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Project 75I: आसमान और जमीन के बाद अब भारत अपनी समुद्री ताकत को बढ़ाने में जुटा है. इंडियन नेवी एयरक्राफ्ट कैरियर, वॉरशिप और सबमरीन यानी पनडुब्बी पर हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही है. अब एक और बड़ी डिफेंस डील क…और पढ़ें
भारत समंदर में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए पनडुब्बी से जुड़े प्रोजेक्ट पर हैवी इन्वेस्टमेंट करने जा रहा है. (फोटो: एपी/फाइल)
हाइलाइट्स
- इंडियन नेवी सबमरीन डेवलपमेंट पर हजारों करोड़ खर्च कर रही है
- प्रोजेक्ट-75I के तहत अब 1 लाख करोड़ से ज्यादा का डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट
- मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स को मिल सकता है बड़ा ठेका, चल रही तैयारी
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का ठेका हासिल कर सकती है. (फोटो: एपी/फाइल)
72 मीटर लंबाई, 2000 टन वजन
दो क्लास में सबमरीन डेवलप करने की प्लानिंग है. (फोटो: पीटीआई/फाइल)
₹36,000 करोड़ की स्कॉर्पीन-क्लास सबमरीन
दूसरा बड़ा कॉन्ट्रैक्ट ₹36,000 करोड़ की लागत से तीन नई स्कॉर्पीन-क्लास पनडुब्बियों के निर्माण का है. ये पनडुब्बियां मौजूदा कलवरी-क्लास से बड़ी और अधिक उन्नत होंगी, जिनमें 60% स्वदेशी सामग्री होगी. इनका डिज़ाइन ब्राजील नेवी को आपूर्ति की गई पनडुब्बियों से मेल खाएगा. पहली स्कॉर्पीन पनडुब्बी 6 साल में तैयार होगी, बाकी दो पनडुब्बियां हर साल डेलीवर करने की प्लानिंग है. वर्तमान में इंडियन नेवी के पास 16 पनडुब्बियां हैं, जिनमें हाल ही में INS वाघशीर के शामिल होने से प्रोजेक्ट 75 की छह कलवरी-क्लास पनडुब्बियों का निर्माण पूरा हो गया है. रीजनल सिक्योरिटी को देखते हुए (खासकर चीन की हिंद महासागर में बढ़ती मौजूदगी और पाकिस्तान की सबमरीन क्षमता में विस्तार) ने भारत को पनडुब्बियों की संख्या और गुणवत्ता बढ़ाने को मजबूर किया है. चीन के पास इस समय 355 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियां हैं, जो उसे दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बनाती हैं. इसके जवाब में भारत 2035 तक 175 जहाजों वाली नौसेना बनाने की योजना पर काम कर रहा है. फिलहाल भारत के पास 130 से अधिक जहाज हैं और 61 युद्धपोत निर्माणाधीन हैं.
देसी तकनीक
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने कलवरी-क्लास पनडुब्बियों के लिए स्वदेशी AIP सिस्टम विकसित किया है. दिसंबर 2024 में सरकार ने इसके लिए ₹1,990 करोड़ का अनुबंध MDL के साथ साइन किया. इस सिस्टम का पहला प्लग INS कलवरी पर सितंबर 2025 में उसके मेजर रीफिट के दौरान लगाया जाएगा. साथ ही एक अन्य कॉन्ट्रैक्ट ₹877 करोड़ का नेवल ग्रुप (फ्रांस) के साथ किया गया है, जिसके तहत कलवरी-क्लास पनडुब्बियों में इलेक्ट्रॉनिक हेवी वेट टॉरपीडो लगाए जाएंगे, जिससे उनकी मारक क्षमता बढ़ेगी. इन परियोजनाओं से देश में बड़ी तादाद में रोजगार के मौके बनेंगे. AIP परियोजना अकेले लगभग तीन लाख मैन-डे का रोजगार उत्पन्न करेगी. MDL और इसके सहयोगी पहले ही 50 से अधिक भारतीय कंपनियों को शामिल कर चुके हैं. फ्रांसीसी नेवल ग्रुप की भारतीय शाखा भी 70 से अधिक भारतीय इंजीनियरों को नौसेना परियोजनाओं में सहायता दे रही है. MDL की निर्माण क्षमता में एक साथ 11 पनडुब्बियों और 10 विध्वंसक जहाजों का निर्माण शामिल है. कंपनी पहले ही छह स्कॉर्पीन-क्लास पनडुब्बियों की सफल डिलीवरी कर चुकी है.
बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु… और पढ़ें

