भारत में नागरिकता प्रमाणित करने वाले दस्तावेज़
भारत में नागरिकता को साबित करने का कोई एक प्रमाण पत्र नहीं है. लेकिन कुछ दस्तावेज ऐसे जरूर हैं, जो विशेष परिस्थितियों में आपकी नागरिकता के लिए एक प्रमाण के रूप में स्वीकार किये जाते हैं.
1. भारतीय पासपोर्ट
2. नेशनलिटी सर्टिफिकेट
– जब किसी व्यक्ति को सरकारी नौकरी, शैक्षणिक संस्थान (विशेष कोटे) में दाखिले या किसी कानूनी प्रक्रिया में अपनी नागरिकता प्रमाणित करनी होती है, और उसके पास पासपोर्ट या नेचुरलाइजेशन सर्टिफिकेट जैसा अन्य प्रमाण न हो.
– या फिर भारत में जन्मे लेकिन विदेशी माता-पिता वाले व्यक्ति के मामले में नागरिकता सिद्ध करने के लिए.
इसके लिए आवेदन पत्र के साथ जो दस्तावेज़ मांगे जाते हैं, वो ये हैं
– बर्थ सर्टिफिकेट
– माता-पिता की नागरिकता प्रमाण (पासपोर्ट/मतदाता पहचान पत्र)
– स्कूल प्रमाणपत्र
– निवास प्रमाण (राशन कार्ड/आधार/मतदाता पहचान पत्र)
3. नेचुरलाइजेशन सर्टिफिकेट/रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट
4. बर्थ सर्टिफिकेट
ये आंशिक तौर पर भारतीय नागरिकता को साबित करता है. ये सर्टिफिकेट जन्मतिथि व जन्मस्थान बताता है. लेकिन इससे नागरिकता तभी साबित होती है जबकि माता-पिता की नागरिकता भारतीय हो और वो नागरिकता अधिनियम की शर्तें पूरी करते हों.
इनसे नागरिकता साबित नहीं होती
2. मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) – ये कार्ड भी भारतीय नागरिकता को साबित नहीं करता. ये केवल वोट डालने का अधिकार देता है.
3. ड्राइविंग लाइसेंस – ये केवल ड्राइविंग अधिकार का प्रमाण है ना कि भारतीय नागरिकता का
क्या होता है भारतीय नागरिकता का आधार
भारतीय नागरिकता का निर्धारण भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 और उसके संशोधनों के तहत होता है. जिसका आधार ये चीजें हैं
– जन्म से
– वंशानुक्रम से
– पंजीकरण द्वारा
– प्राकृतिककरण द्वारा यानि नेचुरलाइजेशन, जिसे गृह मंत्रालय जारी करता है
– भारत के किसी क्षेत्र के भारत में शामिल होने से
भारत में नागरिकता को लेकर क्यों विवाद बढ़ा
भारत जैसे देश में जहां करोड़ों लोग गरीब और अशिक्षित हैं. गांवों में बड़ी आबादी रहती है. वहां लोगों के पास न तो जन्म प्रमाण पत्र है, न पासपोर्ट – वहां नागरिकता साबित करना मुश्किल है. 70-80 के दशक में कई लोगों का कोई लिखित रिकॉर्ड ही नहीं था. इसलिए सरकार के किसी भी नागरिकता सत्यापन अभियान पर लोगों में डर पैदा हुआ.
भारत में नागरिकता को लेकर विवाद क्यों बढ़ा?
भारत में नागरिकता अधिनियम 1955 के बाद से अब तक कई संशोधन हुए हैं (1986, 2003, 2005, 2015, 2019). हर संशोधन में कुछ शर्तें और परिभाषाएं बदली गईं.
– 1987 तक भारत में जन्म लेने वाला हर बच्चा भारतीय नागरिक था.
– 1987 के बाद ये जरूरी हो गया कि कम से कम एक माता-पिता भारतीय नागरिक हो.
– 2004 के बाद दोनों माता-पिता का वैध भारतीय नागरिक या कानूनी प्रवासी होना जरूरी कर दिया गया.
– इससे पुराने-नए नागरिकों की स्थिति में भ्रम पैदा हुआ।
असम NRC (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिज़न्स) का मामला
– इससे देशभर में चिंता फैली कि कहीं बाकी राज्यों में भी NRC लागू न कर दिया जाए.
– कई परिवारों में दस्तावेज़ों की कमी या पुरानी रजिस्ट्रियों में गलती की वजह से लोग डरे.
CAA (नागरिकता संशोधन कानून) 2019
– इस कानून ने नागरिकता को धार्मिक आधार पर बांटने की कोशिश की.
– भारत की नागरिकता व्यवस्था अब तक धर्म-निरपेक्ष थी. लेकिन CAA में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने की व्यवस्था की गई और मुसलमानों को इससे बाहर रखा गया. इससे देशभर में आंदोलन, विरोध, और असुरक्षा की भावना फैली.

