America: अमेरिका में 30 साल से ज्यादा वक्त गुजारने वाली 73 वर्षीय हरजीत कौर को जिस तरह से अचानक हिरासत में लेकर निर्वासित किया गया, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. मेहनत से जिंदगी गुजारने वाली, टैक्स चुकाने वाली और कभी भी इमिग्रेशन चेक डेट मिस न करने वाली यह दादी मां अब भारत लौट आई हैं, लेकिन उनके दिल में गहरा दर्द और आंसुओं भरी यादें हैं.
टाइम्स ऑफ इंंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब के तरनतारन जिले के पंगोटा गांव की रहने वाली हरजीत कौर अपने दो बेटों के साथ करीब 33 साल पहले अमेरिका गई थीं. बता दें कि उनके पति सुखविंदर सिंह का देहांत हो चुका है. वह कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को बे एरिया में रहते हुए बर्कले स्थित एक कपड़ों की दुकान पर काम किया करती थीं. इस साल जनवरी तक भी वह वहां काम करती रहीं, लेकिन घुटनों की सर्जरी की वजह से उन्हें अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी.
हिरासत और निर्वासन की प्रक्रिया
वहीं, 8 सितंबर को नियमित इमिग्रेशन चेक-इन के दौरान हरजीत कौर को हिरासत में ले लिया गया. उनके असाइलम आवेदन पहले ही खारिज किए जा चुके थे. इसके बाद उन्हें मेसा वर्दे इमिग्रेशन प्रोसेसिंग सेंटर, बेकरसफील्ड ले जाया गया. वहीं से उन्हें बिना किसी सूचना और उनके परिवार व वकील को बिना बताए अचानक निर्वासित कर दिया गया.
हिरासत में हुई बदतर हालात
हरजीत कौर ने बताया कि हिरासत में रहते हुए उन्हें न दवा समय पर मिली और न ही सही खाना. वकील दीपक आहलूवालिया के अनुसार, उन्हें कई बार सिर्फ चीज सैंडविच या बर्फ की प्लेट दी गई, ताकि वह अपनी दवा खा सकें. लेकिन दांत नकली होने की वजह से वह बर्फ नहीं खा सकीं. जब उन्होंने शिकायत की तो गार्ड ने कहा, “ये तुम्हारी गलती है.” उन्हें पूरे समय न तो बिस्तर मिला और न ही शॉवर लेने की इजाजत. सिर्फ गीले वाइप्स दिए गए कि खुद को पोंछ लें.
अब बहन के घर पर रह रहीं
हरजीत कौर को जॉर्जिया से आर्मेनिया होते हुए 132 अन्य लोगों के साथ भारत भेजा गया. इनमें से ज्यादातर पंजाब के लोग थे. हालांकि, उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें हथकड़ी और बेड़ियां नहीं लगाई गईं. जब हरजीत कौर दिल्ली पहुंचीं, तो वह अपनी बहन के मोहाली स्थित घर चली गईं.
परिवार और वकील की नाराजगी
कौर के भाई कुलवंत सिंह ने कहा कि परिवार ने खुद उनके लिए ट्रैवल डॉक्यूमेंट तैयार किए थे और अनुरोध किया था कि उन्हें कमर्शियल फ्लाइट से भेजने का मौका दिया जाए. लेकिन इमिग्रेशन अधिकारियों ने अचानक कार्रवाई की और उन्हें हाथकड़ियों के साथ लॉस एंजेलिस ले जाया गया. वकील आहलूवालिया ने कहा कि जिस तरह से एक 73 साल की महिला, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, उनके साथ व्यवहार किया गया, उस पर अलग से शिकायत दर्ज कराई जाएगी.
इस तरह से निर्वासित होना मौत से भी बुरा…
हरजीत कौर ने कहा, “मैं अपने घर तक नहीं जा सकी, अपनी चीजें भी समेट नहीं पाई. जो कुछ था, वहीं का वहीं रह गया. इस तरह से निर्वासित होना मौत से भी बुरा है.” अब वे बीमार और कमजोर महसूस कर रही हैं और मोहाली में अपनी बहन के साथ रह रही हैं. उन्होंने उन लोगों के लिए भी सहानुभूति जताई जो उनके साथ निर्वासित हुए, क्योंकि कई ने अमेरिका जाने के लिए अपनी जमीन तक बेच दी थी और अब खाली हाथ लौटे हैं.

