Cow’s Milk: गाय का दूध बहुत पौष्टिक होता है. भारतीय शास्त्रों में इसकी तुलना अमृत या र्स्वण तत्व से भी की गई है. यहां तक कि जितना फायदेमंद बच्चे के लिए मां का दूध होता है, उतना ही फायदेमंद हर इंसान के लिए गाय का दूध बताया गया है. आयुर्वेद में इसे कई समस्याओं के लिए औषधि भी माना गया है. हालांकि गाय के दूध के इतने चमत्कारिक फायदे होने के बावजूद ऐसी कई चीजें हैं जो विभिन्न प्रकार की गायों के दूध में अंतर पैदा करती हैं. आयुर्वेद के अनुसार गाय की नस्ल, उसके कद, उसके खानपान और रंग के आधार पर भी गायों के दूध में भिन्नता होती है.
हम जब भी दूध लेने जाते हैं तो आमतौर पर हमें सफेद, काली, लाल, पीली या चितकबरी गाय देखने को मिलती हैं. इसके अलावा इनकी नस्लें भी अलग-अलग होती हैं, जैसे देसी, जर्सी या फिर दोगली गाय. गायों का दूध सबसे हेल्दी होता है इसकी पुष्टि तो कई वैज्ञानिक शोधों में भी हो गई है लेकिन क्या आपको मालूम है कि इनमें से किस रंग की गाय का दूध सबसे हेल्दी होता है? या फिर छोटे कद की गाय या बड़े कद की गाय, किसके दूध में ज्यादा पोषण तत्व होते हैं? आइए आयुर्वेदाचार्य से जानते हैं..
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राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के सदस्य और जाने-माने आयुर्वेदाचार्य वैद्य अच्युत त्रिपाठी बताते हैं कि गाय का दूध आयुर्वेद में सर्वोत्तम आहार है. यह शरीर में खून की कमी, वात, पित्त और कफ आदि विकारों को मिटाने वाला और टीबी आदि रोगों में सबसे अच्छे पथ्य का काम करता है. गाय का दूध शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाला होता है, अगर नियमित रूप से इसका सेवन किया जाए तो शरीर में आने वाले रोगों से रक्षा होती है. यह शरीर के बल और मस्तिष्क को पोषण देने का काम करता है.
वैद्य त्रिपाठी कहते हैं कि गाय की सबसे खास बात है कि इसका दूध सभी दोषों और विकारों को नष्ट तो करता ही है लेकिन कई बार चारे के भ्रम में गाय अगर कोई विषैला पदार्थ खा जाती है तो सबसे अच्छी बात है कि उसका प्रभाव गाय के दूध में नहीं आता है. कई रिसर्च बताती हैं कि आय के शरीर में सामान्य विषों को पचाने की अद्भुत क्षमता है. जबकि दूध देने वाले अन्य जानवरों के साथ ऐसा नहीं है.
कौन से रंग की गाय का दूध है सबसे हेल्दी?
त्रिपाठी कहते हैं कि आयुर्वेद के सबसे विश्वसनीय शास्त्र चरक संहिता में सूत्र स्थान के 27 वें अध्याय में गाय के दूध का वर्णन मिलता है. इस अध्याय में गाय के दूध के गुण और अवगुण दोनों ही बताए गए हैं. इसी में बताया गया है कि गाय का दूध सभी दूधों में सर्वश्रेष्ठ होता है, यहां तक कि यह मां के दूध के समान ही होता है. जहां तक किस रंग की गाय का दूध सबसे अच्छा होता है तो शास्त्र कहता है कि गायों का रंग देश काल और परिस्थिति के अनुसार होता है. यह उनकी नस्लों के आधार पर भी तय होता है. हालांकि किस रंग की गाय का दूध सर्वश्रेष्ठ होता है ऐसा कोई शास्त्रीय प्रमाण नहीं है लेकिन संतानोत्पत्ति की इच्छा रखने वालों के लिए देसी काली गाय, जिसका बछड़ा भी काला है, उसका दूध पीना फायदेमंद बताया जाता है. कहा जाता है कि ऐसी गाय का दूध पीने से संतान बलिष्ठ होती है और यह शनि व राहु दोषों को खत्म करता है.
वे कहते हैं, चरक संहिता बताती है कि पर्वतांचलीय गाय, यानि पहाड़ी इलाकों जैसे उत्तराखंड, हिमाचल आदि जगहों पर पायी जाने वाली छोटे कद की गायों का दूध सर्वश्रेष्ठ, सबसे हेल्दी और औषधीय गुणों वाला होता है. शास्त्र कहता है कि ये गायें पहाड़ों पर मौजूद वनस्पतियां और औषधियों का सेवन करती हैं, साथ ही ये जिस वातावरण में रहती हैं वह बहुत शुद्ध होता है, ऐसे में इनका दूध भी इन औषधीय गुणों से भरपूर हो जाता है.
हालांकि कुछ विशेषज्ञों द्वारा लाल या चितकबरी गाय का दूध वात का नाश करने वाला, काली गाय का दूध वातनाशक और ज्यादा गुणकारी, सफेद गाय का दूध शीतल और भारी, पीली गाय का दूध पित्त और वात को खत्म करने वाला और बाखरी गाय का दूध तीनों दोषों को नाश करने वाला, तृप्तिकारक और बल देने वाला भी बताया जाता है, लेकिन इसका वर्णन संहिता में नहीं है.