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Indubhushan Haldar Case: ईडी ने कोलकाता में इंदुभूषण हलदार उर्फ दुल्लाल को आज़ाद हुसैन के फर्जी पासपोर्ट मामले में गिरफ्तार किया. दोनों 250 मामलों में शामिल रहे. जांच व कानूनी कार्रवाई जारी है.
ईडी ने आज़ाद हुसैन के खिलाफ इसी साल जून में मामला दर्ज किया था. (फाइल फोटो)कोलकाता. प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कोलकाता जोनल कार्यालय ने 13 अक्टूबर को इंदुभूषण हलदार उर्फ दुल्लाल को गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी पाकिस्तानी नागरिक आज़ाद हुसैन उर्फ अजाद मालिक उर्फ अहमद हुसैन आज़ाद के मामले में की गई. आरोपी को कोलकाता स्थित विशेष न्यायालय (बिचार भवन) में पेश किया गया, जहां से ईडी को आगे की जांच के लिए 5 दिन की हिरासत दी गई. ईडी ने यह जांच पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14 और 14A के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी.
जांच में खुलासा हुआ कि पाकिस्तानी नागरिक आज़ाद हुसैन, भारत में अजाद मालिक (पिता – मोना मालिक) के नाम से फर्जी पहचान के साथ रह रहा था. वह बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों के लिए भारतीय पहचान पत्र और दस्तावेज धन के बदले बनवाने में शामिल था. आज़ाद हुसैन को 15.04.2025 को गिरफ्तार किया गया था और वह इस समय न्यायिक हिरासत में है.
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि आज़ाद हुसैन उर्फ अजाद मालिक उर्फ अहमद हुसैन आज़ाद बांग्लादेशी नागरिकों को, जो भारतीय पासपोर्ट बनवाना चाहते थे, इंदुभूषण हलदार उर्फ दुल्लाल (निवासी – चकदह, नदिया) के पास भेजता था. दुल्लाल इन बांग्लादेशी नागरिकों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर भारतीय पासपोर्ट जारी करवाने में मुख्य भूमिका निभाता था.
इंदुभूषण हलदार इन फर्जी पासपोर्ट आवेदनों से गैरकानूनी रूप से कमाई (Proceeds of Crime) कर रहा था. अब तक की जांच में यह सामने आया है कि वह और आज़ाद मालिक मिलकर लगभग 250 मामलों में फर्जी पासपोर्ट जारी कराने में शामिल रहे हैं. इससे पहले, इंदुभूषण हलदार की अग्रिम जमानत याचिका कोलकाता के विशेष पीएमएलए अदालत और कलकत्ता हाईकोर्ट दोनों ने खारिज कर दी थी.
इसके अलावा, ईडी ने 13.06.2025 को आज़ाद हुसैन उर्फ अजाद मालिक उर्फ अहमद हुसैन आज़ाद (जो भारत में भारतीय नागरिक की फर्जी पहचान के साथ रह रहा पाकिस्तानी नागरिक है) के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) की धारा 44 व 45 के तहत प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अभियोजन शिकायत) दाखिल की थी. इस शिकायत पर 19.06.2025 को कोलकाता सिटी सेशन कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने संज्ञान लिया. मामले की आगे की जांच जारी है.

