप और संस्थान हैं. वह आज भी लाखों लड़कियों के लिए एक रोल मॉडल हैं.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

