जस्टिस सी. हरिशंकर और ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने मौखिक रूप से कहा कि यह सामान्य अपमान का मामला है और पतंजलि द्वारा दिए गए बयान स्पष्ट रूप से प्रतिवादी डाबर का संदर्भ देते हैं. अदालत ने पतंजलि को चेतावनी दी कि अगर उसे यह एक लग्जरी केस और एक बेकार अपील लगती है, तो वह उस पर जुर्माना लगाएगी.
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
जिनको आयुर्वेद या वेदों का ज्ञान नहीं… हाईकोर्ट
हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि सिंगल बेंच के जस्टिस ने विज्ञापन को अपमानजनक माना है और यह एक अंतरिम आदेश है और कोई कारण नहीं है कि खंडपीठ इस संबंध में विवेकाधीन आदेश पर विचार करे. कोर्ट ने कहा कि ये स्पष्ट रूप से अपमानजनक सामग्री हैं. बेंच ने आगे कहा कि जिनको आयुर्वेद या वेदों का ज्ञान नहीं, चरक, सुश्रुत, धन्वंतरि और च्यवनऋषि की परंपरा के अनुरूप, असली च्यवनप्राश कैसे बना पाएंगे. कोर्ट ने कहा, तो आपने च्यवनप्राश बनाने वाले बाकी सभी लोगों को यह कहकर बदनाम कर दिया है कि उन्हें नहीं पता कि च्यवनप्राश क्या है और कैसे बनता है? वे च्यवनप्राश कैसे बनाएंगे. यह एक सामान्य अपमान का मामला है. अंतरिम आदेश पूरी तरह से विवेकाधीन है. हमें इस अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए? हमें बताएं.
हाईकोर्ट ने क्यों कहा, तो हम जुर्माना लगाएंगे
पतंजलि के वकील ने जब कोर्ट से मांगा समय
पतंजलि के वकील ने अदालत से अपने मुवक्किलों के साथ बैठकर मामले पर चर्चा करने के लिए कुछ समय देने का आग्रह किया, जिसके बाद अदालत ने अपील की अगली सुनवाई 23 सितंबर के लिए निर्धारित कर दी. 3 जुलाई को सिंगल बेंच ने पतंजलि को डाबर च्यवनप्राश के खिलाफ अपमानजनक विज्ञापन चलाने से रोक दिया था और कहा था कि टीवी और प्रिंट विज्ञापनों में पहली नजर में अपमानजनक टिप्पणी का एक मजबूत मामला सामने आया है.
क्या था विज्ञापन में….?
डाबर ने लगाया था क्या आरोप?
डाबर द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि ‘पतंजलि स्पेशल च्यवनप्राश’ ‘विशेष रूप से डाबर च्यवनप्राश’ और सामान्य रूप से च्यवनप्राश का अपमान कर रहा है. यह दावा करके कि किसी अन्य निर्माता को च्यवनप्राश बनाने का ज्ञान नहीं है – जो सामान्य अपमान है. याचिका में दावा किया गया है कि इसके अलावा, विज्ञापनों में (एक आयुर्वेदिक दवा/औषधि के संबंध में) झूठे और भ्रामक बयान दिए गए हैं, जो डाबर च्यवनप्राश की तुलना में अपमानजनक हैं. याचिका में आगे दावा किया गया है कि विज्ञापन में अन्य सभी च्यवनप्राश के संबंध में ‘साधारण’ उपसर्ग का प्रयोग किया गया है, जो दर्शाता है कि वे ‘निम्न’ हैं. विज्ञापन में यह भी ‘गलत’ दावा किया गया है कि अन्य सभी निर्माताओं को आयुर्वेदिक ग्रंथों और च्यवनप्राश तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फ़ार्मुलों का कोई ज्ञान नहीं है.
