CJI Suryakant News: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस वकील को कड़ी फटकार लगाई, जिसने जज को लिमिट बताने की कोशिश की थी. सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने वकील से कहा कि अगर वह आंखें दिखाना चाहता है तो दिखाए, हम भी यहां बैठे हैं. हम भी देखेंगे. वकील का नाम महेश तिवारी है. उन्होंने पिछले साल कोर्टरूम की कार्यवाही के दौरान झारखंड हाईकोर्ट के एक जज के साथ मौखिक बहस के लिए जारी किए गए आपराधिक अवमानना नोटिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी.
दरअसल, वकील महेश तिवारी 16 अक्टूबर को झारखंड हाईकोर्ट के जज राजेश कुमार के साथ बहस की थी. इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. बहस के दौरान वकील महेश तिवारी ने जस्टिस कुमार से कहा था कि वे अपनी हद पार न करें.’ इसके बाद झारखंड हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया. इस पर वह सुप्रीम कोर्ट चले गए. हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट से वकील तिवारी को झटका लगा है.
सीजेआी सूर्यकांत ने हाईकोर्ट की अवमानना कार्यवाही के खिलाफ अपील करने के लिए वकील महेश तिवारी को फटकार लगाई और कहा, ‘वह बस सुप्रीम कोर्ट से एक आदेश चाहता है ताकि यह दिखा सके कि ‘मेरा क्या बिगाड़ लिया’..’ चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘अगर वह माफी मांगना चाहता है, तो उसे माफी मांगनी चाहिए… अगर वह जजों को आंखें दिखाना चाहता है, तो वह आगे बढ़ सकता है. हम यहां बैठे हैं, और हम भी देखेंगे.’ सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से यह भी कहा कि अगर वह माफी मांगता है तो सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाए.
किस बात पर हुई थी बहस
महेश तिवारी का जस्टिस राजेश कुमार के साथ तीखी बहस तब हुई, जब वह अपनी क्लाइंट (एक विधवा) के लिए राहत मांग रहे थे, जिसकी बिजली लाइन 1.30 लाख रुपये के बकाया के कारण काट दी गई थी. सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा था कि उनकी क्लाइंट कनेक्शन दोबारा लगवाने के लिए 25,000 रुपये जमा करने को तैयार है. हालांकि, जस्टिस कुमार ने एक न्यायिक मिसाल का हवाला दिया, जिसमें कुल बकाया राशि का 50 प्रतिशत जमा करने की आवश्यकता थी.
क्यों उलझा था मामला
मामला तब सुलझ गया जब महेश तिवारी ने अपनी क्लाइंट को 50,000 रुपये जमा करने पर सहमति जताई. हालांकि, तिवारी का मामला खत्म होने के बाद यह मुद्दा और बढ़ गया. जैसे ही कोर्ट ने अगला मामला लिया, जस्टिस कुमार ने कथित तौर पर महेश तिवारी के तर्क पेश करने के तरीके के बारे में टिप्पणी की. इसके बाद कोर्ट ने उस वक्त अदालत में ही मौजूद झारखंड स्टेट बार काउंसिल के चेयरमैन से वकील के आचरण का संज्ञान लेने को कहा. इसके बाद तिवारी खड़े हुए, बेंच के पास गए, और जज की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘मैं अपनी तरह से बहस कर सकता हूं, आपके बताए तरीके से नहीं. कृपया इस बात का ध्यान रखें… किसी भी वकील को अपमानित करने की कोशिश न करें, मैं आपको बता रहा हूं.’
क्या बहस हुई?
इस पर जज ने पलटकर जवाब दिया और कहा, ‘आप यह नहीं कह सकते कि कोर्ट अन्याय कर रहा है.’ इसके बाद वकील महेश ने कहा, ‘क्या मैंने ऐसा कहा?. इसके बाद जज से लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग देखने के लिए कहा, यह इशारा करते हुए कि यह कोई और वकील था जिसने बहस की वह लाइन इस्तेमाल की थी जिसे जस्टिस कुमार ने अपमानजनक पाया.
चलिए पूरी बातचीत जानते हैं
यह बयान अधिवक्ता महेश तिवारी द्वारा अदालत की कार्यवाही के दौरान दिया गया बताया जा रहा है. वकील ने कहा- कृपया रिकॉर्डिंग देखिए. मैंने केवल आपके समक्ष प्रार्थना की थी… देश न्यायपालिका को लेकर जल रहा है… ये मेरे शब्द हैं. किसी भी अधिवक्ता को अपमानित करने की कोशिश मत कीजिए….आप जज हैं इसलिए सब जानते हैं और हम अधिवक्ता कुछ नहीं? मैं अपने तरीके से बहस करूंगा…सीमा पार मत कीजिए, कृपया सीमा पार मत कीजिए. मैं पिछले 40 वर्षों से प्रैक्टिस कर रहा हूं.’ इसके बाद अधिवक्ता तिवारी अदालत कक्ष से बाहर चले गए.

