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America Police Action News: साल 2013 में 39 साल की एक महिला आईएफएस अधिकारी देवयानी खोबरागड़े के साथ अमेरिका में गलत व्यवहार हुआ था. पहले गिरफ्तारी और फिर उनके कपड़े उतारकर तलाशी ली गई थी. जानें इस घटना ने कैसे दोनों देशों के रिश्तों को हिला दिया.
भारत का वह आईएफएस अधिकारी, जिसको लेकर अमेरिका से हो गई तनातनी. (photo-Devyani Khobragade x)नई दिल्ली. 2013 की सर्दियों में न्यूयॉर्क की गलियों में एक ऐसी घटना घटी, जिसने एक ही झटके में दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ताकतों भारत और अमेरिका को आमने-सामने खड़ा कर दिया था. यह घटना थी आईएफएस अधिकारी और भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े की गिरफ्तारी. देवयानी उस समय न्यूयॉर्क में भारत की डेप्युटी कॉन्सुल जनरल थीं. अमेरिकी कानून के तहत उन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपनी घरेलू सहायिका संगीता रिचर्ड को कम वेतन दिया और वीजा फॉर्म में गलत जानकारी दी. भारतीय अधिकारियों को तब लगा कि यह मामला कूटनीतिक स्तर पर सुलझाया जाना चाहिए था, पर अमेरिका ने इसे क्रिमिनल मामले की तरह ट्रीट किया. इसके बाद फिर जो हुआ उसने दोनों देशों के रिश्तों को हिला दिया.
देवयानी को न्यूयॉर्क में उनके बच्चों के स्कूल के बाहर से अमेरिकी अधिकारियों ने हिरासत में लिया. लेकिन विवाद सिर्फ गिरफ्तारी तक नहीं रुका. अमेरिकी पुलिस ने देवयानी के कपड़े उतरवाकर तलाशी ली. देवयानी के साथ ऐसा व्यवहारा किया गया, जो कई देशों में सिर्फ गंभीर अपराधों के अपराधी के साथ की जाती है. जब यह खबर जब भारत पहुंची तो मानो देश में तूफान उठ खड़ा हुआ. देश की राजधानी दिल्ली में अमेरेकी दूतावास के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन हुए. दोनों देशों के रिश्ते में कड़वाहट की बात होने लगी.
महिला अधिकारी के साथ गलत व्यवहार
यह विवाद भारत में संसद से लेकर सड़क तक फैल गया. सरकार, विपक्ष, मीडिया सब एक सुर में अमेरिका पर बरस पड़े. उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा थे और भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे. वर्तमान में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर उस समय भारत के विदेश सचिव हुआ करते थे. भारत ने इस घटना के बाद कई निर्णय लिए. भारतीय उच्चायोग में अमेरिकी राजनयिकों की सुरक्षा सुविधाएं कम कर दी गईं. उनके एयरपोर्ट पास वापस ले लिए गए. अमेरिकी राजनयिकों की इम्युनिटी समीक्षा शुरू कर दी. अमेरिकी दूतावास के क्लब और रेस्तरां की टैक्स-फ्री सुविधाएं वापस ले ली गईं. अमेरिकी राजदूत से कड़ी फटकार के साथ जवाब मांगा गया. भारत ने तुरंत कड़ी कार्रवाई की.
भारत में मच गया ता तूफान
फिर दोनों देशों के बीच इस मुद्दे का हल निकाला गया. भारत ने देवयानी को ‘राजनयिक पद’ का कवच दिया. भारत ने देवयानी को तुरंत संयुक्त राष्ट्र मिशन में एक ऐसा पद दिलाया, जिससे उन्हें पूर्ण कूटनीतिक छूट मिल गई. अमेरिका ने फिर उन्हें देश छोड़कर जाने की अनुमति दी. देवयानी भारत लौटीं और मामला शांत तो हुआ, लेकिन दोनों देशों के बीच एक खटास छोड़ गया.
भारत-अमेरिका ने कैसे हल निकाला?
इस विवाद ने दोनों देशों को कूटनीतिक तौर पर हिला दिया. कई महीनों तक राजनीतिक तनाव रहे. दोनों देशों में उच्च स्तरीय मीटिंग्स में रुकावट आई और आपसी सहयोग पर असर लंबे समय तक रहा. लेकिन मामला धीरे-धीरे शांत हुआ. उस समय के अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी द्वारा खेद जताये जाने के बाद भारत के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने सार्वजनिक तौर पर मांग की देवयानी के खिलाफ मामला वापस लिया जाए. कहा जाता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और मनमोहन सिंह के बीच बातचीत के बाद यह मामला सुलझा.
जब यह घटना घटी थी तो बीजेपी के राज्यसभा सांसद अरुण जेटली ने खोबरागड़े के साथ किए गए व्यवहार को अमेरिकी सरकार द्वारा वियना संधि का स्पष्ट उल्लंघन बताया था. टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा था कि अमेरिका को विश्व का मुखिया होने का ढोंग करना बंद कर देना चाहिए. सीताराम येचुरी ने कहा था कि यह घटना किसी भी स्वाभिमानी संप्रभु राष्ट्र द्वारा स्वीकार नहीं की जा सकती. बीएसपी की प्रमुख मायावती ने भी राज्यसभा में खोबरागड़े की जाति को लेकर मनमोहन सरकार को घेरा था. बता दें कि खोबरागड़े दलित समुदाय से आती हैं.जबकि, अमेरिका ने आरोप लगाया ता कि खोबरागड़े ने अपने घर पर काम करने वाले एक भारतीय नागरिक के वीज़ा आवेदन में झूठ बोला, उसे न्यूनतम वेतन से भी कम वेतन देने और उसे हफ्ते में 40 घंटे से ज़्यादा काम करने के लिए मजबूर किया. अमेरिकी पुलिस के द्वाार खोबरागड़े की अपमानजनक गिरफ्तारी और कपड़े उतारकर तलाशी लेने का मामला आज भी इस घटना की कड़वी याद को ताजा करती है.

