Jhunjhunu Road video: झुंझुनूं के उदयपुरवाटी क्षेत्र में भारी बारिश ने सरकारी तंत्र की पोल खोल दी है। 12.31 करोड़ की लागत से बनी बाघोली-पापड़ा सड़क उद्घाटन से पहले ही बह गई, जिससे कई गांवों का संपर्क टूट गया। ग्रामीणों ने घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया है और मामले की जांच की मांग की है।

बारिश क्या हुई, सरकारी निर्माण की हकीकत और उनकी सोच बहकर बाहर आ गई। सोमवार तडक़े 3 बजे से सुबह 8 बजे तक सिर्फ 5 घंटे में 86 मिमी बारिश हुई। काटली नदी ने अपना पुराना रास्ता पकड़ते हुए नई बनी सडक़ को ही निगल लिया। पानी के तेज बहाव में सडक़ बह गई और दर्जनों गांवों का संपर्क कट गया।
सडक़ बनी, उद्घाटन नहीं हुआ
2023 में शुरू हुए इस सडक़ निर्माण पर देवी सहाय एंड कंपनी द्वारा काम किया गया। 10.5 किलोमीटर लंबी इस सडक़ को एनएच-52 से जोडऩे के लिए तैयार किया गया था, लेकिन अभी उद्घाटन की नौबत भी नहीं आई और पहली ही बारिश में सडक़ बह गई। अब बाघोली, पापड़ा, पचलंगी, जहान, गुहाला जैसे गांवों का संपर्क टूट गया है।
ठेकेदारों की लीपापोती, अधिकारियों की अनदेखी, जनता हुई परेशान
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले ही घटिया सामग्री और सेफ्टी वॉल की कमी को लेकर चेताया था, लेकिन पीडब्ल्यूडी ने बजट नहीं है- कहकर उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया। अब वही अनदेखी लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। गांववाले बोले: सिर्फ कागजों में थी गुणवत्ता, असल में घटिया माल डाल सडक़ पक्की कर दी गई।
प्रदर्शन से गरमाया माहौल, कार्रवाई की उठी मांग
सडक़ टूटने के बाद बाघोली में ग्रामीणों ने जमकर प्रदर्शन किया। लीलाधर सैनी, दीपक मीणा, धन्नाराम, हंसराज जैसे ग्रामीणों ने ठेकेदार और अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। ग्रामीणों ने कहा कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही पुनर्निर्माण कार्य तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में कराया जाए।
7 किलोमीटर का चक्कर, 2 किलोमीटर की दूरी के लिए!
सडक़ बहने के बाद अब ग्रामीणों को बाघोली से पापड़ा पहुंचने के लिए 2 किलोमीटर की सीधी सडक़ की बजाय 7 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। बस सेवाएं भी डायवर्ट हो चुकी हैं। लोग अब गुढ़ा और झुंझुनूं जाने के लिए मणकसास तिराहे से होकर निकलने को मजबूर हैं।


