International
oi-Bhavna Pandey
अमेरिका
ने
ईरान
के
चाबहार
बंदरगाह
को
लेकर
भारत
को
एक
और
झटका
दिया
है,
जिससे
क्षेत्र
में
तनाव
बढ़ने
की
आशंका
है।
अमेरिका
ने
चाबहार
बंदरगाह
पर
दी
जा
रही
है।
यह
फैसला
29
सितंबर
2025
से
लागू
होगा,
जिसका
सीधा
असर
भारत
की
रणनीतिक
और
आर्थिक
योजनाओं
पर
पड़
सकता
है।
चाबहार
बंदरगाह
ईरान
के
सिस्तान-बलूचिस्तान
प्रांत
में
ओमान
की
खाड़ी
पर
स्थित
है।
भारत
और
ईरान
इसे
व्यापार
तथा
संपर्क
बढ़ाने
के
लिए
मिलकर
विकसित
कर
रहे
हैं।
यह
बंदरगाह
भारत,
ईरान,
अफगानिस्तान
और
मध्य
एशियाई
देशों
के
लिए
एक
महत्वपूर्ण
व्यापारिक
प्रवेश
द्वार
के
रूप
में
कार्य
करता
है।

भारत
ने
2024
में
ईरान
के
साथ
चाबहार
पोर्ट
के
प्रबंधन
के
लिए
10
साल
का
समझौता
किया
था।
यह
अनुबंध
सरकारी
स्वामित्व
वाली
इंडिया
पोर्ट्स
ग्लोबल
लिमिटेड
(IPGL)
और
ईरान
के
पोर्ट्स
एंड
मैरीटाइम
ऑर्गनाइजेशन
के
बीच
संपन्न
हुआ।
इस
पहल
से
भारत
को
मध्य
एशिया
के
साथ
व्यापार
बढ़ाने
का
मार्ग
मिला
था।
यह
पहला
अवसर
था
जब
भारत
ने
किसी
विदेशी
बंदरगाह
का
प्रबंधन
संभाला।
भारत
इस
बंदरगाह
को
इंटरनेशनल
नॉर्थ-साउथ
ट्रांसपोर्ट
कॉरिडोर
का
हिस्सा
मानकर
विकसित
कर
रहा
है,
जो
रूस
और
यूरोप
को
मध्य
एशिया
से
जोड़ने
वाली
एक
महत्वपूर्ण
परियोजना
है।
यह
बंदरगाह
सामरिक
दृष्टि
से
भी
भारत
के
लिए
अहम
है,
क्योंकि
यह
पाकिस्तान
के
ग्वादर
बंदरगाह
के
करीब
स्थित
है।
अमेरिकी
विदेश
विभाग
के
प्रमुख
उप
प्रवक्ता
थॉमस
पिगॉट
ने
बताया,
“विदेश
मंत्री
ने
2018
में
अफगानिस्तान
के
पुनर्निर्माण
और
आर्थिक
विकास
के
लिए
दी
गई
प्रतिबंध
छूट
को
वापस
ले
लिया
है।
ये
प्रतिबंध
29
सितंबर
से
प्रभावी
होंगे।
इसके
बाद
चाबहार
बंदरगाह
का
संचालन
करने
वाले
या
संबंधित
गतिविधियों
में
शामिल
लोग
प्रतिबंधों
के
दायरे
में
आ
सकते
हैं।”
भारत
2003
से
ही
इस
परियोजना
पर
काम
करने
का
प्रस्ताव
दे
रहा
था,
ताकि
पाकिस्तान
को
दरकिनार
करते
हुए
अफगानिस्तान
और
मध्य
एशिया
तक
पहुंच
बनाई
जा
सके।
हालांकि,
ईरान
के
परमाणु
कार्यक्रम
पर
अमेरिकी
प्रतिबंधों
के
कारण
इस
बंदरगाह
का
विकास
धीमी
गति
से
हुआ।
अमेरिका
ने
2018
में
चाबहार
बंदरगाह
परियोजना
को
प्रतिबंधों
से
छूट
दी
थी।
उस
समय
यह
तर्क
दिया
गया
था
कि
अफगानिस्तान
को
गैर-प्रतिबंधित
वस्तुओं
की
आपूर्ति
और
पेट्रोलियम
उत्पादों
के
आयात
के
लिए
यह
छूट
आवश्यक
है।
अब
नई
नीति
के
तहत
यह
छूट
समाप्त
हो
जाएगी।
भारत
ने
इस
बंदरगाह
का
उपयोग
2023
में
अफगानिस्तान
को
20,000
टन
गेहूं
भेजने
और
2021
में
ईरान
को
कीटनाशक
दवाओं
की
आपूर्ति
के
लिए
किया
था।
इस
नए
अमेरिकी
फैसले
से
भारत
की
क्षेत्रीय
रणनीति
और
व्यापारिक
संबंध
प्रभावित
हो
सकते
हैं।
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