India
oi-Smita Mugdha
Viksit
Bharat
Shiksha
Adhishthan
Bill:
केंद्र
सरकार
उच्च
शिक्षा
व्यवस्था
में
बड़े
सुधार
की
दिशा
में
एक
नया
कानून
लाने
की
तैयारी
कर
रही
है।
प्रस्तावित
विधेयक
के
अनुसार,
देश
में
एक
उच्च
शिक्षा
आयोग
(Commission)
का
गठन
किया
जाएगा।
इसके
तहत
तीन
प्रमुख
इकाई
रेगुलेटरी
काउंसिल,
एक्रिडिटेशन
काउंसिल
और
स्टैंडर्ड्स
काउंसिल
होंगे।
काउंसिल
मिलकर
उच्च
शिक्षण
संस्थानों
की
निगरानी
करेगी।
साथ
ही,
समय-समय
पर
जरूरी
दिशा
निर्देश
भी
देगी।
इस
बिल
को
लाने
के
पीछे
सरकार
का
उद्देश्य
है
कि
सिलेबस
को
मौजूदा
जरूरतों
को
मुताबिक
बनाया
जाए।
साथ
ही,
विद्यार्थियों
के
लिए
शिक्षा
के
साथ
रोजगार
के
अवसर
बनें।
शिक्षा
के
जरिए
भारतीय
मूल्यों
को
भी
शिक्षा
में
शामिल
किया
जाए।
प्राइवेट
कॉलेजों
की
मनमानी
पर
भी
बिल
के
लागू
होने
के
बाद
लगाम
लगेगी।
जानें
बिल
की
खास
बातें:

Viksit
Bharat
Shiksha
Adhishthan
Bill:
12
सदस्यों
का
आयोग
बनेगा
प्रस्तावित
आयोग
12
सदस्यों
का
होगा।
इसमें
तीनों
काउंसिल
के
अध्यक्ष,
केंद्रीय
उच्च
शिक्षा
सचिव,
राज्य
के
उच्च
शिक्षण
संस्थानों
से
प्रोफेसर
रैंक
से
कम
नहीं
दो
प्रतिष्ठित
शिक्षाविद,
पांच
नामी
विशेषज्ञ
और
एक
सदस्य
सचिव
शामिल
होंगे।
अहम
बात
यह
है
कि
इन
सभी
नियुक्तियों
की
प्रक्रिया
पूरी
तरह
केंद्र
सरकार
के
हाथ
में
होगी।
नियुक्ति
के
लिए
तीन
सदस्यीय
सर्च
पैनल
बनाया
जाएगा।
विधेयक
में
यह
भी
प्रस्ताव
है
कि
आयोग
या
काउंसिल
के
किसी
पदाधिकारी
या
कर्मचारी
के
खिलाफ
‘गुड
फेथ’
में
किए
गए
कामों
के
लिए
कोई
आपराधिक
या
कानूनी
कार्रवाई
नहीं
की
जा
सकेगी।
यह
भी
पढ़ें:
HECI
Bill
2025:
शिक्षा
में
सबसे
बड़ा
सुधार
होने
वाला
है!
क्या
है
हायर
एजुकेशन
बिल?
क्या
होगा
आपके
कॉलेज
पर
असर
Higher
Education
Overhaul:
नियम
उल्लंघन
पर
भारी
जुर्माना
नए
कानून
के
तहत
अगर
कोई
उच्च
शिक्षण
संस्थान
नियमों
का
उल्लंघन
करता
है
और
सुधार
नहीं
करता,
तो
उस
पर
कम
से
कम
10
लाख
से
30
लाख
रुपये
तक
का
जुर्माना
लगाया
जा
सकता
है।
वहीं,
बार-बार
उल्लंघन
करने
पर
75
लाख
रुपये
तक
का
जुर्माना
या
संस्थान
का
निलंबन
भी
हो
सकता
है।
भारत
को
वैश्विक
शिक्षा
केंद्र
बनाने
का
लक्ष्य
विधेयक
में
कहा
गया
है
कि
यह
आयोग
उच्च
शिक्षा
और
शोध
के
समग्र
विकास
के
लिए
रणनीतिक
दिशा
देगा।
इसका
उद्देश्य
भारतीय
संस्थानों
को
बहु-विषयक
(multi-disciplinary)
शिक्षा
और
रिसर्च
केंद्रों
में
बदलना
और
भारत
को
वैश्विक
शिक्षा
गंतव्य
(Education
Destination)
के
रूप
में
स्थापित
करना
है।
भारतीय
ज्ञान
परंपरा
पर
जोर
आयोग
भारतीय
ज्ञान,
भाषाओं
और
कला
को
उच्च
शिक्षा
प्रणाली
में
एकीकृत
करने
का
रोडमैप
तैयार
करेगा।
साथ
ही,
तीनों
काउंसिल
के
बीच
बेहतर
समन्वय
और
उनके
संचालन
के
लिए
वित्तीय
सहायता
भी
सुनिश्चित
करेगा।
किन
संस्थानों
पर
लागू
होगा
कानून
यह
प्रस्तावित
कानून
राष्ट्रीय
महत्व
के
संस्थानों,
संसद
द्वारा
स्थापित
संस्थानों,
विश्वविद्यालयों,
कॉलेजों,
AICTE
के
अंतर्गत
आने
वाले
संस्थानों,
आर्किटेक्ट्स
एक्ट
1972
के
तहत
संस्थानों,
ओपन
और
डिस्टेंस
लर्निंग
संस्थानों
समेत
लगभग
पूरे
उच्च
शिक्षा
क्षेत्र
को
कवर
करेगा।
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to
Disconnect
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ऑफिस
के
बाद
‘नो
कॉल’!
संसद
में
पेश
हुए
‘राइट
टू
डिस्कनेक्ट’
बिल
चर्चा
में
क्यों
है?
14
सदस्यीय
रेगुलेटरी
काउंसिल
करेगी
निगरानी
–
रेगुलेटरी
काउंसिल
का
काम
सभी
उच्च
शिक्षण
संस्थानों
को
चरणबद्ध
तरीके
से
पूर्ण
मान्यता
(Accreditation)
और
स्वायत्तता
दिलाना
होगा।
–
साथ
ही,
उच्च
शिक्षा
के
व्यावसायीकरण
(Commercialisation)
को
रोकने
के
लिए
नीति
तैयार
की
जाएगी।
संस्थानों
को
अपनी
फाइनेंस,
ऑडिट,
इंफ्रास्ट्रक्चर,
फैकल्टी
और
शैक्षणिक
परिणामों
की
सार्वजनिक
जानकारी
देनी
होगी।
–
14
सदस्यीय
एक्रिडिटेशन
काउंसिल
आउटकम
आधारित
एक्रिडिटेशन
फ्रेमवर्क
तैयार
करेगी।
इसके
तहत
पारंपरिक,
ऑनलाइन,
डिजिटल
और
डिस्टेंस
लर्निंग
संस्थानों
का
मूल्यांकन
और
मान्यता
दी
जाएगी।
विदेशी
विश्वविद्यालयों
के
लिए
भी
नियम
होंगे
लागू
रेगुलेटरी
काउंसिल
विदेशी
विश्वविद्यालयों
के
लिए
मानक
तय
करेगी,
ताकि
वे
भारत
में
कैंपस
खोल
सकें।
साथ
ही,
भारतीय
विश्वविद्यालयों
को
विदेशों
में
कैंपस
खोलने
के
लिए
भी
प्रोत्साहित
किया
जाएगा।
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