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केंद्र सरकार ने बैंकों के विलय पर बहुत जोर दिया है. इस कड़ी में अन्य छह बैंक विलय हो सकते हैं. आइए जानें वे कौन-कौन से हैं-

केंद्र सरकार फिर से बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है. खबरें हैं कि सरकार छह बड़े सरकारी बैंकों को एक-दूसरे के साथ या किसी बड़े बैंक के साथ मिलाने पर विचार कर रही है. यह चर्चा इसलिए तेज हुई है क्योंकि सरकार चाहती है कि भारत में भी कुछ ऐसे बड़े बैंक तैयार हों, जो दुनिया के टॉप 100 बैंकों में जगह बना सकें. सबसे बड़ा सरकारी बैंक SBI भी चाहता है कि आगे चलकर बड़े-बड़े बैंकों का निर्माण हो, ताकि उसकी मार्केट वैल्यू और बढ़ सके. इस समय छह PSU बैंकों पर फैसला होना बाकी है और इसी को लेकर बातचीत जारी है. बैंक मर्जर का मुख्य मकसद वित्तीय स्थिति को मजबूत करना, NPA (मोंडी बकाया) घटाना, डिजिटल सुविधाएं बढ़ाना और वैश्विक स्तर पर भारतीय बैंकों की प्रतिस्पर्धा को मजबूत बनाना है.

जिन बैंकों के मर्जर पर चर्चा है, उनमें बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज़ बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, यूको बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक शामिल हैं. इनमें से कुछ बैंक एक-दूसरे के साथ या फिर किसी बड़े बैंक में विलय हो सकते हैं.

भारत में 1993 से लेकर अब तक कई बड़े बैंक मर्जर हो चुके हैं. तीन दशक में बैंकिंग सिस्टम में भारी बदलाव आए, और कई बैंकों को मिलाकर एक बड़ी और अधिक मजबूत संस्था बनाने की रणनीति अपनाई गई. ऐसे मर्जरों की वजह से बैंकों की पूंजी क्षमता बढ़ी, बेहतर तकनीक अपनाने में आसानी हुई, जोखिम कम हुआ और शाखाओं के ओवरलैप से होने वाला खर्च घटा.
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अगर हाल के बड़े मर्जरों को देखें, तो अप्रैल 2017 में SBI ने अपने छह सहयोगी बैंकों को अपने आप में मिला था. इन बैंकों में स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर और भारतीय महिला बैंक शामिल थे. इससे SBI देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक बना. सरकार में यह विचार पहली बार पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रखा था कि कम लेकिन मजबूत सरकारी बैंक होने चाहिए.

अप्रैल 2019 में बैंक ऑफ बड़ौदा ने विजया बैंक और देना बैंक का विलय किया. इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा देश का तीसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक बन गया. अप्रैल 2020 में PNB ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को अपने साथ मिलाया, जिससे PNB दूसरा सबसे बड़ा PSU बैंक बन गया. इसी वर्ष कर्नाटक आधारित केनरा बैंक ने सिंडिकेट बैंक को अपने साथ जोड़ा और देश का चौथा सबसे बड़ा PSU बैंक बना. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक को मिलाकर पाँचवाँ सबसे बड़ा PSU बैंक बनाया. इसके बाद इंडियन बैंक ने इलाहाबाद बैंक का विलय करके सातवां सबसे बड़ा बैंक बना.

अब सवाल यह है कि अगला मर्जर किसका होगा? 2017 से 2020 के बीच जितने भी बड़े मर्जर हुए, वे सभी अप्रैल में हुए थे, यानी वित्त वर्ष की शुरुआत में. भले ही वित्त मंत्रालय ने अभी आधिकारिक तौर पर कोई नाम नहीं बताया है, लेकिन उम्मीद है कि अप्रैल 2026 तक इस बारे में कोई बड़ी घोषणा हो सकती है. खबरों के मुताबिक, सरकार अगली राउंड की बैंकिंग मर्जर योजना तैयार कर रही है और अप्रैल–मई में कोई आधिकारिक जानकारी सामने आ सकती है. इस बार पहले की तरह एक ही साथ बड़े मर्जर नहीं होंगे, बल्कि योजना को दो–तीन चरणों में लागू किया जा सकता है, ताकि प्रक्रिया आसान हो और पूंजी प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा सके.

एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार का लंबी अवधि का लक्ष्य है कि सरकारी बैंकों की संख्या 12 से घटाकर 6-7 मजबूत और प्रतिस्पर्धी संस्थानों तक लाई जाए. इससे बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत होगी, लोन देने की क्षमता बढ़ेगी, कामकाज बेहतर होगा और खासतौर पर भारत के तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को सपोर्ट करने के लिए बड़ी क्षमता वाले बैंक तैयार होंगे.

