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North East News: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में NHIDCL को ₹1.16 करोड़ मुआवजा देने का आदेश दिया है. कोर्ट ने माना कि हाईवे निर्माण से संपत्ति को नुकसान पहुंचाना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. याचिकाकर्ता की तीन मंजिला इमारत और खेत निर्माण कार्य के कारण बर्बाद हो गए थे. जस्टिस मृदुल कुमार कलिता ने इसे अनुच्छेद 21 और 300A का हनन बताया. कोर्ट ने NHIDCL को तीन महीने में भुगतान करने का निर्देश दिया है.
कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया.नई दिल्ली. गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि निर्माण के दौरान संपत्ति को नुकसान पहुंचाना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. कोर्ट ने NHIDCL को आदेश दिया कि वह कोहिमा के एक प्रभावित भूमि मालिक को तुरंत मुआवजा दे. गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने कोहिमा निवासी थेजाओ सेखोसे की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. नेशनल हाईवे-29 के निर्माण के दौरान याचिकाकर्ता की संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा था.
जस्टिस मृदुल कुमार कलिता ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति के लाभप्रद उपयोग से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 21 और 300A का सीधा उल्लंघन है. कोर्ट ने पाया कि सड़क निर्माण के दौरान हुई भारी मिट्टी कटाई से भूस्खलन हुआ. इस कारण याचिकाकर्ता की तीन मंजिला इमारत, पिगरी और खेत पूरी तरह अनुपयोगी हो गए. यह नुकसान ‘राइट ऑफ वे’ (ROW) यानी अधिग्रहित सीमा से बाहर हुआ था. याचिकाकर्ता ने दलील दी कि अन्य प्रभावितों को भुगतान मिल गया लेकिन उनके साथ भेदभाव किया गया. कोर्ट ने इस तर्क को अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन माना.
मुआवजे और कोर्ट की टिप्पणियां
• भारी जुर्माना: कोर्ट ने NHIDCL को ₹1.16 करोड़ का मुआवजा तीन महीने के भीतर देने का निर्देश दिया है.
• पेड़ों का नुकसान: मूल्यांकन में पाया गया कि लगभग 80 कीमती पेड़ काटे गए थे.
• भेदभाव का अंत: कोर्ट ने माना कि अन्य भू-स्वामियों को भुगतान करना और याचिकाकर्ता को छोड़ना गलत था.
• अनुच्छेद 21 का महत्व: संपत्ति के उपयोग से वंचित करना जीवन और आजीविका के अधिकार का हनन है.
• ठेकेदार की जिम्मेदारी: NHIDCL मुआवजे के बाद ठेकेदार गायत्री प्रोजेक्ट्स लिमिटेड से राशि वसूल सकता है.
मामले की विस्तृत जानकारी
| प्रश्न | उत्तर (संक्षिप्त जानकारी) |
|---|---|
| मुख्य याचिकाकर्ता कौन है? | कोहिमा के निवासी थेजाओ सेखोसे. |
| विवाद किस प्रोजेक्ट से जुड़ा है? | फोर-लेन नेशनल हाईवे-29 निर्माण परियोजना. |
| मुआवजे की राशि कितनी है? | कुल ₹1.16 करोड़ (जिसमें ₹13.93 लाख पेड़ों का नुकसान शामिल है). |
| किन संवैधानिक अनुच्छेदों का हवाला दिया गया? | अनुच्छेद 14 (समानता), अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और 300A (संपत्ति का अधिकार). |
| मुआवजा देने की समय सीमा क्या है? | आदेश की तारीख से तीन महीने के भीतर. |
निर्माण कार्य से हुआ था व्यापक नुकसान
याचिकाकर्ता के अनुसार साल 2018 में ही अधिकारियों ने साइट सत्यापन कर नुकसान की पुष्टि कर दी थी. निर्माण के दौरान कचरा डंप करने से उनका निजी रास्ता भी बंद हो गया था. NHIDCL ने दलील दी थी कि इसके लिए निर्माण ठेकेदार जिम्मेदार है. हालांकि कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि मुख्य कार्यकारी प्राधिकरण होने के नाते NHIDCL अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता. सात साल बीत जाने के बाद याचिकाकर्ता को सिविल कोर्ट भेजना अनुचित होगा.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें

