ED vs IPAC : पश्चिम बंगाल के आईपैक बनाम ईडी मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज यानी गुरुवार को सुनवाई हुई. आई-पैक (I-PAC) से जुड़े छापों को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि यह याचिका किस आधार पर विचार करने योग्य है? इस पर ईडी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने खूब दलीलें दीं. तुषार मेहता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र नहीं. भीड़तंत्र लोकतंत्र पर हावी हो तो यही होता है. इस दौरान ममता की ओर से पेश कपिल सिब्बल चुपचाप अपनी बारी का इंतजार करते रहे.
ईडी बनाम आईपैक मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलील दी कि यह एक बेहद चौंकाने वाला पैटर्न सामने आ रहा है. उन्होंने कहा कि इससे पहले भी जब-जब वैधानिक प्राधिकरणों ने अपने वैधानिक अधिकारों का प्रयोग किया, मुख्यमंत्री स्वयं मौके पर पहुंच गईं. तुषार मेहता ने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र नहीं है. भीड़तंत्र लोकतंत्र पर हावी हो तो यही होता है.
सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने पूछा कि यह याचिका किस आधार पर विचारणीय है. इस पर एसजी तुषार मेहता ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ निदेशक, आयुक्त भी मौके पर मौजूद थे और वे सभी सहयोगी की तरह व्यवहार कर रहे थे. उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी राजनीतिक नेताओं के साथ धरने पर बैठे रहे. एसजी ने यह भी बताया कि एक अधिकारी व्यक्तिगत रूप से आहत है और आइटम 28 अधिकारियों की याचिका से जुड़ा है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इससे पहले संयुक्त निदेशक, CBI के घर का घेराव किया गया था और पत्थरबाजी भी हुई थी.
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और कल्याण बनर्जी मौजूद थे. एसजी मेहता ने आगे कहा कि ऐसे ठोस सबूत मौजूद थे, जिनसे यह निष्कर्ष निकलता है कि एक परिसर में आपत्तिजनक सामग्री मौजूद थी. स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद DGP, मुख्यमंत्री, पुलिस आयुक्त, क्षेत्र के DCP और बड़ी संख्या में पुलिस बल वहां पहुंचा और बिना अधिकार के सामग्री उठा ली गई. उन्होंने इसे चोरी का अपराध बताया. SG के अनुसार, ED अधिकारी का मोबाइल फोन भी ले लिया गया और मुख्यमंत्री मीडिया के सामने भी गईं.
SG मेहता ने चेतावनी दी कि इस तरह की घटनाएं अधिकारियों को अपने कर्तव्यों के निर्वहन से रोकेंगी और केंद्रीय बलों का मनोबल गिराएंगी. उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि एक मिसाल कायम की जाए और छापे के दौरान मौजूद अधिकारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश दिए जाएं. इस पर जस्टिस मिश्रा ने पूछा कि क्या अदालत निलंबन का आदेश दे.
तब एसजी तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि वह सीधे निलंबन का आदेश नहीं मांग रहे हैं, बल्कि सक्षम प्राधिकारी को ऐसा करने का निर्देश देने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस मुख्यमंत्री के साथ इस उद्देश्य से आई थी ताकि एकत्रित साक्ष्य उनकी निगरानी में हटाए जा सकें. ईडी के तरफ से कोलकाता हाईकोर्ट में कल की सुनवाई और उससे जुड़े परेशानियों का भी जिक्र किया गया. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि कल तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने एक याचिका दाखिल की थी. उन्होंने बताया कि मामले की सुनवाई शुरू होने से पहले ही मुख्य न्यायाधीश (CJI) को यह आदेश पारित करना पड़ा कि केवल वही वकील अदालत में उपस्थित होंगे, जो इस मामले से सीधे जुड़े हुए हैं.
चलिए जानते हैं कोर्ट रूम में किसने क्या कहा?
-कोर्ट ने ईडी से सवाल किया आप वहां करने क्या गए थे? इस पर ईडी ने कहा कि कोयला घोटाला, मनी लॉंड्रिंग की जांच करने गए थे.
-एसजी मेहता ने आगे कहा कि मुझे नहीं पता वहां छिपाने के लिए ऐसा क्या था कि मुख्यमंत्री को पूरी पुलिस फोर्स के साथ खुद घुसना पड़ा.
-एएसजी ने आगे कहा कि मैं वहां था. मैं आपको बताता हूं. इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि मैं भी वहां था. इसके बाद जस्टिस मिश्रा ने कहा कि कम से कम यहां हंगामा मत कीजिए.
-एसजी ने कहा कि मैंने वहां के विधि विभाग की व्हाट्सऐप चैट रिकॉर्ड पर रखी हैं. ये सभी पार्टी के कानूनी प्रकोष्ठ के निर्देश पर की गई थीं. इसलिए यह निर्दोषता नहीं थी. यह जानबूझकर किया गया था. संदेश में लिखा है कि आज गेट नंबर पर सभा है.
-जस्टिस मिश्रा ने कहा कि क्या वह जंतर-मंतर था?
-एसजी ने कहा कि हाँ, अदालत को जंतर-मंतर में बदल दिया गया था. उन्होंने उन सदस्यों के लिए बस और परिवहन की व्यवस्था भी की थी. हाई कोर्ट ने आदेश पारित किया कि केवल वकील ही अदालत में प्रवेश करेंगे और सुनवाई का सीधा प्रसारण किया जाएगा.
-तुषार मेहता ने कहा कि डीजी और अधिकारियों को (ऑथराइजेशन लेटर) दिखाए गए थे. उनमें इतना दुस्साहस था (इनकी हिम्मद देखिये) कि वे जांच के लिए मौजूद ज़रूरी दस्तावेज़ उठा ले गए — यह साफ़ तौर पर चोरी है.
-एसजी ने कहा कि कल हाईकोर्ट में एएसजी राजू का माइक लगातार म्यूट किया गया था.
-इस पर SC ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लेकिन यह अदालत के नियंत्रण में है.
-एसजी ने कहा कि मैं इस पर कुछ कहना नहीं चाहता. लेकिन हम यहां अपने अधिकारियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए हैं. हम अधिनियम के तहत कार्रवाई कर रहे हैं और हम अपने निजी लाभ के लिए कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं.
-ED – इस मामले में नज़ीर बनना चाहिये. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा जवाब के लिए नोटिस जारी करेंगे. इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष यानि ममता के लिए पेश हुए हैं. तब कोर्ट ने कहा, जो सीएम हैं, उस पर सिब्बल का जवाब था- हां.
-सिब्बल ने कहा – हमने कैविएट फाइल किया है, ममता का पक्ष सुना जाना चाहिये. पहले मेनटेनेबिलिटी पर बात कर लीजिए. ये लोग पहले हाई कोर्ट क्यों नहीं गए.
-आईपैक की तरफ से पेश हुए वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कोलकता हाई कोर्ट में सुनवाई जब चल रही थी उसमें जांच एजेंसी ने कहा इसकी सुनवाई को टाल दीजिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में मामला है.
-कपिल सिब्बल ने टाइमिंग को लेकर सवाल उठाया और कहा कि चुनाव से पहले इस रेड की क्या जरूरत थी. सिब्बल ने कहा कि 2024 से मामला ईडी के पास है तो चुनाव से पहले जाने की क्या ज़रूरत थी.
-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम नोटिस जारी कर रहे हैं. यह गंभीर मसला है हम इस मामले की सुनवाई करेंगे इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि यहां जानकारी की कलरिंग की जा रही है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इससे बहुत व्यथित हैं कि हाईकोर्ट को सुनवाई नहीं करने दी गई. इस पर वरिष्ठ वकील सिब्बल ने कहा कि कल सुनवाई हुई है.
-ईडी के वकील एस राजू ने अब इस मामले की CBI जांच की मांग की है. ईडी ने डकैती का ज़िक्र किया. सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने रॉबरी, थ्रेट, डकैती जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया. और कहा कि इसलिए जांच सीबीआई करे.
-एएसजी राजू ने कहा कि ये मामला बेहद संगीन है. लिहाजा इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई से जांच होनी चाहिए, क्योंकि जांच के दौरान मौके पर दस्तावेजों को जबरन उठाने, धमकी देने इत्यादि से जुड़ा ये मामला है.
-ईडी चाहता है मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में सुना जाए, जबकि ममता के वकील चाहते हैं कि मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में सुना जाए.
-कपिल सिब्बल ने कहा कि धारा 66(2) के तहत अपराध राज्य की जांच मशीनरी को रिपोर्ट किए जाने चाहिए, ईडी का पंचनामा इसके दावों के विपरीत है. इस पर जस्टिस मिश्रा ने सुनवाई के दौरान सीजेआई के तर्क समय सारणी का हवाला दिया.
-एसजी तुषार मेहता ने कहा कि वकील मीडिया शो में मामले पर चर्चा न करें. इस पर कपिल सिब्बल ने कहा-अधिकारियों को पत्रकारों को विवरण लीक न करने के लिए सर्कुलर जारी किया जाना चाहिए.
जस्टिस मिश्रा ने हल्के अंदाज में एसजी मेहता की टिप्पणी पर कहा- अगर चुनाव से पहले पैसा लॉन्ड्र किया गया तो ईडी क्या कर सकती है? इस पर एसजी मेहता ने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में अभी कोई चुनाव अधिसूचित नहीं है, सुप्रीम कोर्ट ने समय संदर्भ पर ध्यान दिया.
-अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कोई मना नहीं कर रहा कि ममता वहां नहीं गई थी लेकिन याचिका की बातें पंचनामें से अलग हैं. मैं प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर इस याचिका की maintainability पर गंभीर सवाल उठाता हूं.
-कपिल सिब्बल ने कहा कि याचिका में क्रिमिनल ट्रेसपास की बात है लेकिन इनके पंचनामें में इसका ज़िक्र ही नहीं है. फिर इस बात पर आए मामला सीधा सुप्रीम कोर्ट क्यों आया.

