India
pti-Divyansh Rastogi
Jayshankar
Criticizes
Pakistan:
विदेश
मंत्री
एस.
जयशंकर
ने
संयुक्त
राष्ट्र
(UN)
की
80वीं
वर्षगांठ
पर
पाकिस्तान
को
आड़े
हाथों
लिया।
उन्होंने
पहलगाम
आतंकी
हमले
की
जिम्मेदारी
लेने
वाले
आतंकवादी
संगठन
को
बचाने
की
कोशिशों
पर
निशाना
साधते
हुए
कहा,
‘आतंकवाद
के
पीड़ितों
और
अपराधियों
को
एक
बराबर
नहीं
माना
जा
सकता।’
जयशंकर
ने
UN
सुरक्षा
परिषद
की
कार्यप्रणाली
को
‘अवरुद्ध’
बताया
और
तत्काल
सुधार
की
मांग
की।
उनका
इशारा
पाकिस्तान
की
ओर
था,
जो
लश्कर-ए-तैयबा
(LeT)
से
जुड़े
द
रेजिस्टेंस
फ्रंट
(TRF)
को
UNSC
की
निंदा
से
बचाने
की
कोशिश
कर
चुका
है।
आइए,
जानते
हैं
जयशंकर
के
बयान,
UN
की
खामियों,
और
भारत
की
स्थिति
का
पूरा
ब्योरा…

पहलगाम
हमला
और
पाकिस्तान
का
बचाव
जयशंकर
ने
UN
में
कहा,
‘जब
सुरक्षा
परिषद
का
सदस्य
देश
पहलगाम
जैसे
क्रूर
आतंकी
हमले
की
जिम्मेदारी
लेने
वाले
संगठन
का
खुलेआम
बचाव
करता
है,
तो
बहुपक्षवाद
की
विश्वसनीयता
पर
सवाल
उठता
है।’
जुलाई
2025
में
TRF
ने
पहलगाम
हमले
की
जिम्मेदारी
ली
थी।
UNSC
की
एक
रिपोर्ट
में
TRF
का
जिक्र
था,
लेकिन
पाकिस्तान
ने
प्रेस
बयान
से
इसका
नाम
हटाने
की
कोशिश
की।
जयशंकर
ने
बिना
नाम
लिए
पाकिस्तान
पर
निशाना
साधा,
जो
वर्तमान
में
UNSC
का
अस्थायी
सदस्य
है।
-
UNSC
की
संरचना:
15
सदस्य
(5
स्थायी:
चीन,
अमेरिका,
रूस,
UK,
फ्रांस;
10
अस्थायी)।
पाकिस्तान
2025
में
सदस्य,
जुलाई
में
अध्यक्ष
रहा। -
आतंकियों
को
बचाने
का
आरोप:
जयशंकर
ने
कहा,
‘स्वयंभू
आतंकियों
को
प्रतिबंध
प्रक्रिया
से
बचाया
जाता
है।
यह
ईमानदारी
पर
सवाल
उठाता
है।’
इशारा
चीन
की
ओर
था,
जो
LeT
और
Jaish-e-Mohammed
के
आतंकियों
को
UNSC
में
बचाता
रहा
है।
UN
की
खामियां:
‘अवरुद्ध
और
ध्रुवीकृत’
जयशंकर
ने
UN
को
आड़े
हाथों
लिया।
उन्होंने
कहा:
-
अवरुद्ध
कार्यप्रणाली:
‘UN
की
बहसें
ध्रुवीकृत
हो
गई
हैं।
इसका
कामकाज
अवरुद्ध
है।’ -
सुधारों
पर
अड़चन:
‘सार्थक
सुधार
प्रक्रिया
को
बाधित
किया
जाता
है।’ -
आतंकवाद
पर
नरमी:
आतंकियों
को
बचाने
और
पीड़ितों-अपराधियों
को
बराबर
मानने
की
प्रवृत्ति
UN
की
विश्वसनीयता
को
कमजोर
करती
है। -
UN
का
समर्थन:
‘भारत
हमेशा
UN
और
बहुपक्षवाद
का
समर्थक
रहा
है।’ -
शांति
स्थापना:
भारत
UN
पीसकीपिंग
मिशन्स
में
बड़ा
योगदान
देता
है। -
सुधार
की
मांग:
UNSC
में
स्थायी
सीट
और
सुधारों
की
जरूरत।
उन्होंने
कहा,
‘शांति
और
सुरक्षा
का
वादा
दिखावटी
हो
गया
है।
सतत
विकास
लक्ष्य
(SDG)
2030
की
धीमी
प्रगति
वैश्विक
दक्षिण
के
संकट
को
दिखाती
है।’
भारत
की
प्रतिबद्धता:
शांति
और
सुधार
जयशंकर
ने
भारत
की
स्थिति
दोहराई:
जयशंकर
ने
UN
की
80वीं
वर्षगांठ
पर
स्मारक
डाक
टिकट
भी
जारी
किया।
जयशंकर
का
बयान
UN
की
खामियों
और
आतंकवाद
पर
दोहरे
रवैये
को
उजागर
करता
है।
भारत
का
सुधारों
का
आह्वान
वैश्विक
मंच
पर
गूंज
रहा
है।
क्या
UN
बदलेगा?
समय
बताएगा।
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