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Bank New Rule : बैंकों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए जल्न्द ही नियमों में बदलाव हो सकता है. वित्तमंत्री ने बैंकों से कहा है कि वे अपनी हर शाखा में ऐसे कर्मचारियों की भर्ती जरूर करें, जो स्थानीय भाषा जानकार हों.
बैंकों में नियुक्ति को लेकर नियमों में बदलाव हो सकता है. नई दिल्ली. सरकारी बैंकों में काम करने वालों के लिए जल्द ही नियमों में बड़ा बदलाव होने वाला है. केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बारे में बैंकों को साफ निर्देश भी दे दिया है. केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को सरकारी बैंकों से अपील की है कि उनकी शाखा में काम करने वाले कर्मचारियों को लोकल भाषा की जानकारी होना जरूरी है. साथ ही उन्होंने बैंकों से कहा है कि ग्राहकों को क्रेडिट स्कोर से जुड़ी जानकारियां कम होने की वजह से क्रेडिट ब्यूरो पर उनकी निर्भरता बढ़ गई है, जिससे ग्राहकों को कर्ज मिलने में परेशानी होती है.
दरअसल, बैंक अधिकारियों के स्थानीय भाषा न बोलने के कारण राजनीतिक दलों के गुस्से का सामना करने के कई मामले सामने आए हैं. इस पर केंद्रीय मंत्री ने भर्ती और मानव संसाधन नीतियों में बदलाव की बात कही है, ताकि स्थानीय भाषा बोलने वालों की भर्ती हो और उन्हें बेहतर मूल्यांकन मिले. उन्होंने कहा कि बैंक हर शाखा में इस तरह कर्मचारियों की तैनाती करें कि उनमें से कुछ कर्मचारी अपने ग्राहक को समझ सकें और स्थानीय भाषा बोल सकें. कम से कम शाखा स्तर के कर्मचारी ही स्थानीय भाषा बोलने वाले जरूर हों.
लोकल भाषा वालों को तरजीह
एसबीआई के एक कार्यक्रम में वित्तमंत्री ने कहा कि मैं कर्मचारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करते समय को स्थानीय भाषा को भी आधार बनाने की सिफारिश करूंगी, ताकि ऐसे कर्मचारियों को ज्यादा तरजीह मिल सके. उन्होंने कहा कि वे इस बात का बचाव नहीं कर सकती हैं कि विभिन्न भाषाओं के जानने वालों की तैनाती दूसरी जगहों पर न की जाए, लेकिन हर बैंक शाखा में कुछ ऐसे कर्मचारी जरूर होने चाहिए, जिन्हें स्थानीय भाषा की जानकारी हो.
लोकल ग्राहक ही बैंक के लिए सबसे जरूरी
वित्तमंत्री ने याद दिलाया कि एक स्थानीय ग्राहक बैंक के व्यवसाय को चलाने के लिए बहुत जरूरी है और ग्राहकों से जुड़ाव बैंकों के विकास के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है. तकनीकी इनपुट्स के साथ व्यक्तिगत जुड़ाव इस सेक्टर की विशेषता रही है. इसकी कमी के कारण बैंक शाखा स्थानीय ग्राहक को नहीं समझ पाती और कारोबार पर भी असर पड़ता है. पहले बैंक अधिकारी जानते थे कि कौन क्रेडिट योग्य है और कौन विश्वसनीय है. अब सिर्फ तकनीक के आधार पर ही इसका मूल्यांकन होता है, जो सही नहीं है.
कर्ज मिलने में आ रही दिक्कत
सीतारमण ने कहा कि आज बैंक लोगों के मूल्यांकन के लिए बाहरी क्रेडिट कंपनियों पर निर्भर करते हैं, जो अपने रिकॉर्ड अपडेट करने में समय लेते हैं, जिससे ऋण मिलने में समस्याएं होती हैं. उन्होंने दो ऐसे मामलों के बारे में सुना जहां लोग औपचारिक वित्त के बजाय साहूकारों से ऋण लेने की बात कर रहे थे. बैंक उधारकर्ता पर यह जिम्मेदारी नहीं डाल सकते कि वह दस्तावेजों को साबित करने और प्रदान करने में जीवन भर लगा रहे. अगर ये छोटी चीजें ठीक कर दी जाएं, तो आप देश में सबसे प्रशंसित संस्थान बन जाएंगे.
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि… और पढ़ें

