India
oi-Divyansh Rastogi
Bangladesh
Election:
बांग्लादेश
में
राजनीतिक
उथल-पुथल
के
बीच
भारत
ने
अपना
रुख
साफ
कर
दिया
है।
विदेश
मंत्रालय
के
प्रवक्ता
रणधीर
जायसवाल
ने
26
दिसंबर
2025
को
साप्ताहिक
ब्रीफिंग
में
कहा
कि
भारत,
बांग्लादेश
में
स्वतंत्र,
निष्पक्ष
और
समावेशी
चुनावों
का
समर्थन
करता
है।
BNP
नेता
तारिक
रहमान
की
17
साल
बाद
वापसी
को
भी
इसी
संदर्भ
में
देखा
जाना
चाहिए।
साथ
ही,
अल्पसंख्यकों
(हिंदू,
ईसाई,
बौद्ध)
पर
‘लगातार
शत्रुता’
को
‘गंभीर
चिंता’
बताया
और
दीपू
चंद्र
दास
की
हत्या
की
कड़ी
निंदा
की।
भारत
ने
बांग्लादेश
सरकार
से
दोषियों
को
सजा
देने
की
उम्मीद
जताई।
आइए,
समझते
हैं
भारत
का
पूरा
स्टैंड,
बांग्लादेश
की
मौजूदा
स्थिति
और
इसके
सियासी
मायने…

भारत
का
स्टैंड:
चुनाव
और
अल्पसंख्यक
सुरक्षा
पर
जोर
-
रणधीर
जायसवाल
ने
ब्रीफिंग
में
कहा-
‘भारत
बांग्लादेश
में
स्वतंत्र,
निष्पक्ष,
समावेशी
और
भागीदारीपूर्ण
चुनावों
का
समर्थन
करता
है।
तारिक
रहमान
की
वापसी
को
इसी
संदर्भ
में
देखें।
बांग्लादेश
में
अल्पसंख्यकों
के
खिलाफ
लगातार
शत्रुता
गंभीर
चिंता
का
विषय
है।
हम
दीपू
चंद्र
दास
की
हालिया
हत्या
की
कड़ी
निंदा
करते
हैं
और
उम्मीद
करते
हैं
कि
दोषियों
को
न्याय
के
कटघरे
में
लाया
जाएगा।’ -
हिंसा
को
खारिज
नहीं:–
‘इन
घटनाओं
को
मीडिया
अतिशयोक्ति
या
राजनीतिक
हिंसा
कहकर
खारिज
नहीं
किया
जा
सकता।
भारत
बांग्लादेश
के
घटनाक्रम
पर
बारीकी
से
नजर
रख
रहा
है।’
यह
बयान
तारिक
रहमान
की
25
दिसंबर
को
लंदन
से
वापसी
और
फरवरी
2026
चुनावों
के
बैकग्राउंड
में
आया
है।
तारिक
रहमान
की
वापसी:
बांग्लादेश
चुनावों
का
टर्निंग
पॉइंट
तारिक
रहमान
(BNP
कार्यवाहक
अध्यक्ष,
खालिदा
जिया
के
बेटे)
17
साल
लंदन
में
निर्वासित
थे।
25
दिसंबर
2025
को
ढाका
लौटे,
जहां
लाखों
समर्थकों
ने
स्वागत
किया।
वे
फरवरी
चुनावों
में
PM
कैंडिडेट
माने
जा
रहे
हैं।
BNP
मजबूत
स्थिति
में
है,
क्योंकि
अवामी
लीग
(हसीना
की
पार्टी)
चुनाव
से
बाहर
है।
भारत
ने
इसे
‘समावेशी
चुनाव’
के
संदर्भ
में
देखा,
यानी
सभी
पार्टियों
की
भागीदारी।
लेकिन
बांग्लादेश
में
हिंसा
और
अस्थिरता
चिंता
का
विषय
बनी
हुई
है।
भारत-बांग्लादेश
संबंध:
तनाव
और
उम्मीद
हसीना
के
जाने
के
बाद
संबंधों
में
तनाव
बढ़ा।
भारत
अल्पसंख्यक
सुरक्षा
पर
चिंतित,
बांग्लादेश
‘हस्तक्षेप’
का
आरोप
लगाता
है।
लेकिन
भारत
ने
साफ
किया
कि
वह
स्थिर,
शांतिपूर्ण
और
प्रगतिशील
बांग्लादेश
चाहता
है।
चुनाव
समावेशी
हों,
तो
संबंध
सुधर
सकते
हैं।
भारत
ने
चुनावों
में
समावेशिता
और
अल्पसंख्यक
सुरक्षा
पर
जोर
दिया।
तारिक
रहमान
की
वापसी
को
पॉजिटिव
संदर्भ
में
देखा,
लेकिन
हिंसा
पर
कड़ी
निंदा।
यह
रुख
क्षेत्रीय
स्थिरता
और
मानवाधिकारों
का
संतुलन
दिखाता
है।
क्या
फरवरी
चुनाव
शांतिपूर्ण
होंगे?
आपका
विचार
क्या
है?
कमेंट्स
में
बताएं!

