India
oi-Bhavna Pandey
What is Article 142: देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने देश की न्यायपालिका को लेकर बड़ा बयान दिया है और न्यायपालिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा “अनुच्छेद 142 लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ न्यायधीशों के लिए एक न्यूक्लियर मिसाइल बन गया है। जो जजों को सातों दिन उपलब्ध है।
आइए जानते हैं आखिर क्यों जजों पर भड़के उपराष्ट्रपति धनखड़ और संविधान का अनुच्छेद 142 क्या है जिसे उपराष्ट्रपति ने देश की सर्वोच्च न्यायालय की न्यूक्लियर मिशाइल बताया है।

सुप्रीम कोर्ट के जजों पर क्यों भड़के उपराष्ट्रपति?
दरअसल, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने न्यायपालिका की हालिया कार्रवाइयों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, विशेष रूप से विधायी मामलों के संबंध में राष्ट्रपति को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की आलोचना की है। धनखड़ ने उस आदेश का जिक्र किया जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने विधेयकों को मंजूरी देने के लिए राष्ट्रपति पर समय सीमा तय की थी।

धनखड़ ने कहा “सुप्रीम कोर्ट के हाल ही के एक फैसले में राष्ट्रपति को निर्देश दिया गए हैं। देश में क्या हो रहा है, हम कहां जा रहे हैं। लोकतंत्र में हमने ऐसे दिन की कभी उम्मीद भी नहीं की थी। जज राष्ट्रपति डेडलाइन के अंदर फैसले लेने के लिए कहते हैं, अगर ऐसा नहीं होता है तो विधेयक कानून बन जाता है।”

जज सुपर संसद बन गए हैं
धनखड़ ने इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट की तुलना संविधान के अनुच्छेद 142 को लोकतांत्रिक संस्थाओं के खिलाफ “परमाणु मिसाइल” के रूप में इस्तेमाल करने वाले न्यायालय से की। उन्होंने तर्क दिया कि यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक गंभीर खतरा है, क्योंकि हमारे देश में ऐसे जज हैं जो कानून बनाएंगे और ये न्यायपालिका में भी काम करेंगे, जो सुपर संसद की तरह काम करेंगे। इनकी कोई जवाबदेही नहीं होगी क्योंकि देश का कानून उन पर लागू नहीं होता है।
अनुच्छेद 142 लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ SC की न्यूक्लियर मिसाइल
धनखड़ ने न्यायिक प्रक्रिया में विसंगति की ओर इशारा करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के खिलाफ संवैधानिक निर्णय मात्र दो न्यायाधीशों की पीठ द्वारा किया गया, जबकि संविधान के अनुच्छेद 145(3) में ऐसे मामलों के लिए न्यूनतम पाँच न्यायाधीशों की पीठ का प्रावधान है। उन्होंने कहा वर्तमान समय में सुप्रीम कोर्ट में 30 न्यायाधीस हो गए हैं इसलिए अब अनुच्छेद 145(3) में संशोधन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा अनुच्छेद 142 लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ एक न्यूक्लियर मिसाइल बन गया है, जो न्यायपालिका के लिए 24 घंटे उपलब्ध है।
क्या है अनुच्छेद 142?
अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय को किसी भी मामले में “पूर्ण न्याय” के लिए आवश्यक आदेश पारित करने की शक्ति प्रदान करता है, जो पूरे भारत में लागू होता है। अनुच्छेद 142 को कानूनी उपायों की अनुपस्थिति में निर्णायक रूप से कार्य करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय को सशक्त बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट इन ऐतिहासिक मामलों में कर चुकी है फैसले
इस प्रावधान का उपयोग विभिन्न ऐतिहासिक मामलों में किया जा चुका है। जिसमें 30 जनवरी 2024 को चंडीगढ़ मेयर चुनाव के नतीजों को पलटना और ऐतिहासिक बाबरी-राम जन्मभूमि का फैसला शामिल है, जिसमें न्यायालय ने पूर्ण न्याय प्राप्त करने के लिए हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों को भूमि आवंटित करने का आदेश दिया था।
तमिलाडु से जुड़ा है ये मामला
उपराष्ट्रपति की ये टिप्पणी तमिलनाडु सरकार और राज्यपाल के बीच मामले में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के जवाब में थी, जहां न्यायालय ने विधायी प्रक्रिया में सीधे हस्तक्षेप करके एक मिसाल कायम की। इस फैसले में राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को राज्यपाल द्वारा मंजूरी देने के लिए एक समय सीमा निर्धारित की गई थी, जिसमें राज्य को समय सीमा पूरी न होने पर राष्ट्रपति के खिलाफ न्यायिक निवारण की मांग की गई थी।
ऐसे मामलों में जहां राज्यपाल द्वारा किसी विधेयक को असंवैधानिक बताकर वापस कर दिया जाता है, राष्ट्रपति को अनुच्छेद 143 के अनुसार निर्णय लेने से पहले सुप्रीम कोर्ट से परामर्श करने की सलाह दी जाती है।
-

जज के घर से कैश बरामदगी मामले पर भड़के उपराष्ट्रपति, कहा- मामला दर्ज करने के लिए विशेष अनुमति क्यों?
-

Supreme Court Verdict: इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, जानिए क्या है पूरा मामला?
-

क्या मुसलमानों पर शरीयत के बजाय उत्तराधिकार कानून लागू हो सकता है? सुप्रीम कोर्ट करेगा जांच
-

Waqf Act: वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति नहीं, SC ने वक्फ कानून पर 7 दिनों में मांगा सरकार से जवाब
-

क्या है Waqf by user, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, कहा- अगली सुनवाई तक इसमें नहीं होगा कोई बदलाव
-

‘मुस्लिम अगर हिंदू बोर्ड में होंगे तो चलेगा’, वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट के 5 सवाल, केंद्र ने क्या दिया जवाब
-

Bengal Teachers Recruitment Scam: क्लासरूम में पढ़ा सकेंगे शिक्षक! सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर तक दी मोहलत
-

Waqf Act: क्या मुस्लिम हिंदू ट्रस्ट का हिस्सा होंगे? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा
-

वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, SC ने जताई 3 चिंताएं, कहा- बेंच पर बैठने के बाद हमारा कोई धर्म नहीं
-

BR Gavai: कौन हैं जस्टिस बीआर गवई? जो अगले होंगे भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश, 14 मई को लेंगे शपथ
-

Waqf Amendment Bill: सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ अधिनियम के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई की, जानिए क्या-क्या हुआ?
-

साइनबोर्ड पर उर्दू से चिढ़ क्यों? सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, कहा- गंगा-जमुनी तहज़ीब की शोभा है उर्दू
-

Waqf Amendment Act 2025: सुप्रीम कोर्ट में आज 73 याचिकाओं पर सुनवाई, जानें क्या-क्या उठाए गए मुद्दे?
-

India Justice Report 2025: उच्च न्यायालयों में हर दूसरा मामला 3 साल से लंबित, कैसे होगा समय पर इंसाफ?
-

‘अत्यधिक असंवेदनशील’, बलात्कार मामले में HC की टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी, जानिए मामला

