नई दिल्ली. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) से यह वादा किया कि अगर BCB की मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो वह एकजुटता दिखाते हुए विश्व कप से हटने पर विचार करेगा हालांकि, इस मामले पर PCB की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सच्चाई यह है कि पूरी चर्चा शुरू से ही बेहद बचकानी लगती है. पाकिस्तान के टूर्नामेंट से हटने की बात महज़ अफवाह या हवा में उड़ाई गई पतंग जैसी प्रतीत होती है.
PCB ने भाग लेने वाले देशों का एक आधिकारिक समझौता (Participating Nations Agreement) साइन किया है और अब तक उस समझौते का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है. पाकिस्तान अपने मैच श्रीलंका में खेल रहा है और उसके पास ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिसके तहत वह यह दावा कर सके कि उसके साथ अन्याय हुआ है ऐसे में एकजुटता दिखाने के नाम पर टूर्नामेंट से हटने की बात करना पूरी तरह से निरर्थक है.
पाकिस्तान की ड्रामेबाजी से फंसा बांग्लादेश
अगर कभी ऐसी स्थिति पर गंभीरता से विचार किया भी जाए,तो ICC को बस PCB को वह समझौता दिखाना होगा और पूछना होगा कि वह किन आधारों पर टूर्नामेंट से हटने की बात कर रहा है. इसके बाद ICC को पूरा अधिकार होगा कि वह पाकिस्तान पर भारी जुर्माना लगाए, क्योंकि इस तरह का फैसला लेने के लिए कोई वैध कारण मौजूद ही नहीं है. यह भी एक और दबाव बनाने की रणनीति है, जो BCB के उस दावे की तरह ही नाकाम होती दिख रही है, जिसमें कहा गया था कि ICC को अंतिम फैसला बताने की कोई समय-सीमा नहीं है. टूर्नामेंट शुरू होने में अब सिर्फ कुछ ही दिन बचे हैं, ऐसे में यह स्वाभाविक है कि ICC सीमित समय तक ही इंतजार करेगा। अगर बांग्लादेश यह सोचता है कि वह शासी निकाय को बंधक बनाकर टूर्नामेंट को आखिरी मोड़ तक ले जा सकता है, तो ऐसा बिल्कुल नहीं होने वाला.
बांग्लादेश खुद के जाल में उलझा
ये कहना गलत नहीं होगा कि बांग्लादेश के लिए समय तेज़ी से खत्म होता जा रहा है पाकिस्तान के समर्थन में आने वाली यह दलील भी किसी ठोस ज़मीन पर नहीं टिकती. अंतरराष्ट्रीय खेल कूटनीति इसी तरह काम नहीं करती उदाहरण के तौर पर, पाकिस्तान यह अच्छी तरह जानता था कि यह टूर्नामेंट भारत और श्रीलंका की मेज़बानी में हो रहा है, फिर भी उसने यह सुझाव दिया कि वह बांग्लादेश के मैचों की मेज़बानी के लिए तैयार है. यह पूरी तरह से दिखावटी बयान था. ऐसे किसी हालात के हकीकत बनने की संभावना न के बराबर थी, लेकिन इसका मकसद भारत-विरोधी खेमे को खुश करना और बांग्लादेश में सहानुभूति हासिल करना था.
बांग्लादेश सरकार के खेल सलाहकार आसिफ नजरूल ने मंगलवार को दोहराया कि उनकी टीम किसी भी हालत में टी20 विश्व कप के लिये भारत नहीं जायेगी हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को भागीदारी पर फैसला लेने के लिये 21 जनवरी तक का समय दिया है.
आईसीसी आर या पार के मूड में
जहां तक ICC का सवाल है, वह यह अच्छी तरह समझता है कि समय बेहद अहम है. वह यह भी जानता है कि जब तक यह मुद्दा किसी एक नतीजे पर नहीं पहुंचता, तब तक चीज़ों को उलझाने की कोशिशें जारी रहेंगी. अब इस पूरे मामले का अंतिम समाधान निकालना वक्त की ज़रूरत है, और अगर इसके लिए सख्त रुख अपनाना पड़े, तो भी ICC को वही करना होगा. BCB द्वारा हालात को इस हद तक धकेल दिए जाने के बाद ICC के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं. वह अनचाहे ही ऐसी स्थिति में फंस गया है, जिसे कहा जाता है आगे कुआं, पीछे खाई और इसमें पाकिस्तान की ड्रामेबाज़ी किसी भी तरह मददगार साबित नहीं होने वाली.

