Business
oi-Divyansh Rastogi
Adani
Bhagalpur
2,400
MW
Power
Plant:
बिहार
के
भागलपुर
जिले
में
प्रस्तावित
2,400
मेगावाट
के
बिजली
संयंत्र
को
लेकर
राजनीतिक
दलों
के
नेताओं
द्वारा
फैलाई
जा
रही
‘गलत
सूचनाओं’
पर
अडानी
पावर
ने
कड़ी
चिंता
जताई
है।
कंपनी
ने
स्पष्ट
किया
है
कि
यह
प्रोजेक्ट
बिहार
सरकार
की
पारदर्शी
और
प्रतिस्पर्धी
प्रक्रिया
का
हिस्सा
है,
जिसमें
कोई
विशेष
पक्ष
को
रियायत
नहीं
दी
गई।
भूमि
2012
से
ही
राज्य
सरकार
के
अधिग्रहण
में
है,
और
अडानी
पावर
ने
सबसे
कम
टैरिफ
बोली
देकर
इसे
जीता
है।
कंपनी
का
यह
बयान
राजनीतिक
विवादों
के
बीच
आया
है,
जहां
विपक्षी
दल
भूमि
आवंटन
पर
सवाल
उठा
रहे
हैं।

Bhagalpur
2,400
MW
Power
Plant:
14
साल
पुरानी
योजना,
कई
असफल
प्रयास
भागलपुर
के
पीरपैंती
क्षेत्र
में
बिजली
संयंत्र
की
योजना
नई
नहीं
है।
बिहार
राज्य
बिजली
उत्पादन
कंपनी
लिमिटेड
(बीएसपीजीसीएल)
ने
2012
में
ही
2,400
मेगावाट
क्षमता
के
संयंत्र
के
लिए
भूमि
अधिग्रहित
की
थी।
कंपनी
के
अनुसार,
यह
भूमि
राज्य
सरकार
के
पूर्ण
स्वामित्व
में
है
और
अब
नाममात्र
के
पट्टे
पर
(1
रुपये
प्रति
वर्ष)
आवंटित
की
गई
है,
जो
अनुबंध
अवधि
समाप्त
होने
पर
वापस
सरकार
को
मिल
जाएगी।
बिहार
सरकार
ने
पिछले
एक
दशक
में
सार्वजनिक
क्षेत्र
के
उपक्रमों
(पीएसयू)
के
साथ
मिलकर
प्रोजेक्ट
शुरू
करने
के
कई
प्रयास
किए,
लेकिन
ये
सफल
नहीं
हो
सके:-
-
2010:
ऊर्जा
विभाग
की
मंजूरी
के
बाद
केस-II
आधारित
प्रतिस्पर्धी
बोली
प्रक्रिया
शुरू
हुई,
लेकिन
कोयला
लिंकेज
की
कमी
से
रुकी। -
2014:
बीएसपीजीसीएल
और
एनएचपीसीएल
(पूर्व
में
नेशनल
हाइड्रोइलेक्ट्रिक
पावर
कॉर्पोरेशन)
के
संयुक्त
उद्यम
–
पीरपैंती
पावर
बिजली
कंपनी
प्राइवेट
लिमिटेड
का
गठन,
लेकिन
क्रियान्वयन
नहीं
हो
सका। -
हाल
ही
में:
एनटीपीसी,
एनएलसीआईएल
(पूर्व
में
नेवेली
लिग्नाइट
कॉर्पोरेशन)
और
एसजेवीएन
(पूर्व
में
सतलुज
जल
विद्युत
निगम)
जैसे
पीएसयू
से
संपर्क,
लेकिन
कोई
आगे
नहीं
आया।
परिणामस्वरूप,
बिहार
सरकार
ने
प्रतिस्पर्धी
बोली
प्रक्रिया
अपनाई।
निविदा
में
स्पष्ट
शर्त
थी
कि
सफल
बोलीदाता
को
भूमि
नाममात्र
किराए
(1
रुपये)
पर
पट्टे
पर
मिलेगी।
यह
प्रोत्साहन
बिहार
औद्योगिक
निवेश
प्रोत्साहन
नीति
2025
के
तहत
सभी
निवेशकों
के
लिए
उपलब्ध
है
–
न
कि
किसी
विशेष
कंपनी
के
लिए।
अडानी
पावर
ने
इसे
‘शरारतपूर्ण
और
दुर्भावनापूर्ण
आरोप’
बताते
हुए
खारिज
किया।
Competitive
Bidding:
अडानी
ने
सबसे
कम
टैरिफ
पर
जीता
प्रोजेक्ट
चार
योग्य
बोलीदाताओं
(अडानी
पावर,
टॉरेंट
पावर,
जेएसडब्ल्यू
एनर्जी
और
अन्य)
में
से
अडानी
पावर
ने
सबसे
कम
टैरिफ
–
6.075
रुपये
प्रति
किलोवाट
घंटा
(जिसमें
4.165
रुपये
फिक्स्ड
चार्ज,
1.91
रुपये
फ्यूल
चार्ज
और
2
रुपये
फिक्स्ड
शुल्क
शामिल)
–
पर
बोली
लगाई।
यह
दर
मध्य
प्रदेश
के
हालिया
3,200
मेगावाट
प्रोजेक्ट
(4.222-4.298
रुपये
प्रति
यूनिट)
से
भी
प्रतिस्पर्धी
है।
भूमि
प्रोत्साहन
के
कारण
कम
फिक्स्ड
चार्ज
उपभोक्ताओं
को
सस्ती
बिजली
सुनिश्चित
करता
है।
कंपनी
के
अनुसार,
यह
मॉडल
निवेश
को
आसान
बनाता
है
और
राज्य
को
लाभ
पहुंचाता
है।
प्रोजेक्ट
डिजाइन,
बिल्ड,
फाइनेंस,
ओन
एंड
ऑपरेट
(DBFOO)
मॉडल
पर
चलेगा,
जिसमें
कुल
निवेश
लगभग
30,000
करोड़
रुपये
($3
बिलियन)
का
होगा।
| पैरामीटर |
डिटेल पर एक नजर |
|---|---|
| क्षमता |
2,400 मेगावाट (3×800 MW अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल) |
| स्थान |
पीरपैंती, भागलपुर, बिहार |
| टैरिफ |
6.075 रुपये/किलोवाट घंटा (सबसे कम बोली) |
| निवेश |
30,000 करोड़ रुपये |
| समयसीमा |
60 महीने में कमीशनिंग (पहला यूनिट 48 महीने में) |
|
बिजली आपूर्ति |
2,274 MW नेट क्षमता बिहार यूटिलिटीज (NBPDCL & SBPDCL) को |
|
कोयला लिंकेज |
भारत सरकार की शक्ति पॉलिसी के तहत |
राजनीतिक
आरोपों
पर
पलटवार:
‘पारदर्शी
प्रक्रिया,
कोई
विशेष
रियायत
नहीं’
अडानी
पावर
ने
बयान
में
कहा,
‘राजनीतिक
दलों
द्वारा
लगातार
फैलाई
जा
रही
गलत
सूचनाओं
पर
चिंता
है।
शायद
उन्हें
बिहार
सरकार
की
पारदर्शी
प्रक्रिया
की
जानकारी
नहीं।
भूमि
अडानी
को
‘सौंप
दी
गई’
का
दावा
पूरी
तरह
गलत
है।’
कंपनी
ने
जोर
दिया
कि
यह
प्रोत्साहन
सभी
बोलीदाताओं
के
लिए
था
और
अंतिम
स्वामित्व
राज्य
के
पास
ही
रहेगा।
बिहार
सरकार
के
अधिकारियों
ने
भी
पुष्टि
की
कि
भूमि
10
साल
से
अधिग्रहित
है
और
पट्टा
नीति
के
तहत
दिया
गया।
यह
प्रोजेक्ट
राज्य
की
बिजली
मांग
(2034-35
तक
17,000
MW
से
दोगुनी)
को
पूरा
करने
के
लिए
महत्वपूर्ण
है।
आर्थिक
और
सामाजिक
लाभ:
रोजगार
और
औद्योगीकरण
को
बढ़ावा
प्रोजेक्ट
से
निर्माण
चरण
में
10,000-12,000
और
संचालन
में
3,000
प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष
रोजगार
सृजित
होंगे।
अडानी
पावर
ने
कहा,
‘यह
बिहार
में
औद्योगीकरण
और
रोजगार
चक्र
को
पुनर्जीवित
करेगा।
हम
विश्वसनीय
और
प्रतिस्पर्धी
मूल्य
पर
बिजली
आपूर्ति
के
लिए
प्रतिबद्ध
हैं।’
अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल
तकनीक
से
कम
उत्सर्जन
और
उच्च
दक्षता
सुनिश्चित
होगी।
25
साल
के
पावर
सप्लाई
एग्रीमेंट
(PSA)
के
तहत
बिजली
सीधे
बिहार
स्टेट
पावर
जेनरेशन
कंपनी
(BSPGCL)
को
मिलेगी।
कंपनी
का
मानना
है
कि
यह
निवेश
बिहार
की
अर्थव्यवस्था
को
मजबूत
करेगा,
खासकर
जब
राज्य
34
मिलियन
श्रमिकों
का
योगदानकर्ता
है।
कमीशनिंग
और
निगरानी
प्रोजेक्ट
अगस्त
2025
में
लेटर
ऑफ
अवार्ड
(LoA)
मिलने
के
बाद
आगे
बढ़
रहा
है।
निर्माण
जल्द
शुरू
होगा,
और
पहला
यूनिट
48
महीनों
में
चालू
होने
की
उम्मीद।
बिहार
सरकार
और
अडानी
पावर
पर्यावरण
एवं
सुरक्षा
मानकों
का
पालन
सुनिश्चित
करेंगे।
राजनीतिक
विवादों
के
बीच
यह
प्रोजेक्ट
बिहार
के
ऊर्जा
क्षेत्र
के
लिए
बड़ा
कदम
माना
जा
रहा
है।
विशेषज्ञों
का
कहना
है
कि
ऐसी
परियोजनाएं
राज्य
में
निवेश
आकर्षित
करेंगी,
लेकिन
पारदर्शिता
बनाए
रखना
जरूरी।
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