विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच कल हुई महत्वपूर्ण बातचीत के बाद थरूर का यह बयान कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है. थरूर का मानना है कि दोनों देशों को इस डील के लिए पूरे साल का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि इसे 2026 की शुरुआत में ही अंजाम दे देना चाहिए.
2026 की पहली तिमाही में हो जानी चाहिए डील
शशि थरूर ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए साफ शब्दों में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता 2026 की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च के बीच संपन्न हो जाना चाहिए. उन्होंने कहा, यह डील 2026 की पहली तिमाही में होना चाहिए. हम व्यापार समझौते के लिए पूरा साल बीत जाने का इंतजार नहीं कर सकते. मुझे लगता है कि यह वास्तव में जल्द ही होना चाहिए.
थरूर का यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि ट्रेड डील्स की वजह से दोनों देशों के बीच तनाव है. लेकिन थरूर, जो खुद एक अनुभवी राजनयिक रहे हैं, का मानना है कि अब और देरी दोनों देशों के हित में नहीं है. उनका यह बयान इस बात का संकेत है कि भारत को अब “वेट एंड वॉच” की नीति छोड़कर आक्रामक कूटनीति अपनानी चाहिए.
शशि थरूर ने सिर्फ तारीख ही नहीं बताई, बल्कि डील की शर्तों को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी. उन्होंने अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले भारी-भरकम टैरिफ या आयात शुल्क को सबसे बड़ी बाधा बताया. थरूर ने कहा, निश्चित रूप से, 75% टैरिफ पर कोई भी डील संभव नहीं है. अगर हम इसे घटाकर 15% के करीब ला सकते हैं, जैसा कि ब्रिटेन का अमेरिका के साथ है, तो हम व्यापार कर सकते हैं.
‘पैक्स सिलिका’ और ‘क्वॉड’ पर भी बोले थरूर
शशि थरूर ने भारत और अमेरिका के बीच ‘पैक्स सिलिका’ की घोषणा का स्वागत किया. ‘पैक्स सिलिका’ शब्द का इस्तेमाल हाल ही में तकनीक और सेमीकंडक्टर चिप्स के क्षेत्र में अमेरिका और भारत के बढ़ते सहयोग के लिए किया जा रहा है. थरूर ने इसे एक सकारात्मक कदम बताया. इसके साथ ही उन्होंने ‘क्वॉड समिट’ (Quad Summit) को लेकर भी सरकार को आगाह किया. उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि क्वाड समिट की घोषणा में देरी नहीं की जानी चाहिए… हमें अपने अधिकार का प्रयोग जल्द करने में सक्षम होना चाहिए. मुझे उम्मीद है कि ऐसा होगा.”
शशि थरूर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ फोन पर बात की है. यह बातचीत अमेरिका में नई सरकार के गठन और नीतियों में बदलाव के दौर में हुई है. मार्को रूबियो को चीन के प्रति सख्त और भारत के प्रति नरम रुख रखने वाले नेता के तौर पर देखा जाता है, लेकिन व्यापार के मोर्चे पर रिपब्लिकन प्रशासन हमेशा से ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति पर चलता रहा है. ऐसे में, थरूर का यह बयान कि 75% टैरिफ पर बात नहीं बनेगी, भारत सरकार के लिए भी एक सलाह है और विपक्ष की तरफ से एक स्पष्ट संदेश भी कि भारत को अमेरिकी दबाव में झुकने की जरूरत नहीं है.

